अध्यापकों से अपराधियों जैसा व्यवहार क्यों
जनगणना ड्यूटी पर न पहुचने वाले अध्यापकों से अपराधियों जैसा व्यवहार प्रशासन द्वारा किया जा रहा है। तहसीलदार जालंधर ने पुलिस कमिश्नर को लिखित आदेश जारी कर कहा गया है कि जालंधर में जो अध्यापक (महिला व पुरुष) जनगणना में ड्यूटी देने नहीं पहुंचे है उनको पकड़ कर लाया जाए। जैसे ही ये आदेश टीचर्स यूनियन के पास पहुंचे उनमें रोष व्याप्त हो गया है। ऐसे रवैये के कारण सरकार और प्रशासन के खिलाफ अध्यापकों में गुस्सा भर गया है।
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पुलिस कारवाई से आहत होकर अगर किसी महिला अध्यापक ने कोई अनुचित कदम उठा लिया तो जिम्मेवार कौन?
नाम न छापने की शर्त पर कुछ महिला अध्यापकों ने कहा है कि हर बार शिक्षा विभाग के नुमाइंदों की ड्यूटी लगाई जाती है जबकि दूसरे विभाग के अधिकारियों को इन कामों से दूर रखा जाता है। अब अगर पुलिस प्रशासन अध्यापकों से अपराधियों जैसे व्यवहार करेगा और इससे आहत होकर कोई टीचर अनुचित कदम उठा लेता है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। पहले टीचर स्कूल में बच्चों को पढ़ायेगा फिर गली-गली घूम कर जनगणना करेगा और उसके बाद अपने घर का काम करेगा। टीचर पर तो अतिरिक्त बोझ डाल दिया गया है।
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तहसीलदार ने कहा उनकी जनगणना में कोई ड्यूटी नहीं और न ही उन्होंने आदेश जारी किए
जब इस बारे में तहसीलदार (जालंधर) गुरप्रीत से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उनकी जनगणना में ड्यूटी नहीं है इसलिए उन्हें इन आदेशों के बारे में जानकारी नहीं है। लेकिन तहसीलदार द्वारा जारी किए गए आदेशों की प्रति वायरल हो रही है जिसमें टीचर्स के नाम व मोबाइल नं लिखे हुए है जो गैरहाजिर रहे है और नीचे हस्ताक्षर तहसीलदार के है।
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महिला टीचर्स की सुरक्षा का जिम्मेदारी किसकी
जैसा माहौल बना हुआ है ऐसे में महिला टीचर्स की सुरक्षा की जिम्मेवारी किसकी है। गली-गली,घर-घर जाकर जनगणना करने वाली महिला टीचर के साथ अगर कोई अनहोनी हो जाती है उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। पंजाब में रोजाना वारदातें हो रही है ऐसे में महिला टीचर्स की जान को जोखिम में डाला जा रहा है। जिस कारण सरकार और प्रशासन को विरोध झेलना पड़ सकता है।
