देश की सबसे तेज-तर्रार और चर्चित IAS B. Chandrakala हों या फिर 800 Cr की प्रॉपर्टी बनाने वाला IAS, CBI की राडार पर आ चुके हैं ये 8 IAS और IPS
अफसरों व ठेकेदारों को सरेआम लताड़ लगाकर सुर्खियों में आने वाली आईएएस बी. चंद्रकला (IAS B. Chandrakala) खुद CBI के दस्तावेजों में करप्शन की आरोपी बनकर उभरेंगी, शायद ही किसी ने सोचा होगा। चंद्रकला पर यूपी के हमीरपुर (Hamirpur) में डीएम रहते मौरंग खनन (illegal mining case) के 50 पट्टों को अवैध तरीके से मंजूरी देने का आरोप है। अभी तक की CBI जांच में चंद्रकला व सपा एमएलसी रमेश मिश्रा समेत कई लोगों पर आपराधिक साजिश, अवैध वसूली की धाराओं में FIR दर्ज की गई है। इस मौके पर हम आपको 8 उन IAS-IPS अफसरों के बारे में बता रहे हैं, जिनमें कोई धन कुबेर निकला तो किसी को एसोसिएशन ने सबसे करप्ट करार दिया।
चंद्रकला की कुंडली खंगाल रही CBI
– अखिलेश सरकार में 2008 बैच की आईएएस चन्द्रकला की पहली पोस्टिंग हमीरपुर में डीएम के पद पर की गई थी।
– आरोप है कि 2012 में उन्होंने सपा नेताओं को
नियमों की अनदेखी कर खनन के 50 पट्टे जारी किए, जबकि ई-टेंडर के जरिए स्वीकृति देने का प्रावधान है।
– बीते शनिवार को चंद्रकला के लखनऊ स्थित सफायर अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 101 में सीबीआई ने छापेमार कार्रवाई कर कई अहम दस्तावेज जब्त किए। तब चंद्रकला फ्लैट पर नहीं थीं।
– CBI की चंद्रकला के हमीरपुर के पौने तीन साल के कार्यकाल पर विशेष नजर है। जांच एजेंसी ने खनन घोटाले में यूपी में कई जगहों पर छापा मारने और दस्तावेज जुटाने की प्रक्रिया पूरी कर ली है।
डॉ. ई रमेश, मध्य प्रदेश
– 2013 में IAS डॉ. ई रमेश की पत्नी कुरंगति सपना कुमार ने मप्र के तत्कालीन चीफ सेक्रेटरी आर परशुराम को चिट्ठी लिखकर पति के भ्रष्टाचार की पोल खोलकर सबको चौंकाया था।
– पत्नी का कहना था कि उनके पति ई रमेश सबसे भ्रष्ट अफसरों में से एक हैं। तब मप्र के सागर कलेक्टर पद से हटने के बाद ई रमेश आंध्र में प्रतिनियुक्ति पर तैनात हुए थे।
– सपना ने आरोप लगाया था कि ई रमेश अपनी काली कमाई को ठिकाने लगाने के लिए ही अंतर्राज्यीय प्रतिनियुक्ति पर गए हैं। 1999 में ई रमेश को आईएएस में मप्र कॉडर मिला था।
ए मोहन, आंध्र प्रदेश
– 2016 में आंध्र प्रदेश में एंटी करप्शन ब्यूरो की छापेमार कार्रवाई में ईस्ट गोदावरी जिले के परिवहन उपायुक्त ए. मोहन के पास कई राज्यों में 800 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति का पता चला। ![]()
– कार्रवाई के दौरान उनके पास से 14 फ्लैट के कागजात समेत 2 किलो सोना और 5 किलो चांदी बरामद हुई।
– रिपोर्ट के मुताबिक, मोहन ने बड़ी बेटी तेजश्री के नाम पर 8 बेनामी कंपनियां बनाई थी। जिनकी वैल्यु 100-120 करोड़ आंकी गई थी।
विवेक कुमार, बिहार
IPS विवेक को इसी साल अप्रैल महीने में आय से तीन गुना अधिक धन अर्जित करने के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया। छापेमारी में ससुराल पक्ष के लोगों के नाम पर 100 के करीब एफडी में करोड़ से ज्यादा
रकम की बात सामने आई। वहीं, कई लॉकर ने लाखों रुपए उगले। मुजफ्फरपुर SSP बनने से पहले विवेक भागलपुर में SSP के पद पर तैनात थे। यहां उन्होंने अकूत संपत्ति बनाई।
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अशोक सिंघवी, राजस्थान
2015 में राजस्थान के माइनिंग डिपार्टमेंट में महाघूसकांड उजागर हुआ था। इसके चलते 1983 बैच के सिंघवी को आठ महीने जेल की हवा खानी पड़ी। स्टेट गवर्नमेंट ने चित्तौड़गढ़ में शेरखान की छह माइन्स को बंद करवा दिया था। इन्हें चालू करने के लिए डिपार्टमेंट के अफसरों ने 2.55 करोड़ रुपए की घूस मांगी थी। तब सिंघवी डिपार्टमेंट के चीफ सेक्रेटरी पद पर थे। हालांकि, बाद में वे बहाल कर दिए गए।
नीरा यादव, यूपी
1994 के दौरान नीरा नोएडा अथॉरिटी में चेयरमैन थीं। उन पर पद का दुरुपयोग कर बैक डेट में प्लॉट के लिए आवेदन करने और चेक भी बैक डेट में बैंक में जमा करने का आरोप था। 2012 में CBI की स्पेशल कोर्ट ने
नोएडा लैंड स्कैम में नीरा को 3 साल की सजा सुनाई। नीरा ने फिर इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील की, लेकिन हाईकोर्ट ने भी सजा को बरकरार रखा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने तीन साल की सजा को दो साल कर दिया। 1971 बैच की नीरा को यूपी IAS एसोसिएशन ने 1996 में कथित तौर पर राज्य का दूसरा सबसे भ्रष्ट अफसर करार दिया था।
अखंड प्रताप सिंह, यूपी
कभी यूपी के चीफ सेक्रेटरी रहे 1967 बैच के IAS अखंड प्रताप
को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 2003 में पद से इस्तीफा देना पड़ा था। आय से अधिक संपत्ति मामले में वे जेल की हवा भी खा चुके हैं। इनका नाम बीज घोटाले में भी आया था। यूपी आईएएस एसोसिएशन ने उन्हें गुप्त मतदान के जरिए महा भ्रष्ट आईएएस करार दिया था।
जोशी दंपति, मध्य प्रदेश
अरविंद और टीनू जोशी दंपति 1979-2010 के बीच IAS अफसर थे। अपने सर्विस के दौरान उन्होंने 41 करोड़, 87 लाख, 35 हजार की रकम करप्शन के जरिए उगाही करने के बाद इस ब्लैक मनी को अवैध तरीके से सफेद करने की कोशिश की, जो उनकी असल कमाई से 3151.32 % अधिक है। फरवरी, 2010 में छापेमारी के दौरान जोशी दंपत्ति के घर से 3 करोड़ रु. से ज्यादा नगद बरामद हुए थे।
दोनों 2014 में रिटायर होने वाले थे, लेकिन उससे पहले ही उनके काले कारनामों का पर्दाफाश हो गया।
