*👉🏻 पंजाब सरकार की पारदर्शिता नीति हुई ठुस्स, बिना प्रार्थना पत्र भरवाए हुई थोक के भाव बदलियां* *👉🏻 पंजाब भर में विधायकों की सिफारिश और रुपयों की खनक से हुए अध्यापकों के तबादले*

जालंधर,20 जुलाई-(प्रदीप भल्ला)-पंजाब सरकार के तबादलों में पारदर्शिता लाने की नीति वाले दावों की उस समय हवा निकल गई, जब बिना कोई प्रार्थना पत्र लिए ही पंजाब भर में अध्यापकों के तबादलों की 36 पेजों की लिस्ट जारी हो गई। शिक्षा मंत्री द्वारा यह दावा किया गया था कि शिक्षा विभाग में तबादलों को लेकर पूरी तरह से पारदर्शिता लाई जाएगी और अध्यापकों के तबादलों के लिए ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे। लेकिन रुपयों की खनक और ऊंची पहुंच के आगे शिक्षा मंत्री के उन दावों की हवा निकल गई। जब बिना कोई आवेदन के अध्यापकों के तबादलों की लिस्ट ही जारी हो गई। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार विधायकों की सिफारिश और लाखों रुपए की रिश्वत के कारण कुछ अध्यापकों की उनकी मर्जी के स्टेशनों पर बदली की गई। कुछ अध्यापकों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि वह अपने घर से 60-70 किलोमीटर का सफर तय करके पढ़ाने के लिए जाते हैं और वह सरकार की पारदर्शिता वाली नीति को सुनकर इस आस में बैठे हुए थे कि इस बार आवेदन देकर वह घर से थोड़ी दूरी के स्टेशन पर अपना तबादला करवा सकेंगे। लेकिन उन अध्यापकों में तबादलों की 36 पेजों की लिस्ट के जारी होने का पता लगने के बाद मायूसी छा गई। इस लिस्ट में 1069 अध्यापकों के नाम है जिनके तबादले किए गए हैं। सरकार की इस धोखाधड़ी वाली नीति से रुष्ट होकर कुछ अध्यापक हाईकोर्ट की शरण में जाने की तैयारी कर रहे हैं।