दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने पुलिस पर लाठीचार्ज, मारपीट और अभद्र व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं। कई घायल छात्र मंगलवार को भी आंदोलन में शामिल हुए और कहा कि कार्रवाई के बावजूद उनका हौसला नहीं टूटा है। कॉकरोच जनता पार्टी का नीट पेपर लीक, परीक्षाओं में गड़बड़ी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर प्रदर्शन जारी है। सीजेपी ने 20 जुलाई को संसद चलो मार्च का आयोजन किया था, जिसमें प्रदर्शनकारी और पुलिस आमने-सामने हो गए। पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज भी किया। जिसमें कई प्रदर्शनकारी घायल हुए है। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर मारपीट और अभद्र व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए।एक छात्र ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि जब प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से आगे बढ़ रहे थे, उसी दौरान वह पानी की बोतल भरने के लिए रुके थे। तभी पुलिसकर्मियों और कुछ सादे कपड़ों में मौजूद लोगों ने उनके साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी।
छात्र ने लगाए आरोप
छात्र ने आरोप लगाया कि जब प्रदर्शनकारियों ने सादे कपड़ों में मौजूद लोगों से उनकी पहचान पूछी तो उन्होंने बताने से इनकार कर दिया और हंसने लगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनमें से एक व्यक्ति ऐसी लाठी का इस्तेमाल कर रहा था, जिसमें कीलें लगी हुई थीं।
वहीं एक अन्य छात्र ने भी इसी तरह का आरोप लगाया। प्रदर्शन के दौरान छात्र को पेट में चोट लगी थी, लेकिन इसके बाद भी वह एक बार फिर जंतर-मंतर पर आंदोलन में पहुंच गए। छात्र ने बताया कि पुलिस ने उन पर स्क्रू लगी लाठियों से हमला किया, लेकिन इससे उनका हौसला नहीं टूटा और इसलिए वह दोबारा आंदोलन में शामिल हुए।
छात्राओं को भी मारे थप्पड़
प्रदर्शन में शामिल छात्र ने आरोप लगाया कि महिला पुलिसकर्मियों ने जुलूस में शामिल छात्राओं को थप्पड़ मारे। उनके मुताबिक, 11वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों तक को नहीं बख्शा गया।वहीं एक छात्रा ने आरोप लगाया कि रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के एक जवान ने पहले उसका पैर दबाया और फिर डंडे से पीटा। छात्रा ने बताया कि लाठीचार्ज के दौरान जनपथ मेट्रो स्टेशन के पास भगदड़ जैसी स्थिति बन गई थी और प्रदर्शनकारियों को जान बचाकर भागना पड़ा। उसका यह भी आरोप है कि कार्रवाई के दौरान महिला छात्रों से पुलिसकर्मियों ने कहा- हद में रहो।चोटिल होने के बाद भी एक बार फिर छात्रा प्रदर्शन में शामिल हो गईं। जब उससे पूछा गया कि वह दोबारा क्यों लौटी, तो उसने कहा कि नेतृत्व वहां हो या न हो, यह लड़ाई किसी एक संगठन से बड़ी है।

