कैंसर की नकली दवा बेचने वाले गिरोह का भंडाफोड़, खाली शीशियां खरीद कर भरते थे नकली दवा

नई दिल्ली : पंजाब के एक व्यक्ति ने अपनी मां के लिए 16.20 लाख रुपये में 12 इंजेक्शन खरीदे थे। चंडीगढ़ की एक महिला ने अपनी दादी के लिए 13.50 लाख रुपये में 10 इंजेक्शन खरीदे थे। पश्चिम बंगाल का एक व्यक्ति था, जिसने अपने पिता के लिए 24 लाख रुपये में 24 इंजेक्शन खरीदे थे। एक और चंडीगढ़ की महिला थी, जिसने अपनी मां के लिए 13.50 लाख रुपये में 10 इंजेक्शन खरीदे थे। इस तरह आठ लोगों ने कैंसर से जूझ रहे अपने परिवार के लिए करीब 75 लाख रुपये के इंजेक्शन खरीदे थे। इन सब में एक चीज कॉमन थी। इन लोगों ने जो कैंसर के इलाज के रूप में जो उम्मीद खरीदी थी, वो इंजेक्शन की तरह ही नकली थी। राजधानी में करीब तीन महीने पहले कैंसर की नकली दवा बेचने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ। ऊपर जिन लोगों की चर्चा हुई है ये सभी ‘मौत के सौदागरों’ का शिकार हैं। पुलिस ने चार्जशीट में खोले राज
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। पुलिस ने जांच के बाद नकली इंजेक्शन खरीद कर लगवाने वाले 8 लोगों को खोजने में सफलता पाई। दुख की बात है कि इन 8 मरीजों में से एक की कैंसर की नकली दवा से मौत भी हो गई। पुलिस ने आरोप पत्र में इन आरोपियों के बारे में विस्तृत जानकारी के साथ ही उनके नकली दवा बनाने से लेकर बेचने के बारे में चार्चशीट में खुलासा किया है। पुलिस ने जब इस गिरोह का भंडाफोड़ किया था तब उनके पास से नकली दवा से भरी हुई शीशियां भी जब्त की थी। उन नकली दवाओं की 140 शीशियों का बाजार में वास्तविक मूल्य लगभग 4 करोड़ रुपये था।
खाली शीशियां खरीद कर भरते थे नकली दवा
आरोपी दिल्ली और गुड़गांव के शीर्ष अस्पतालों में काम करते थे। आरोपपत्र के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर फार्मासिस्ट या अस्पताल के कर्मचारियों से महत्वपूर्ण दवाओं की खाली शीशियां 3,000 से 6,000 रुपये में थे। इसके बाद इन शीशियों में नकली पदार्थ भरते थे। इन्हें बाद में फार्मासिस्ट और वेबसाइटों के जरिए 40,000 से 50,000 रुपये में बेच दिया जाता था। इस साल की शुरुआत में 12 मार्च को क्राइम ब्रांच के अंतर-राज्यीय सेल और दिल्ली सरकार के औषधि नियंत्रण विभाग द्वारा की गई छापेमारी के दौरान दिल्ली और गुड़गांव स्थित अस्पतालों के कर्मचारियों सहित सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। जांच के दौरान बाद में पांच अन्य को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों की पहचान मास्टरमाइंड विफिल जैन, सूरज शाट नीरज चौहान, तुषार चौहान, परवेज, कोमल तिवारी, अभिनय सिंह , आदित्य कृष्णा, रोहित सिंह बिष्ट, जितेंद्र, माजिद खान, और साजिद के रूप में हुई थी। जांचकर्ताओं को चार आरोपियों से खरीदी गई दवा की खाली शीशियां भी मिली हैं जो दिल्ली और गुड़गांव के तीन प्रमुख कैंसर अस्पतालों के ऑन्कोलॉजी विभागों में काम कर रहे थे। 12 आरोपियों में से दो राजीव गांधी कैंसर संस्थान में फार्मासिस्ट के तौर पर काम करते थे।




