सामान्य फ्लू से 60 फीसदी घातक और जानलेवा है ,40 साल बाद फिर नए रूप में लौटा जानलेवा H5N1, बन गया महामारी

नई दिल्ली: 2009 की जुलाई की बात है, ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स में सुअर फॉर्म हाउसों में एक अजीबोगरीब बीमारी फैली, जिसने पूरे ऑस्ट्रेलिया में सुअरों की अपनी चपेट में ले लिया। जांच में पता चला ये सुअर H1N1 यानी इन्फ्लुएंजा से संक्रमित हुए थे। दरअसल, संक्रमण की शुरुआत इंसानों से सुअरों में हुई। तब इसे H1N1/09 नाम दिया गया। सुअरों को जमकर खासी आती और उनकी भूख ही मर गई। कुछ मादा सुअर ऐसी थीं, जिनमें अपने बच्चों के लिए दूध ही नहीं उतरता था। आज यही वायरस पहली बार किसी इंसान से इंसान में फैलता दिख रहा है। यह किस खतरे का संकेत है, इसे समझते हैं।
20वीं सदी में तीन महामारियों में छीनीं 5 करोड़ 30 लाख जानें
cdnsciencepub.com पर छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, इन्फ्लुएंजा A वायरस 20वीं सदी में तीन महामारियों की वजह बना था। इसमें से एक महामारी 1918 में फैली, जिसके पीछे H1N1 जिम्मेदार था। यह इतना घातक था कि इसकी वजह से तब दुनिया भर में 5 करोड़ लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। इसके बाद 1957 में इन्फ्लुएंजा A (H2N2) से 20 लाख लोगों, 1968 में इन्फ्लुएंजा A (H3N2) 10 लाख लोगों की मौत हो गई। इसके बाद इन्फ्लुएंजा महामारी नहीं बन सका।
40 साल बाद फिर नए रूप में लौटा और बन गया महामारी
फिर अरसे बाद 2009 में इन्फ्लुएंजा A (H1N1) लौटा। इसे तब विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने पूरी दुनिया के लिए महामारी घोषित कर दिया था। उस वक्त दुनिया भर में इसके 2.5 लाख केस सामने आए थे, इसमें से 2,832 लोगों की मौत हो गई। अब 21वीं सदी में सबसे बड़ा खतरा H5N1 के रूप में दस्तक दे रहा है, क्योंकि यह इंसान से इंसान में फैलने वाला संक्रमण है। 1997 में पहली बार एवियन इन्फ्लुएंजा वायरस इंसानों में फैला, जिससे 6 लोगों की मौत हो गई।
ऑस्ट्रेलिया में मिला इंसान से इंसान में बर्ड फ्लू का पहला केस
हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में इंसान में ‘बर्ड फ्लू’ संक्रमण के पहले मामले का पता चला। एक बच्चा कुछ सप्ताह पहले भारत में रहते हुए इस संक्रमण की चपेट में आया था। बच्चा अब स्वस्थ है। दरअसल, विक्टोरिया में एक बच्चे में संक्रमण की पुष्टि हुई, जो ऑस्ट्रेलिया में बर्ड फ्लू का पहला मामला है। बच्चा भारत में रहते हुए H5N1 फ्लू का शिकार हुआ था और इस साल मार्च के महीने में बीमार था।
क्या है बर्ड फ्लू, कहां से फैलता है यह
एवियन इन्फ्लुएंजा वायरस को बर्ड फ्लू भी कहते हैं। ये वायरस पक्षियों से पक्षियों में फैलता है और ज्यादातर पक्षियों के लिए जानलेवा भी साबित होता है। यदि कोई व्यक्ति बर्ड फ्लू से संक्रमित जानवर या पक्षी के थूक (लार), सांस लेने के दौरान पानी की बूंदें या पूप (मल) के संपर्क में आते हैं तो उन्हें बर्ड फ्लू हो सकता है। यह वायरस जानवरों के आवास में छोटे धूल कणों से सांस के माध्यम से अंदर जा सकता है या संक्रमित जानवर के शरीर के तरल पदार्थों को छूने के बाद अगर इंसान अपनी आंखों, नाक या मुंह को छुए तो भी संक्रमित हो सकता है।
कितना खतरनाक है यह इन्फ्लुएंजा वायरस
WHO के अनुसार, H5N1 इन्फ्लुएंजा वायरस वैसे तो इंसान से इंसान में संक्रमण सीमित स्तर पर है, मगर यह H1N1 से 60 फीसदी ज्यादा घातक और जानलेवा है। यह वायरस आसानी से इंसानों में फैल सकता है। इसलिए यह ज्यादा खतरनाक माना जा सकता है।
कहां से पनपा है यह खतरनाक वायरस
रांची में इंटरनल मेडिसिन के डॉक्टर रविकांत चतुर्वेदी के अनुसार, इन्फ्लुएंजा के जितने भी रूप हैं, वो सभी पानी के सोर्स से ही पनपे हैं। खासकर तालाबों और नदियों से। हालांकि, पानी में तैरने वाले पक्षी इस वायरस से बीमार नहीं पड़ते हैं। इसमें बदलाव की इतनी जबरदस्त क्षमता होती है कि ये कहीं भी कभी फैल सकता है। यह इंसानों, सुअरों, घोड़ों और कुत्तों में फैल सकता है। इसे ह्मून, स्वाइन, इक्वाइन और कैनाइन इन्फ्लुएंजा वायरस भी कहा जाता है।



