*👉🏻 अवैध असलहे का गढ़ है मुंगेर* *👉🏻 आंतकी भी इस्तेमाल करते हैं ये हथियार*
मुंगेर में बने देसी हथियार आतंकियों तक पहुंच रहे हैं। कश्मीर, पंजाब, गुजरात और राजस्थान के रास्ते हथियारों को पाकिस्तान तक पहुंचाया जा रहा है। ‘मेड इन मुंगेर’ हथियार कई बार पकड़े गए। तस्करों की गिरफ्तारी भी हुई। लेकिन, पुलिस अवैध हथियार बनाने वाली फैक्ट्रियों को बंद नहीं कर पाई। लाख कोशिश के बाद भी बिहार पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां हथियारों की तस्करी रोकने में नाकाम साबित हो रही हैं।
,,, मुंगेर में अवैध रूप से हथियार बनाने वाली दर्जनों फैक्ट्रियां चल रही हैं। एजेंट के माध्यम से हथियारों की खरीद-बिक्री की जाती है। इनका चैनल इतना लंबा है कि एक-दो तस्करों को पकडऩे के बाद भी पुलिस सरगना तक नहीं पहुंच पाती,,,, मुंगेर में हर तरह के असलहे तैयार किए जाते हैं। कट्टा से लेकर एके-47 तक उपलब्ध हैं। ‘मेड इन मुंगेर’ हथियारों की मांग इसलिए ज्यादा है कि देसी होने के बावजूद ये अच्छी गुणवत्ता और कम कीमत के होते हैं।,,,, तस्कर गिरोह में हथियारों को दूर तक पहुंचाने के लिए ज्यादातर नए चेहरों का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि उनपर किसी को शक न हो। शक होने पर भी उनका कोई आपराधिक इतिहास न मिले और वे छूट जाएं। बेरोजगारी के दौर में युवा चंद पैसों के लिए इस तरह के काम करने को तैयार भी हो जाते हैं।,,, दो वर्ष पूर्व आतंकी निरोध दस्ता (एटीएस) ने पाकिस्तानी आतंकी को पठानकोट रेलवे स्टेशन पर दबोचा था। उसके पास एके-47 और नाइन एमएम पिस्टल बरामद की गई थी। सभी हथियार ‘मेड इन मुंगेर’ थे। पूछताछ में आतंकी ने स्वीकार किया था कि हथियार उसने एक तस्कर से खरीदे थे। मुंगेर के हथियार उनके संगठन में धड़ल्ले से इस्तेमाल किए जाते हैं, क्योंकि इसकी गुणवत्ता विदेशी हथियारों से कम नहीं होती। एटीएस ने पाकिस्तानी सीमा पर ऐसे हथियार भी बरामद किए हैं, जिनपर ‘मेड इन यूएसए’ लिखा था, लेकिन जांच के बाद पता चला कि वे मुंगेर में बने हैं।,, मुंगेर के अवैध हथियार फैक्ट्रियों के तार देश के लगभग तमाम राज्यों से जुड़े हैं। एसटीएफ ने 2 मार्च 2014 को हावड़ा के दासनगर के एक फैक्ट्री में छापेमारी कर 1200 पीस नाइन एमएम पिस्टल बरामद किए थे। हथियार पुर्जा-पुर्जा खोल कर रखे मिले। इससे एक दिन पहले पुलिस ने मुंगेर के कासिम बाजार स्थित फैक्ट्री में छापेमारी की थी। वहां से 450 पीस नाइन एमएम पिस्टल के साथ दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
कुछ वर्ष पहले दिल्ली में भी 9 mm पिस्टलो का जखीरा पकड़ा गया था जांच में पता चला कि यह सभी पिस्टल बिहार के मुंगेर से लाए गए थे
इससे पूर्व 5 फरवरी 15 को हुई छापेमारी में पुलिस को दो इंसास मिले थे। पूछताछ में पता चला कि उन हथियारों को आतंकियों तक पहुंचाया जाना था। 1 मई 15 को पुलिस ने मुंगेर से मुकेश कुमार, राकेश शर्मा और अफरोज को 102 पिस्टल के साथ गिरफ्तार किया था। उनकी निशानदेही पर नालंदा से 120 रायफल बरामद हुई थी। 14 मई 15 को मुंगेर के जमालपुर से साहिल अली, सीता देवी, परमानंद और शंभू शर्मा को छह पिस्टल और छह मैग्जीन के साथ दबोचा गया। उनकी निशानदेही पर दो मिनी गन फैक्ट्री का भंडाफोड़ भी हुआ।
अक्सर तस्कर हथियारों को ट्रेन से दूसरे राज्य ले जाते हैं। असलहों का पुर्जा-पुर्जा अलग कर दिया जाता है। दो तीन लोग अलग-अलग टुकड़े लेकर विभिन्न ट्रेनों से गंतव्य तक पहुंचते हैं। बिहार से लगभग देश के सभी राज्यों के लिए ट्रेन उपलब्ध हैं। इसका लाभ तस्करों को भरपूर मिलता है। तस्करी के लिए महिलाओं का भी सहारा लिया जा रहा है। यूपी पुलिस इसका खुलासा कर चुकी है।,, पुलिस मुख्यालय के एडीजी सुनील कुमार बताते हैं कि हथियारों की तस्करी रोकने के लिए एसटीएफ और बिहार पुलिस का संयुक्त ऑपरेशन चल रहा है। गन फैक्ट्रियों का भंडाफोड़ किया जा रहा है। अवैध हथियार भी पकड़े जा रहे हैं। उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि तस्कर पार्ट-पार्ट कर हथियारों की तस्करी कर रहे हैं।

