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‘महात्मा गांधी ने जान देकर पाकिस्तान को बचाया’,पाकिस्तानी प्रोफेसर का खुलासा- कैसे 1947 में ही बिखर सकता था जिन्ना का देश

इस्लामाबाद: स्टॉकहोम विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर इश्तियाक अहमद का मानना है कि बंटवारे के वक्त महात्मा गांधी और जवाहलाल नेहरू ने पाकिस्तान को जीवनदान दिया था। उन्होंने कहा कि अगर नेहरू-गांधी जैसे बड़े कद के नेता ना होते तो शायद भारत से सभी मुसलमानों को पाकिस्तान आना पड़ता और उस भीड़ को संभालना […]

इस्लामाबाद: स्टॉकहोम विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर इश्तियाक अहमद का मानना है कि बंटवारे के वक्त महात्मा गांधी और जवाहलाल नेहरू ने पाकिस्तान को जीवनदान दिया था। उन्होंने कहा कि अगर नेहरू-गांधी जैसे बड़े कद के नेता ना होते तो शायद भारत से सभी मुसलमानों को पाकिस्तान आना पड़ता और उस भीड़ को संभालना जिन्ना के बस से बाहर की बात होती। इसका नतीजा ये निकलता कि पाकिस्तान उसी वक्त अराजकता का शिकार होकर बिखर जाता।प्रोफेसर इश्तियाक जिन्ना की सांप्रदायिक राजनीति के आलोचक रहे हैं।पाकिस्तान अनटोल्ड के एक्स अकाउंट पर शेयर किए गए वीडियो में पाकिस्तान के न्यूक्लियर फिजिस्ट और रक्षा विश्लेषक परवेज हुडभॉय के साथ एक बातचीत में प्रोफेसर इश्तियाक अहमद ने नेहरू, गांधी और जिन्ना के बारे में ये बातें कही हैं। स्वीडन में रहने वाले पाकिस्तानी मूल के प्रोफेसर अहमद बंटवारे के दौरान की सांप्रदायिक ताकतों की खुलकर मुखालफत करने और नेहरू-गांधी जैसे समावेशी विचारों वाले के नेताओं की तारीफ करने के लिए जाने जाते हैं।

‘सारे मुसलमान आते बिगड़ते हालात’
इश्तियाक अहमद से परवेज हुडभॉय ने सवाल किया था कि क्या बंटवारे के वक्त जिन्ना नहीं चाहते थे कि लोगों का एक पूरा समंदर भारत से इस तरफ आ जाए। इस पर प्रोफेसर अहमद ने कहा कि ये सही बात है क्योंकि भारत से बंटवारे के उस वक्त साढे तीन करोड़ लोग आ सकते थे। जिन्ना जानते थे कि पाकिस्तान उस भीड़ को संभालने के हालत में नहीं था।

इश्तियाक अहमद ने आगे कहा, ‘बंटवारे में जैसे हमने किसी सिख और हिंदू को अपनी जमीन पर नहीं रहने दिया, उसी तरह अगर भारत से सारे मुसलमान आते तो पाकिस्तान के सामने बहुत बड़ी मुश्किल खड़ी हो जाती। उस वक्त सारे मुसलमान पाकिस्तान में आते तो 3 करोड़ लोग पश्चिम पाकिस्तान और 50 लाख बिहार-बंगाल और आसपास के इलाकों से पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) में पहुंचते।’
दोगुनी हो जाती जनसंख्या
अहमद ने कहा कि 1947 में पश्चिम पाकिस्तान की आबादी करीब 3.4 करोड़ थी। इसमें 3 करोड़ लोग और आ जाते तो जनसंख्या अचानक से दोगुनी हो जाती। उस वक्त पाकिस्तान की माली हालत अच्छी नहीं थी और पूर्वी पाकिस्तान में तो बहुत ज्यादा गरीबी थी। तय मानिए कि उस मुश्किल हालात में साढ़े तीन करोड़ लोगों के आने से पाकिस्तान को फेल (कोलेप्स) हो जाना था।उन्होंने कहा, ‘हम कह सकते हैं कि नए बने पाकिस्तान को महात्मा गांधी ने अपनी जान देकर बचाया। पंडित नेहरू ने आरएसएस और हिंदू महासभा जैसे सांप्रदायिक संगठनों के खिलाफ मुस्लिमों को सुरक्षा का भरोसा देकर उनको रोका। इसने पाकिस्तान को बनते ही तबाह होने से बचा लिया। इसके लिए यकीनन जिन्ना को इन दोनों नेताओं का शुक्रगुजार होना चाहिए था।’

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