भारत की इस बेटी की मौत पर पाक ने भी बहाए थे आंसू, महज 23 साल की उम्र में छोड़ दी थी दुनिया

पिछले साल रिलीज हुई सोनम कपूर स्टारर फिल्म नीरजा को लोगों ने बहुत पसंद किया था। 23 साल की बहादुर फ्लाइट अटेंडेंट नीरजा की इस कहानी ने ऑडियंस को झकझोर दिया था। आज 5 सितंबर को उन्हीं नीरजा भनोट की डेथ एनिवर्सरी है। नीरजा को गए हुए 31 साल हो चुके हैं। लेकिन वो आज भी एक मिसाल के तौर पर याद की जाती है। अपनी जान पर खेलकर 360 लोगों की जान बचाने वाली नीरजा की मौत पर सिर्फ भारत ने ही नहीं बल्कि पाकिस्तान ने भी आंसू बहाए थे। पाक सरकार की ओर से उन्हें पाकिस्तान के सबसे बड़े अवॉर्ड में से एक ‘तमगा-ए-इन्सानियत’ से नवाजा गया था। क्या हुआ था 31 साल पहले… मुंबई की रहने वाली नीरजा भनोट पार्ट टाइम मॉडल के साथ-साथ फुल टाइम फ्लाइट अटेंडेंट थीं। 1986 में अपनी जान पर खेलकर उन्होंने 360 लोगों की जान बचाई थी। साल 1986 में पांच सितंबर को इंडिया की नीरजा भनोट की कराची में आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। नीरजा पैन अमेरिकन वर्ल्ड एयरवेज की कर्मचारी थीं। मुंबई से न्यूयॉर्क जा रहे पैन एम फ्लाइट 73 को कराची में चार आतंकियों ने हाईजैक कर लिया था। नीरजा प्लेन में सीनियर एयर होस्टेस थीं। उन्होंने प्लेन में सवार 360 पैसेंजर्स की जान बचाई थी।
सूझ-बूझ से बचाई थी ब्रिटिश नागरिकों की जान…
इस घटना से बचकर निकले यात्री माइकल थेक्सटन ने एक बुक लिखी थी। इस बुक में माइकल ने दावा किया कि उन्होंने हाईजैकर्स को बात करते हुए सुना था कि वे जहाज को 9/11 की तरह इजराइल में किसी निर्धारित निशाने पर क्रैश कराना चाहते थे। हाईजैक के दौरान आतंकियों ने नीरजा और उसकी सहयोगियों को बुलाया और कहा कि वो सभी यात्रियों के पासपोर्ट इक्ट्ठा करें ताकि वो किसी अमेरिकन नागरिक को मारकर पाकिस्तान पर दबाव बना सकें। नीरजा ने सभी यात्रियों के पासपोर्ट इकट्ठे किए लेकिन विमान में बैठे 5 अमेरिकी यात्रियों के पासपोर्ट छुपाकर बाकी सभी आतंकियों को सौंप दिए। उसके बाद आतंकियों ने एक ब्रिटिश को विमान के गेट पर लाकर पाकिस्तानी सरकार को धमकी दी कि यदि पायलट नहीं भेजा तो वह उसको मार देंगे। लेकिन नीरजा ने उस आतंकी से बात करके उस ब्रिटिश नागरिक को भी बचा लिया।
राष्ट्रपति ने कहा था फख्र करो बेटी पर…
नीरजा के जाने के बाद एक हफ्ते तक उनके पेरेंट्स ने एक आंसू भी नहीं बहाया, लेकिन फिर उनकी मां डिप्रेशन में आ गई। बाद में जब नीरजा को बहादुरी के लिए अशोक चक्र से नवाजा जा रहा था तो राष्ट्रपति ज्ञानी जेल सिंह से अवॉर्ड लेते हुए उनकी मां रोने लगी। तब राष्ट्रपति ने कहा कि देखिए सामने क्या और भी कोई मां रो रही है? जांबाज बेटी पर फख्र कीजिए। और बस वहीं से उनकी मां ने आंसू पोंछे और फिर कभी नहीं रोईं। नीरजा को मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था जो भारत का सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार है। मौत के वक्त नीरजा भनोट की उम्र २३ साल थी। इस तरह वो ये सम्मान पाने वाली पहली महिला और सबसे कम आयु की भारतीय नागरिक बन गईं।
घरेलू हिंसा का शिकार थीं नीरजा
7 सितंबर 1963 को चंड़ीगढ़ में जन्मी नीरजा की मैरिड लाइफ काफी खराब थी। उनके पिता हरीश भनोट ने 1986 में एक न्यूज पेपर को अपनी बेटी की मैरिड लाइफ के बारे में बताया था। उनके मुताबिक, मार्च 1985 में नीरजा ने एक बिजनेसमैन से अरेंज मैरिज की। शादी के पहले बात हो गई थी कि इसमें दहेज नहीं दिया जाएगा। लेकिन बाद में उन्हें इसके लिए ताने मिलने लगे। ससुराल वाले कहते थे कि एक गरीब आदमी भी अपनी बेटी के लिए कुछ देता है। शादी के बाद नीरजा पति के साथ गल्फ चली गईं। लेकिन दो महीने में ही रिश्ते में खटास आ गई। वहां उन्हें खाने और पैसों की तंगी से जूझना पड़ा, जिस वजह से दो महीने में उनका 5 किलो वजन कम हो गया। इतना ही नहीं, नीरजा को फोन करने के लिए भी पति से पैसे मांगने पड़ते थे।
पति की छाया भी न पड़े डेड बॉडी पर…
नीरजा एक मॉडलिंग कॉन्ट्रैक्ट के चलते मुंबई आईं। इसी बीच उनके पति ने एक लेटर लिखा, जिसमें उनकी वापसी के लिए कुछ शर्तें मेंशन की थीं। इस लेटर में यह भी कहा गया था, ‘यदि वापस लौटना है तो अपने दमपर आओ। नहीं तो हम सेपरेट हो जाएंगे।’ इतना ही नहीं, इसमें नीरजा को उनकी एजुकेशन के लिए भी ताना मारा गया था। लेटर में उन्हें कहा कहा कि वे हैं क्या, सिर्फ ग्रैजुएट हैं। नीरजा इसे बर्दाश्त नहीं कर सकीं और उन्होंने Pan Am में अटेंडेंट के जॉब के लिए अप्लाई कर दिया। इस जॉब के लिए करीब 10,000 एप्लिकेशन आई थीं, लेकिन नीरजा ने आसानी से टॉप 80 में अपनी जगह बनाई। Pan Am में नीरजा के कुछ दोस्त उनकी शादी का सच जानते थे। उनके अनुसार, नीरजा हमेशा कहा करती थीं कि अगर कभी उन्हें कुछ हो जाए तो ध्यान रखें कि उनके पति की छाया भी उनकी डेड बॉडी पर नहीं पड़नी चाहिए।







