*👉बाराती बनकर पुलिस ने की बदमाश की निगरानी, मौका मिलते ही दबोचा*
ग्वालियर. मुरैना के एक सीनियर पेंशनर के अकाउंट से इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से 6.15 लाख रूपये ठगने वाले शातिर दिमाग ठग को पुलिस ने हरियाणा के मेवाल से गिरफ्तार कर लिया है। इसके लिये पुलिस को को एक शादी में बाराती की भूमिका में थे। पुलिस ने इतने चपलता से आरोपी को उठाया कि उसके गांव में भनक तक नहीं लग पायी। पिछली बार क्राइम ब्रांच पर वहां फायरिंग तक हो गयी थी। इसके अलावा फर्जी सिम उपलब्ध कराने वाले 3 अन्य आरोपियों को अशोकनगर, गुना व राजस्थान से उठाया है। पेंशनर के अकाउंट से जो मोबाइल नम्बर लिंक था वह सिम कुछ समय पहले बंद हो गयी थी बस इसी बात का फायदा उठाकर ठग ने उस नम्बर को एक्टिव कर उस पर इंटरनेट बैंकिंग एक्टिव की और फ्रॉड किया।
क्या है पूरा मामला
एसपी राज्य साइबर सेल सुधीर अग्रवाल ने बताया कि मुरैना निवासी एक रिटायर्ड अधिकारी के बेटे ने शिकायत की थी कि उनके पिता के पेंशनर खाते से 6 लाख 23 हजार रुपए की धोखाधड़ी की गई है। शिकायत की जांच के लिए निरीक्षक जितेन्द्र सिंह तोमर, एसआई शैलेन्द्र राठौर को लगाया। इस मामले की जांच की तो पता चला कि जिस सिम से नेट बैंकिंग एक्टिव की गई है वह गुना से खरीदा गया है। इसका पता चलते ही साइबर सेल की टीम गुना पहुंची। यहां राज्य सायबर पुलिस की टीम ने तीन आरोपियों को पड़ताल के बाद पकड़ा है। इनसे पूछताछ के बाद पता चला कि इन्होंने सिम एक्टिव कर मेवात निवासी दिलशाद खान को दी थी। दिलशाद ने पेंशनर के खाते में उस नंबर को एक्टिव कर उससे इंटरनेट बैंकिंग ली और अकाउंट खाली कर दिया। यह पता चलते ही पुलिस की टीम हरियाणा के मेवात में पहुंची और आरोपी दिलशाद को हिरासत में लिया। अभी इसमंे तीन आरोपी और फरार हैं।
बाराती बनकर घूमे तब कहीं मिला ठग
आरोपियों को पकड़ने के लिये राज्य साइबर सेल की टीम ने 2 दिन गुना में बिताये और फोटो के आधार पर ठग गिरोह के 3 सदस्यों को पकड़ने में कामयाबी मिली और बदमाशों से पूछताछ करने पर वहां से मुख्य आरोपी दिलशाद का नाम सामने आया। दिलशाद के गांव मेवात पहुंचे तो वहां दिलशाद का पता लगाने के लिये 2 दिन साइबर सेल की टीम बाराती बन घूमे। वहां एक शादी चल रही थी। वहां शादी में शामिल हुई। मौका मिलते ही गांव के बाद बाहर निकलते ही दिलशाद को हिरासत में लेकर ग्वालियर ले आयी।
ऐसे हो सकते कई खुलासे
साइबर सेल अधिकारियों का मानना है कि पकड़े गये आरोपियों से पूछताछ के बाद कुछ अन्य वारदातों का सुराग मिल सकता है। इसके लिये अधिकारी पकड़े गये आरोपियों से पूछताछ के बाद साइबर सेल की टीम ने 5 मोबाइल बरामद करने के साथ ही भारी तादाद में सिम कार्ड बरामद किये हैं। पड़ताल में पता चला है कि इन सिमों का उपयोग वारदातों को अंजाम देने में किया जाता था।
फरयादी गलती का उठाया ठगों ने
फरियादी पेंशनर अनूप कुमार (बदला हुआ नाम) ने इस मामले में गलती की है। उनके पास एंड्रायड मोबाइल नहीं था और न ही वह इंटरनेट बैंकिंग, फोन-पे या अन्य किसी पेमेंट एप पर नहीं थे। उनसे गलती इतनी हो गयी कि उनके पेंशनर अकाउंट से जो मोबाइल नम्बर लिंक था वह कुछ समय पहले उन्होंने बंद कर दिया और कोई दूसरा नम्बर लिंक नहीं कराया। ठग ने इसी बात का फायदा उठाया। उसी नम्बर को चालू कर उस पर इंटरनेट बैंकिंग शुरू की और ठगी कर दी।

