मुन्ना बजरंगी हीं नहीं, इन 5 खूंखार बदमाशों को भी सरेआम मिली कर्मों की सजा…
मुन्ना बजरंगी ही नहीं, देश में 5 और ऐसे खूंखार बदमाश हुए हैं, जिन्हें उनके कर्मों की खौफनाक सजा मिली, वो भी सरेआम। बीच सड़क उन्हें गोलियों से भून दिया गया। जहां पुलिस ने राहत की सांस ली, वहां लोगों को भी उनके जुल्मों से निजात मिली।
27 जनवरी 2018: गैंगस्टर विक्की गौंडर

पंजाब के इस गैंगस्टर ने आतंक मचा रखा था। मुख्यमंत्री तक को ललकार दिया था। फिर एक दिन ऐसा आया कि इस आतंक का खात्मा हो गया। पंजाब पुलिस की काउंटर इंटेलीजेंस की टीम के साथ मुठभेड़ हुई और पंजाब की नाभा जेल से फरार कुख्यात गैंगस्टर विक्की गौंडर ढेर हो गया। पुलिस ने उसके दो साथी जालंधर निवासी प्रेमा लाहौरिया और सुखप्रीत उर्फ बुड्ढा भी मार गिराए।
गौंडर गिरोह पंजाब समेत कई सूबों की पुलिस के लिए सिरदर्द बन चुका था। काउंटर इंटेलीजेंस ने अबोहर के पास पंजाब-राजस्थान की सीमा पर स्थित हिंदूमल कोट के साथ ढाणी करनैल सिंह में विक्की और उसके साथियों को घेर लिया। पुलिस ने उन्हें आत्मसमर्पण करने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने पुलिस पर फायरिंग करते हुए वहां भागने का प्रयास किया।
दोनों ओर से हुई फायरिंग में विक्की गौंडर और प्रेमा लाहौरिया मौके पर ही मारे गए। वहीं उनके तीसरे साथी सुखप्रीत बुड्ढा समेत पंजाब पुलिस के दो कर्मचारी गोली लगने से घायल हो गए। सभी को अबोहर के सरकारी अस्पताल लाया जा रहा था कि रास्ते में तीसरे गैंगस्टर बुड्ढा ने दम तोड़ दिया।
नाभा जेल से फरार होने के बाद विक्की ने कई नेताओं को सरेआम मारने की धमकी दी थी। इसके बाद से पंजाब पुलिस उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही थी। इस एनकाउंटर को पंजाब इंटेलीजेंस पुलिस ने अंजाम दिया था। गैंगस्टर गौंडर 10 लाख का ईनामी था और खास बात ये थी कि वो लोगों को मारने के बाद शव के पास खड़ा होकर भंगड़ा डालता था।
8 अप्रैल 2017: सुरेंद्र ग्योंग

हरियाणा के मोस्टवांटेड बदमाश सुरेंद्र ग्योंग को करनाल पुलिस ने मार गिराया था। करनाल में असंध हल्का के गांव राहड़ा में सुरेंद्र का एनकाउंटर किया गया। सुरेंद्र ग्योंग पर कई राज्यों से हत्या, लूट और फिरौती के दर्जनों मामले दर्ज थे। एनकाउंटर से कुछ महीने पहले कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ग्योंग से अपनी जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा के लिए हाई कोर्ट में भी सुरक्षा की गुहार लगाई थी। ये गैंगस्टर चार राज्यों में मोस्ट वांटेड था।
सुरेंद्र ग्योंग ने वर्ष 1999 में हत्या, डकैती अपहरण की शुरुआत थी। करीब सात साल कैथल में इसका पूरा आतंक रहा। पहले यह कृष्ण पहलवान के साथ मिलकर धंधा करता था। लेकिन पैसे के लेनदेन को लेकर दोनों में अनबन हो गई। इसके बाद इनका गैंग दो गुटों में बंट गया। सुरेंद्र ग्योंग गुट ने पुराने बस अड्डा के सामने कृष्ण पहलवान की हत्या कर दी। इस हत्या के बाद सुरेंद्र ग्योंग की ज्यादा दहशत हो गई। उसका फिरौती का धंधा भी खूब चला। ग्योंग ने करीब 40 व्यापारी डाक्टरों से फिरौती ली।
पत्रकार परमानंद की हत्या भी इसी गुट ने की थी। उसमें ग्योंग को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद कृष्ण पहलवान सुरेंद्र ग्योंग गुट में आपसी गैंगवार चला। इसमें दोनों गुटों के सात आठ लोग मारे गए। कांग्रेस का राज आने के बाद प्लाइवुड का धंधा करने वाले नरेंद्र अरोड़ा की हत्या कर दी। इस हत्या का पूरे शहर ने विरोध किया। कैथल में एक समय ऐसा गया था, जब लोग दिन छिपते ही घरों से बाहर निकलना बंद हो गए थे। नरेंद्र अरोड़ा की हत्या के आरोपी तीन बदमाश फर्जी पासपोर्ट बनवाकर दक्षिण अफ्रीका भाग गए थे। बाद मैं उन्हें काबू किया गया था।
2 जून 2016: अजय सिंह उर्फ कन्नू

