रेलवे के पावर विभाग की लापरवाही : करंट लगने से ट्रैक मैंटेनर मौत

अमृतसर: रेलवे के पावर (बिजली) विभाग की लापरवाही ने वेरका-डेरा बाबा नानक रेल सैक्शन के लेवल क्रासिंग नंबर एस-17 पर काम कर रहे ट्रैक मेंटेनर कार्तिक स्वांसी (गैंग मैन) की ‘बलि’ ले ली। मृतक कार्तिक रमदास में तैनात गैंग-7 का सदस्य था। 34 वर्षीय कार्तिक का शव पोस्टमार्टम करवाकर उसके परिजनों को सौंप दिया। वह करीब एक साल पहले ही अमृतसर में तैनात किया गया था। उसकी चार महीने पहले ही शादी हुई थी। रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग ने वेरका-डेरा बाबा नानक रेल सैक्शन पर स्थित लैवल क्रासिंग नंबर एस-17 (मजीठा मेन रोड) की रिपेयरिंग के चलते 21 जुलाई से 24 जुलाई तक ब्लाक ले रखा था। बीते सोमवार को यह लैवल क्रासिंग (रेलवे फाटक) सुबह 9 से सायं 6 बजे तक यातायात के लिए बंद रखा गया था।
इतना ही नहीं, रेलवे के इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों ने डी.सी. अमृतसर को पत्र लिख वहां से गुजरने वाले सड़क ट्रैफिक को नजदीकी लैवल क्रासिंग सी-19 (सोहिया रोड/स्टेशन रोड) तथा लेवल क्रासिंग सी-20 (दादु पुरा रोड) की ओर डायवर्ट करने को कहा था, लेकिन रेलवे का इंजीनियरिंग विभाग अपने ही गैंगमैन की जान न बचा सका। जानकारी के अनुसार लैवल क्रांसिंग एस-17 के साथ ही रेलवे की स्ट्रीट लाइट का पोल लगा हुआ था। लैवल क्रासिंग के बैरियर तथा स्ट्रीट लाइट पोल के बीच करीब 30 इंच का छोटा सा रास्ता था। दोपहर 2.10 बजे के करीब कार्तिक उसी संकरे रास्ते से निकल रहा था कि पोल के साथ लटकती बिजली की नंगी तार से छू जाने से लगे करंट से उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
बिजली की तार कई जगहों से छिली होने से नंगी थी। बैरियर और पोल के बीच तंग रास्ता होने से वह वहां से निकल नहीं सका। हैरानी वाली बात यह रही कि दिन में भी पोल से स्ट्रीट लाइट जल रही थी, जिसके चलते तार में करंट था। हालांकि करंट लगने के बाद उसे मजीठा के अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक वह मर चुका था। मृतक कार्तिक झारखंड के खूटी जिले का रहने वाला था। स्थानीय अधिकारियों ने कार्तिक के परिजनों को हादसे की सूचना दी, वहीं झारखंड से अमृतसर आने के लिए हवाई जहाज की टिकटें भी उनको भेजी। मंगलवार की सुबह कार्तिक का भाई तथा साला अमृतसर पहुंचे तथा शव को सड़क रास्ते से लेकर झारखंड रवाना हो गए।
दिन में पोल की लाइट के जलने और तार के कई जगहों से नंगी होने की जिम्मेदारी से बच नहीं सकता पावर विभाग :?हादसे के बाद भले ही इंजीनियरिंग तथा पावर विभाग के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन अपनी लापरवाही से बच नहीं सकते। लैवल क्रासिंग एस-17 पर लगे बिजली के पोल से दिन में स्ट्रीट लाइट क्यों जल रही थी। पोल से लटकती बिजली की तार जगह-जगह से क्यों छिली हुई थी। पावर विभाग ने उस तार को ठीक क्यों नहीं किया। अगर समय रहते पावर विभाग अपनी जिम्मेदारी को निभाता तो कार्तिक की जान बच सकती थी। हालांकि पावर अधिकारी अपनी सफाई देकर खुद को बचाने में लगे हैं।
पावर विभाग के अधिकारी के अनुसार स्ट्रीट लाइट के पोल में खराबी के कारण उसकी लाइट को जलाने के लिए बाहर से ही तार ऊपर तक पहुंचाई गई थी। तार कई जगहों से कैसे छिल गई, इसके बारे में कहना मुश्किल है। हालांकि हादसे के बाद तार को पाइप के अंदर कर दिया गया है, ताकि भविष्य में बचाव हो सके। दिन में पोल की लाइट किसने जलाई या रात को जलाने के बाद दिन में उसे क्यों नहीं बंद किया गया। इस पर अधिकारी ने कुछ भी कहने से इंकार करते हुए सिर्फ यही कहा कि 220 वोल्टेज से व्यक्ति को करंट का झटका जरुर लगता है, उसकी मौत होने की संभावना कम ही होती है।





