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भूकंप से खिसकी इस देश की धरती, किन तरंगों के कारण हुआ ऐसा?

प्रकृति के कई ऐसे रहस्य हैं जिन्हें आज भी इंसान समझ नहीं पाते हैं. साल 2011 में जापान के तोहोकू-ओकी क्षेत्र में आया 9.0 तीव्रता का भूकंप और उसके बाद उठी सुनामी की लहरों ने जो तबाही मचाई थी, उसे आज तक दुनिया भुला नहीं पाई है, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाला खुलासा […]

प्रकृति के कई ऐसे रहस्य हैं जिन्हें आज भी इंसान समझ नहीं पाते हैं. साल 2011 में जापान के तोहोकू-ओकी क्षेत्र में आया 9.0 तीव्रता का भूकंप और उसके बाद उठी सुनामी की लहरों ने जो तबाही मचाई थी, उसे आज तक दुनिया भुला नहीं पाई है, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है जिसने सभी को हैरान कर दिया है.

जापान भौगोलिक नक्शे से खिसका?

एक नई रिसर्च में सामने आया है कि इस भीषण प्राकृतिक आपदा ने न सिर्फ जान-माल को नुकसान पहुंचाया है बल्कि जापान को देश के भौगोलिक नक्शे से ही खिसका दिया है. यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के वैज्ञानिकों ने जो रिसर्च की उसमें यह सामने आया है कि तोहोकू-ओकी भूकंप के बाद पूरा जापान अपनी मूल जगह से खिसकर 5-6 मिलीमीटर आगे बढ़ गया था.

बेहद असामान्य है ये घटना

सुनने में 5-6 मिलीमीटर भले ही चींटी जितनी लगे, लेकिन विज्ञान की नजर में किसी पूरे देश की जमीन और उसकी अंतरराष्ट्रीय सरहद का एक साथ अपनी जगह से हिल जाना एक बेहद ही असामान्य और डरावनी घटनाओं में से एक है. इससे पहले आधुनिक विज्ञान के इतिहास में कभी भी भूभाग में इस तरह की एकतरफा भौगोलिक हलचल देखने को नहीं मिली है.

क्या है ग्लोबल नेविगेशन सिस्टम?

दुनियाभर के विशेषज्ञों का ध्यान खींचने वाली इस खोज को मुमकिन बनाया है अंतरिक्ष में मौजूद आधुनिक सैटेलाइट्स ने. इस शोध के लिए वैज्ञानिकों ने ग्लोबल नेविगेशन सिस्टम के बेहद सटीक डेटा का बारीकी से अध्ययन किया. यह एक ऐसी एडवांस तकनीक है, जो कि धरती की सतह पर होने वाले एक मिलीमीटर से भी छोटे बदलावों को आसानी से पकड़ लेती है.

भूकंप के बाद किया गया डेटा का मिलान

जापान में भूकंप आने के बाद जब वैज्ञानिकों ने जापान के अलग-अलग हिस्सों से मिले डेटा का मिलान किया तो जो बातें सामने आईं उसे देखकर वैज्ञानिक भी हैरान रह गए कि आखिर पूरा देश एक ही दिशा में कैसे खिसक सकता है. जिसके बाद काफी लंबे समय तक चले जटिल विश्लेषण और कंप्यूटर मॉडल्स की मदद से वैज्ञानिकों ने उस एक वजह का पता लगा ही लिया जिसके कारण ये घटना घटी थी.

धरती के अंदर पैदा हुई थीं भूकंपीय तरंगे

भूकंप के मुख्य झटके के दौरान धरती के अंदर से खास तरह की शक्तिशाली भूकंपीय तरंगे पैदा हुई थीं, जिनको विज्ञान की दुनिया में ScS वेव्स कहा जाता है. ये तरंगे सतह से निकलकर सीधे धरती की गहराई में मौजूद लोहे के उबलते हुए कोर तक गईं. वहीं से टकराकर ये तरंगे एक रबर की गेंद की तरह वापस ऊपर सतह की ओर लौटीं और पूरी जमीन को धक्का दे दिया.

100 से 200 सेकेंड में खिसक गई थी धरती

इस पूरी घटना की टाइमलाइन और इसकी रफ्तार बेहद दिलचस्प है. रिपोर्ट के अनुसार जब जापान में भूकंप का मुख्य झटका खत्म हो चुका था, उसके ठीक 15 मिनट के बाद ये तरंगें धरती के कोर से परावर्तित होकर वापस सतह पर पहुंचीं थीं. जमीन खिसकने की यह प्रक्रिया बहुत ही शांत तरीके से महज 100 से 200 सेकेंड में पूरी हो गई थी. यही वजह है कि उस वक्त आम नागरिकों को अपने पैरों के नीचे से जमीन खिसकने का जरा भी एहसास नहीं हुआ. क्योंकि यह कोई अचानक लगने वाला झटका नहीं बल्कि एक धीमी गति की भूगर्भीय शिफ्टिंग थी.

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