पैर से एग्जाम लिखकर 12वीं में 90.80 फीसदी अंक लिए

नई दिल्ली: जब हौसला बना लिया ऊंची उड़ान का, फिर देखना फिजूल है कद आसमान का…। इन लाइनों का अगर मतलब समझना हो, तो महाराष्ट्र के लातूर में रहने वाले दिव्यांग छात्र गौस शेख से मिलिए। जन्म से ही गौस शेख के दोनों हाथ नहीं हैं। पिता एक स्कूल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के तौर पर नौकरी करते हैं। घर के आर्थिक हालात भी पूरी तरह से विपरीत हैं। लेकिन, पहाड़ जैसी इन सभी चुनौतियों के बावजूद गौस शेख ने एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। गौस शेख के इस जज्बे की तारीफ हर तरफ हो रही है।
दरअसल, गौस शेख ने महाराष्ट्र बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में पैरों से लिखकर 78 फीसदी अंक हासिल किए हैं। उनके रिजल्ट की चर्चा दूर-दूर तक है। और हो भी क्यों ना, गौस शेख ने इस परीक्षा के लिए मिलने वाली विशेष सहायता ‘परीक्षा लेखक’ लेने से भी इंकार कर दिया। गौस शेख वसंतनगर टांडा के जिस रेणुका देवी हायर सेकेंडरी आश्रम स्कूल में साइंस के छात्र हैं, वहीं उनके पिता चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के तौर पर नौकरी करते हैं। आज उनके पिता अमजद शेख हर किसी से अपने बेटे की सफलता की कहानी बयां कर रहे हैं।
चार साल की उम्र से शुरू किया पैरों से लिखना
आपको बता दें कि महाराष्ट्र बोर्ड की 12वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम इस हफ्ते की शुरुआत में ही घोषित किए गए थे। अपने बेटे की सफलता पर बात करते हुए अमजद शेख कहते हैं, ‘जन्म से ही उसके हाथ नहीं थे। लेकिन, वो चार साल का था, जब उसने अपने पैरों से अंक और अक्षर लिखने शुरू कर दिए। उसके शुरुआती शिक्षकों ने उसे अपने पैर की उंगलियों से लिखने का अभ्यास कराया। अब वो पैरों से लिखने में इतना सक्षम हो चुका है, कि सामान्य छात्रों को दिये जाने वाले समय में ही अपनी परीक्षा पूरी कर लेता है।
आईएएस बनना चाहते हैं गौस शेख
अपने भविष्य के कार्यक्रम पर चर्चा करते हुए गौस शेख बताते हैं कि उनका सपना शुरू से ही देशसेवा का है और इसलिए वो भविष्य में आईएएस अधिकारी बनना चाहते हैं। गौस शेख उन लोगों के लिए मिसाल बन चुके हैं, जो अक्सर मुश्किल हालात के सामने हार मान जाते हैं। उन्होंने दिखा दिया कि अगर इंसान के हौसले बुलंद हैं, तो फिर कोई भी मंजिल दूर नहीं।
परीक्षा से एक दिन पहले पिता की मौत
जज्बे से भरी एक ऐसी ही कहानी राजस्थान के भीलवाड़ा में भी सामने आई है। जिले की रहने वाली लक्ष्मी अहीर की बीते 23 फरवरी को राजस्थान बोर्ड की 12वीं की परीक्षा थी। लेकिन, परीक्षा से ठीक एक दिन पहले 22 फरवरी को जमीन विवाद में उनके पिता की हत्या कर दी गई। ऐसी मुश्किल घड़ी में लक्ष्मी ने तय किया कि वो अपनी परीक्षा देंगी। लक्ष्मी ने अगले दिन ना केवल अंग्रेजी की परीक्षा दी, बल्कि आगे के भी सभी एग्जाम पूरी हिम्मत के साथ दिए। इसके बाद जब उनका रिजल्ट घोषित हुआ, तो लक्ष्मी को 90.80 फीसदी अंक मिले।




