इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की राडार पर 2 करोड़ से ज्यादा लोग, इस लिस्ट में कहीं आप भी तो नहीं..!

डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में कमी के बाद इनकम टैक्स डिपार्टमेंट बहुत सख्त होने जा रहा है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स (सीबीडीटी) ने आईटी डिपार्टमेंट को टैक्स के दायरे में आने के बावजूद रिटर्न फाइल नहीं करने वाले एवं रिटर्न फाइल करना बंद करने वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
लिस्ट में करीब 2 करोड़ से ज्यादा लोग शामिल
खासकर उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया, जो पहले रिटर्न फाइल करते थे, लेकिन अब नहीं कर रहे हैं। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के अनुसार जिन लोगों पर कार्रवाई की तैयारी चल रही है। उस लिस्ट में देशभर के 2 करोड़ से अधिक लोग हैं।ऐसे लोगों की पहचान कर ली गई है। यहवो लोग हैं, जिन्होंने साल 2013-2017 के बीच या तो रिटर्न फाइल नहीं किया है या फिर रिटर्न फाइल करना बंद कर दिया है। सीबीडीटी ने इनकम टैक्स विभाग को आगामी 30 जून तक कार्रवाई करने के लिए कहा गया है।
देर से रिटर्न फाइल करने वालों से जुर्माना का प्रावधान
आइटी अधिकारियों ने बताया कि चिह्रित लोगों को नोटिस भेजने का काम शुरू हो गया है। डिपार्टमेंट के मुताबिक इन लोगों की पहचान दो तरीके से की जाती है। गौरतलब है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में नॉन फाइलर मोनिटरिंग सिस्टम (एनएमएस) है जो इन लोगों की पहचान का काम करती है।
वहीं, ड्राप फाइलर का मतलब है जो पहले रिटर्न फाइल करते थे, अब नहीं करते हैं। ऐसे लोगों की संख्या 25 लाख है। इन सभी को देशभर में नोटिस भेजने का काम शुरू हो गया है। फिलहाल देर से रिटर्न फाइल करने वालों से जुर्माना लेने का प्रावधान है।
31 दिसंबर के बाद रिटर्न फाइलिंग पर 10 हजार का जर्माना
आइटी के नियम के मुताबिक 31 अगस्त के बाद लेकिन, 31 दिसंबर से पहले रिटर्न फाइल करने वालों से 5000 रुपए का जुर्माना लिया जाता है। 31 दिसंबर के बाद रिटर्न फाइल करने वालों से 10 हजार रुपए जुर्माने का प्रावधान है। हालांकि यदि किसी की कुल इनकम 5 लाख रुपए सालाना से कम है तो उससे अधिकतम 1000 रुपए का जुर्माना लिया जाएगा।
आइटीआर फाइल करने वालों की संख्या में गिरावट
इनकम टैक्स अधिकारियों ने बताया कि जिन लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी है, उनके डाटा को सभी रिजनल ऑफिस के साथ शेयर कर दिया गया है। उन्होंने बतााय कि मोनिटरिंग सिस्टम से प्राप्त डाटा के मुताबिक 2013 के बाद से इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने वालों की संख्या में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है।
जहां साल 2014 में रिटर्न फाइल नहीं करने वालों की संख्या 11 लाख थी। वह साल 2015 में बढ़कर 67 लाख हो गई। वहीं, ड्रॉप फाइलर की संख्या में भी इजाफा हुआ है। आइटी से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक फाइनेंशियल ईयर 2018 में यह संख्या 25 लाख से अधिक हो गई है।
आइटी का टैक्स कलेक्शन बढ़ाने की कवायद
इनकम टैक्स अधिकारियों ने बताया कि इस प्रकार से टैक्स कलेक्शन की समीक्षा करने एवं डाटा की निगरानी करने के साथ डिजिटल पेमेंट की मदद से टैक्स के दायरे को आसानी से बढ़ाया जा सकता है। आइटी डिपार्टमेंट के दायरे में आने वाले लोगों के खिलाफ तीन माह से लेकर दो साल तक में कार्रवाई की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। यदि 25 लाख रुपए से अधिक का सालाना इनकम है तो ये अवधि और भी बढ़ सकती है।
