*👉🏻 ‘यदि सृष्टि हमें चलानी है तो कन्या संतान बचानी है’ ये पंक्तियां सिर्फ किताबों तक ही सीमित रह गई* *👉🏻 आज फिर दो दिन की कन्या को बेदर्द मां ने फैंका मरने के लिए,लोगों ने बचाकर दाखिल करवाया अस्पताल*


जालंधर,22 सितम्बर-(प्रदीप भल्ला)-आज इंसानियत के दो रूप देखने को मिले। एक बेदर्द और दूसरा हमदर्द। आज एक बार फिर किसी बेदर्द मां ने अपनी दो दिन की बेटी को मरने के लिए फैंक दिया। लेकिन किसी भले आदमी ने उस बच्ची को बचा कर अस्पताल में दाख़िल करवा दिया। आज सुबह थाना एक के अंतर्गत आती कालिया कालोनी में कुछ लोग सैर कर रहे थे कि उन्हें किसी बच्ची के रोने की आवाज़ सुनाई दी। जब लोगों ने देखा तो ईंटों पर एक दो दिन की बच्ची पड़ी हुई थी और रो रही थी। तभी उन लोगों में से एक भले इंसान ने उस बच्ची को उठाया और अपने घर ले गया। जहां पर उक्त परिवार ने उस बच्ची को साफ कपड़े पहनाए और पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने उस मासूम को अस्पताल दाखिल करवा उसके मां-बाप की तलाश शुरू कर दी है। इस घटना से ये बात तो साबित हो गई कि लोगों को बेटियों को न मारने के लिए जो जागरूकता चलाई जा रही है। लोग उनपर अमल नहीं कर रहे। “21वीं सदी है बेटियों का दौर है लाई, यदि सृष्टि हमें चलानी है तो कन्या संतान बचानी है” जैसे स्लोगन सिर्फ किताबों तक ही सीमित रह गए है। लोग इन पर अमल नहीं कर रहे। पुलिस प्रशासन को चाहिए कि जिन लोगों ने आज इस मासूम को मरने के लिए सड़क पर फैंका हैं उन्हें ढूंढ कर सख्त सज़ा दी जाए।


