*👉🏻 ऑनलाइन स्टडी कर रही बच्चों की आंखों पर असर,अभिभावक हुए परेशान* *👉🏻 पढ़ें पूरी खबर सिर्फ हैडलाइन एक्सप्रेस पर 👇🏻*
जालंधर, 23 मई 2020-(प्रदीप भल्ला)- लॉक डाउन के चलते सभी सरकारी व निजी स्कूलों द्वारा बच्चों को ऑनलाइन स्टडी करवानी शुरू कर दी है। ऑनलाइन स्टडी करते हुए बच्चों को 1 महीने से ज्यादा हो चुका है। जिसके कारण बच्चों के अभिभावकों के लिए अब एक नई चिंता उत्पन्न हो गई है। वह चिंता यह है कि ऑनलाइन स्टडी करने के कारण बहुत से बच्चों की आंखें कमजोर होनी शुरू हो गई है, क्योंकि ज्यादातर बच्चे मोबाइल के जरिए ही ऑनलाइन स्टडी कर रहे हैं। मोबाइल की स्क्रीन छोटी होने के कारण उस पर काफी समय तक नजरें टिकाए रखने के कारण बच्चों की आंखों की रोशनी कम हो रही है। इसीलिए अभिभावकों को अब यह चिंता शुरू हो गई है कि उनकी बच्चों की आंखें कहीं ज्यादा कमजोर ना हो जाए। जब इस बारे में कुछ पेरेंट्स से बात की गई तो उन्होंने बताया कि स्कूल की तरफ से बच्चों को रोजाना ही अलग-अलग चैप्टर भेजे जाते हैं। उस कार्य को पूरा करने के लिए बच्चे काफी देर तक मोबाइल पर अपनी नजरें टिकाए रखते हैं। जिसके बाद बच्चों को सिर दर्द और आंखों में जलन की शिकायत शुरू हो गई है। कुछ पेरेंट्स ने बताया कि वह अपने बच्चों की नजर भी चेक करवा चुके हैं और आंखों के डॉक्टर ने बच्चों को चश्मा पहनने की हिदायत दी है। पेरेंट्स का कहना है कि अगर इसी तरह ऑनलाइन स्टडी जारी रही तो बच्चों की आंखों पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। क्योंकि क्लास रूम में ब्लैक बोर्ड पर स्टडी करना आसान रहता है जबकि छोटे से मोबाइल पर नजरें टिका कर रखे रहना काफी नुकसानदेह है। अगर इसी तरह ऑनलाइन स्टडी जारी रही तो बच्चों की आंखों पर इसके दुष्प्रभाव पड़ेंगे। दूसरी तरफ कुछ पेरेंट्स ने यह भी कहा है कि उनके पास एक ही मोबाइल है और स्टडी करने वाले उनके घर में 3 बच्चे हैं। अब एक-एक बच्चा अपना अपना कार्य करने के लिए काफी समय फोन पर लगाता है। तीनों बच्चे फोन पर अपना कार्य खत्म करने के लिए काफी समय बिताते हैं। जिसके कारण सुबह से लेकर दोपहर या कि शाम तक ही बच्चे फोन पर ही लगे रहते हैं जो बच्चों के लिए हानिकारक साबित हो रहा है। कुछ पेरेंट्स के पास तो मोबाइल भी नहीं है और उन्होंने स्कूल में अपने पड़ोसी का मोबाइल नंबर दिया हुआ है। जिस कारण जब उन्हें स्कूल की तरफ से कार्य दिया जाता है तो पड़ोसी कभी तो उन्हें इसके बारे में बता देते हैं और कभी वो खुद किसी काम के सिलसिले में घर से बाहर होते हैं तो बच्चों का स्कूल का काम छूट जाता है। इसलिए पेरेंट्स ने सरकार से और स्कूल प्रबंधकों से अनुरोध किया है कि वह बच्चों की स्टडी के लिए कोई और तरीका निकालें ताकि बच्चों को स्कूल का कार्य करने में आसानी हो और उनकी सेहत भी खराब ना हो।