सरपंची के चुनाव में भाई की हार का हत्याओं से बदला ले रहे 5 लाख के इनामी बदमाश अजय सिंह उर्फ कन्नू को हरियाणा पुलिस ने पंजाब में मार गिराया था। बठिंडा के तलवंडी इलाके में पुलिस के एनकाउंटर में उसे गोली लगी थी। अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया था। एनकाउंटर के बाद पुलिस ने गैंगस्टर के 4 अन्य साथियों को गिरफ्तार कर लिया।
पकड़े गए बदमाशों में सोनीपत के रहने वाले दीपक, मोहित, राकेश और भोला शामिल हैं। पुलिस ने गैंगस्टर्स की गाड़ी को देखा था और फिर पुलिस उनके पीछे लग गई। गांव रामतीर्थ में गैंगस्टर ने पुलिस पर फायरिंग कर दी, जिसमें गैंगस्टर अजय की मौत हो गई। पुलिस व गैंगस्टरों के बीच 1 घंटा मुकाबला चला।
हरियाणा पुलिस कई दिनों से कन्नू के पीछे लगी थी। कन्नू अपने भाई की हार का बदला लेने के लिए सोनीपत के करवेड़ी गांव में एक के बाद एक हत्या कर रहा था। शुरुआत में उसके उपर 50 हजार रुपये का इनाम था, जिसे बाद में बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया।
पूरे मामले में चुनावी रंजिश सामने आ रही है करेवडी गांव निवासी अजय उर्फ़ कन्नू नाम के युवक के भाई संजय ने सरपंची का चुनाव लड़ा था, जिसमें उसकी हार हो गयी थी। उसके बाद से अजय ने चुनावी रंजिश निकालने के लिए लोगो की हत्या शुरू कर दी। कन्नू सरपंच पर भी जानलेवा हमला कर चुका था।
30 अप्रैल 2016: जसविंदर रॉकी

पंजाब में फाजिल्का के ‘गैंगस्टर’ कहलाने वाले आजाद नेता जसविंदर रॉकी को हिमाचल के सोलन में आज दिनदहाड़े गोलियों से भून डाला गया था। वारदात, सोलन में टिंबर ट्रेल के पास दो अज्ञात हमलावरों ने उस पर ताबड़तोड गोलियां दाग दीं।
जसविंदर सिंह अपने तीन साथियों के साथ सोलन गया था। उसके साथ दो गनमैन भी थे। सोलन से पंजाब वापस लौटते समय उक्त वारदात हुई। वह अपनी गाड़ी में तीन साथियों के साथ चंडीगढ़ की ओर आ रहे थे। उनके गनमैन दूसरी गाड़ी में उनके पीछे आ रहे थे। परवाणू टिंबर ट्रेल के पास एक टिप्पर के पीछे हमलावर घात लगाए बैठे थे।
जैसे ही गाड़ी मोड़ के पास आहिस्ता हुई तो रास्ते में खड़े दो युवकों ने उनकी गाड़ी पर फायरिंग शुरू कर दी। गोली जसविंदर के सिर में जा लगी, जबकि एक साथी गोली लगने से घायल हो गया। जसविंदर को परवाणू के आईएसआई अस्पताल ले जाया गया जहां पर डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
9 सितंबर 2016: दविंदर बंबीहा

गुजरात-महाराष्ट्र समेत देश के अन्य राज्यों में दर्जनों मर्डर केसों में मोस्टवांटेड शार्प शूटर पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। एनकाउंटर, पंजाब के बठिंडा में हुआ था। बठिंडा के एसएसपी को सूचना मिली थी कि रामपुरा क्षेत्र के गांव चोटीयां के समीप कुछ गैंगस्टर किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए आए हैं। रामपुरा फूल के डीएसपी के नेतृत्व में टीम भेजी गई।
पुलिस ने जब चैकिंग शुरू की तो पुलिस टीम को देखकर कुछ युवक खेतों की तरफ भागने लगे। पुलिस ने उन्हें रोकना चाहा तो वे फायरिंग करने लगे। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की। फायरिंग में दविंदर बंबीहा तो मौके पर ही मारा गया, जबकि उसका साथी गैंगस्टर तारा दोसांझ घायल हो गया। दो गैंगस्टर फरार होने में कामयाब हो गए।
सूत्रों के मुताबिक, कुल पांच गैंगस्टरों की पुलिस के साथ मुठभेड़ हुई थी। शार्प शूटर दविंदर बंबीहा 17 महीने से फरार था और देश में दहशत का दूसरा नाम था, क्योंकि वह मुंबई से ट्रेनिंग लेकर शार्प शूटर बना था। वह उसका साथी सर्वजीत सिंह उर्फ शरणी पंजाब सहित गुजरात व महाराष्ट्र की पुलिस को वांटेड थे। दोनों आरोपी 14 सितम्बर 2013 को दोहरे हत्याकांड के मामले को लेकर फरीदकोट में पेशी के दौरान पुलिस को चकमा देकर फरार हुए थे।


