राजनीति की हवा भांप लेने की कला में माहिर थे कुलदीप, अब कल उन्नाव मामले में मिलेगी दुष्कर्म की सजा
दलबदलू नेता कहें या फिर सियासतबाज। दो साल पहले तक कुलदीप सिंह सेंगर राजनीति के माहिर खिलाड़ी थे। कोई भी ऐसी पार्टी नहीं जिसमें उनकी गहरी पैठ न हो। बाहुबली विधायक हों या फिर साथ सुथरी राजनीति करने वाले सादगी पसंद सरल विधायक। सभी से इनकी बड़ी अंतरंग यारी थी। उन्नाव जिले के तो ये बादशाह कहे जाते थे। ठेका-पट्टी से लेकर मौरंग-बालू तक। सभी में इनकी दखल थी। राजनीति की हवा भांप लेने की कला में ये माहिर थे। इनकी सलाह पर नेता चुनावी सीजन में पार्टियां तक बदल देते थे। खुद कुलदीप के लिए राजनीतिक दलों की विचारधारा और प्रतिबद्धता कोई मायने नहीं रखती थी। जब चाहा चोला बदल दिया। जीत की गारंटी थे यह। टिकट मिला और विधायकी पक्की। इसलिए हर पार्टी का कुर्ता इनके ऊपर खूब फबा। और सिर्फ दो दशक के राजनीतिक कॅरियर में चार बार विधायक बन गए।
यूपी के सभी प्रमुख चारों राजनीनितिक दलों का सफर भी कर डाला। हर बार अलग-अलग विधानसभाओं से किस्मत आजमाई। जीत भी गए। यूथ कांग्रेस से सियायत शुरू की। लेकिन, जब पहली बार विधायक बने तो पटखनी भी कांग्रेस को ही दी। बसपा के बाद सपा और फिर भाजपा से विधायक बने।
फतेहपुर में कुलदीप का घर है। लेकिन इन्होंने राजनीति उन्नाव में की। 1996 यहां के माखी थाना क्षेत्र के सरायथोक से इन्होंने जीवन का पहला चुनाव ग्रामप्रधानी का लड़ा। जीत गए। इसी साल हुए विधानसभा चुनावों में यह बसपा से उन्नाव की सदर सीट से टिकट पा गए और विधायक बन गए। ग्रामप्रधानी छोड़ी तो उस सीट से मां को जिता दिया। 2007 में समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। चुनाव में उतरे और विधायक बन गए। 2012 में फिर सपा के टिकट पर ही भगवंतनगर से एमएलए बने। 2017 में भाजपा का झंडा पकड़ लिया। इस बार बांगरमऊ सीट से चुनाव लड़ा। और जीत गए। चार बार की विधायकी ने कुलदीप को दबंग नेता बना दिया। इनकी छवि बाहुबली नेता के रूप में बनी। इस बीच इन्होंने पूरे परिवार को राजनीति में सक्रिय कर दिया।
ग्राम प्रधानी से लेकर जिला पंचायत तक हर जगह सेंगर परिवार का ही दखल। पत्नी संगीता सेंगर जिला पंचायत अध्यक्ष बन गयीं। एक भाई ब्लॉक प्रमुख। तीसरे भाई की पत्नी ग्राम प्रधान। ठेका, खनिज खनन, रियल इस्टेट से लेकर होटल तक लंबा कारोबार फैल गया। आलम यह कि उन्नाव का कोई भी ठेका बिना कुलदीप की मर्जी के किसी को नहीं मिल सकता। इसी के साथ बढ़ गयीं इनकी रंगदारी और एय्यासियां। 4 जून 2017 को ऐसी बयार बयी जिसका अंदाजा यह नहीं लगा पाये। अपहरण, रेप और हत्या जैसे संगीन मामलों में यह घिरते चले गए। जितनी तेजी से राजनीति की सीढिय़ां चढ़ीं थीं उतनी तेजी से यह अर्श से फर्श पर आ गए। बहरहाल, अब इनका राजनीतिक दीपक तो बुझना तय है ही। जल्द ही विधायकी तो जाएगी ही कठोर कारावास की सजा भी मुकर्रर होगी। आपराधिक षड्यंत्र, अपहरण, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत आरोप तय हो चुके हैं। फिलहाल, यह तिहाड़ जेल में बंद हैं। उन्नाव की बेटी को न्याय मिल चुका है।



