*👉🏻 अपने आस पास बाल श्रम देखे तो आवाज़ उठाये*

जालंधर,25 जून-उस ‘छोटू‘ की जगह ढाबे में नहीं, स्कूल में है …
हमारे आस पास अनेक होटलों, ढाबों, दुकानों, बड़ी कोठियों में हजारों ‘छोटू’ अपने पढ़ने बढ़ने की उम्र में जिम्मेदारियों का बोझ कंधे पर उठाए दिन रात अपना बचपन मजदूरी में खपा रहे हैं। सस्ते और किसी काम को ना न कहने वाले मजदूरों के रूप में बच्चे पहली पसंद बने हुए हैं। एक सभ्य समाज के लिए जरूरी है कि वहां हर बच्चा स्कूल में शिक्षा ले रहा हो, हर बच्चे को आगे बढ़ने के लिए समान अवसर मिले। लेकिन, होटलों, ढाबों, दुकानों, मिलों, कोठियों में हजारों लाखों बच्चे मजदूरी करने को मजबूर है तो सभ्य समाज के लिए इससे शर्मनाक क्या स्थिति हो सकती है।
भारत में बाल मजदूरी उन्मूलन अधिनियम 1986 के तहत बाल मजदूरी करवाना कानूनी अपराध है। जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 के तहत भी बच्चों के साथ क्रूरता अपराध है। 2011 जनगणना के आंकड़ों की ही माने तो राज्य में 80 हजार से ज्यादा 5 से 14 साल तक के बच्चे किसी न किसी तरह की मजदूरी करने को मजबूर है। यह आंकड़े कागजी हो सकते हैं लेकिन वास्तविक स्थिति इससे कई ज्यादा खतरनाक है। 14 साल के उम्र के बच्चे से मजदूरी करवाना कानून अपराध है साथ ही खतरनाक उद्यमों में 18 साल तक के बच्चों से मजदूरी करवाना भी कानूनन अपराध है।
बच्चों की जगह कार्यस्थल पर नहीं बल्कि स्कूल में है। आप सभी बचपन बचाओ आंदोलन की मुहिम का हिस्सा बनिए। आप अगर अपने आस पास किसी बच्चे को बाल मजदूरी करते हुए देख रहे हैं तो उसकी सूचना हमें दे या फिर भारत सरकार के पेंसिल पोर्टल को दे। आपकी पहचान पूरी तरह से गुप्त रखी जाएगी।
पेंसिल पोर्टल पर आप नीचे दी गई लिंक से पहुंच सकते हैं। यहां आप बाल मजदूरी कर रहे बच्चे का विवरण भर सकते हैं, अपनी पहचान का देना वैकल्पिक है। आप अपनी पहचान दे सकते हैं या नहीं।
साथ ही आप हमें भी मैसेज से ऐसे बच्चों की सूचना दे सकते हैं जो बाल मजदूरी कर रहा है।
(दिनेश….बचपन बचाओ) 9463219193
https://pencil.gov.in/Complaints/add
