जालंधर पुलिस पर लूट और कब्जे के आरोप: घर में घुसकर तोड़फोड़, एक साल तक रखा कब्जा-मानवाधिकार आयोग सख्त
जालंधर में पुलिस की कार्य प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। जालंधर निवासी राजीव कुमार शर्मा ने आरोप लगाया है कि 16 फरवरी 2025 को कुछ पुलिस कर्मियों ने उनके घर में जबरन घुसकर ताले तोड़ दिए और वहां से नकदी व जेवरात लेकर चले गए। इतना ही नहीं, उन्हें जबरन थाना डिवीजन नंबर-1 ले जाया गया और बाद में कर्नाटक के बिदर थाने में दर्ज एक मामले में झूठा फंसा दिया गया।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, संबंधित झूठ मामले में उन्हें बाद में कर्नाटक हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना के दौरान क्राइम ब्रांच जालंधर के एक इंस्पेक्टर और रविंदर कुमार जो इस समय थाना नवी बारादरी का SHO है, रविंद्र कुमार व उसकी टीम ने राजीव के घर को लॉक कर दिया।
पीड़ित का कहना है कि करीब एक साल बाद जब वह अपने घर लौटे, तो पाया कि मकान अब भी बंद है और पुलिस के कब्जे में है। जब उन्होंने घर की चाबी मांगी, तो SHO रविंद्र कुमार ने शर्त रखी कि अगर चाबी चाहिए तो राजीव के परिचित संजीव कुमार गुप्ता को पुलिस के खिलाफ दर्ज केस वापस लेने के लिए मनाना होगा।
पीड़ित ने 13 मार्च 2026 को उच्च अधिकारियों को शिकायत भी दी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद मामला पंजाब राज्य एवं चंडीगढ़ यूटी मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा।
आयोग ने मामले को गंभीर मानते हुए इसे मानवाधिकार उल्लंघन का प्रथम दृष्टया मामला माना है और पुलिस कमिश्नर जालंधर को निर्देश दिए हैं कि आरोपों की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाए।
अब इस पूरे मामले पर पुलिस विभाग की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
