कोरोना मरीजों के इलाज से प्लाज्मा थेरेपी को किया बाहर, जानिए वजह!
कोरोना संक्रमण के इस दौर में प्लाज़्मा थेरेपी को लेकर पिछले काफी वक्त से चर्चाएं थीं. पहले इस थेरेपी को कोरोना मरीजों के लिए मददगार माना जा रहा था. मरीजों में कोरोना से ठीक हो चुके लोगों का प्लाज्मा चढ़ाने के लिए कई जगह तो बाकायदा अभियान चल रहा था. प्लाज्मा बैंक तक खोल दिए गए थे. लेकिन अब इस प्लाज्मा थेरेपी को कोविड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल से हटा दिया गया है.
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक जॉइंट मॉनीटरिंग ग्रुप ने कोरोना मरीजों के मैनेजमेंट को लेकर रिवाइज्ड गाइडलाइंस जारी की हैं. इन गाइडलाइंस में प्लाज्मा थेरेपीका जिक्र नहीं है. देश में बायोमेडिकल रिसर्च की सबसे बड़ी संस्था है ICMR यानी इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च. इसने बताया है कि नए दिशानिर्देशों से प्लाज्मा थेरेपी को हटा दिया गया है. ऐसा इसलिए कि कोरोना बीमारी की गंभीरता को दूर करने और मौतों को कम करने में ये थेरेपी फायदेमंद साबित नहीं हुई है.
प्लाज़्मा होता क्या है?
हमारे खून में रेड ब्लड सेल्स, व्हाइट ब्लड सेल्स के अलावा एक पीले रंग का लिक्विड भी मौजूद होता है. इस लिक्विड में 90 प्रतिशत पानी के अलावा प्लेटलेट्स, प्रोटीन, मिनरल्स, हार्मोन्स व अन्य चीजें मौजूद होती है. इसमें ही होता है प्लाज़्मा. अब इसको ऐसे भी समझ सकते हैं कि हमारे ख़ून का करीब 55 प्रतिशत प्लाज्मा होता है. शरीर को रोगों से बचाने में प्लाज़्मा का बहुत बड़ा रोल होता है. जब शरीर पर कोई बीमारी हमला करती है, तब इसी प्लाज़्मा में मौजूद रोग प्रतिरोधक तत्त्व बीमारी का मुकाबला करते हैं. कोरोना के केस में जो प्लाज़्मा मरीज को दिया जाता है, उसे convalescent plasma कहते हैं. यानी कोरोना से जो शख्स रिकवर हो चुके हैं, उनके शरीर से निकाला गया प्लाज़्मा. अभी तक की गाइडलाइंस के मुताबिक, कोरोना के लक्षणों की शुरुआत के बाद, 7 दिनों के अंदर प्लाज्मा थेरेपी के इस्तेमाल की इजाजत थी.
विशेषज्ञों ने बताया था गैर-वैज्ञानिक
नेशनल टास्क फोर्स और ICMR की शुक्रवार 14 मई को एक मीटिंग हुई थी. इसमें सभी सदस्य प्लाज्मा थेरेपी को बालिग कोविड मरीजों के इलाज में इस्तेमाल न करने को लेकर सहमत थे. इसी मीटिंग के बाद सरकार की ओर से नई गाइडलाइंस जारी की गई हैं. ICMR के एक अधिकारी ने बताया कि कोरोना के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी के उपयोग को कई चिकित्सा विशेषज्ञ और वैज्ञानिक तर्कहीन, अवैज्ञानिक बता चुके हैं.
एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?
AIIMS के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने अप्रैल में कहा था कि प्लाज़्मा थेरेपी को लेकर बहुत खबरें आ रही हैं. लेकिन शोध बताते हैं कि इसका कोरोना के इलाज में कोई ज़्यादा फ़ायदा नहीं है. इसकी भूमिका बहुत सीमित है.
दिल्ली सरकार करती रही है वकालत
दिल्ली सरकार कोरोना के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी का खुलकर सपोर्ट करती रही है. अरविंद केजरीवाल सरकार ने ही देश का पहला प्लाज्मा बैंक ILBS अस्पताल में खुलवाया था. दिल्ली के हेल्थ मिनिस्टर सत्येंद्र जैन प्लाज्मा थेरेपी के इस्तेमाल के लिए खुद अपना उदाहरण देते रहे हैं. जैन का मानना है कि जब कोरोना की वजह से उनकी तबीयत बिगड़ गई थी तो प्लाज्मा थेरेपी की वजह से ही उनकी जान बची. अक्टूबर 2020 में सत्येंद्र जैन ने दावा किया था कि दिल्ली में 2 हजार से ज्यादा कोरोना मरीज प्लाज्मा थेरेपी की वजह से ठीक हो चुके हैं.
दिल्ली के मदन मोहन मालवीय अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर, डॉक्टर मणि शंकर प्रियदर्शी ने भी दावा किया था कि हमने देखा है कि मॉडरेट कोविड से पीड़ित मरीज को अगर प्लाज़्मा थेरेपी दी जाती है तो अच्छे नतीजे सामने आते हैं. लेकिन हालत गंभीर होने के बाद ये थेरेपी काम नहीं करती. वेंटीलेटर वाले मरीजों पर भी इसका असर कम होता है.
बहरहाल, इस तरह के दावे चाहे कुछ हों, लेकिन अब केंद्र सरकार ने प्लाज्मा थेरेपी को कोरोना के ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल से बाहर कर दिया है.
