*👉🏻 अभी भी गम्भीर नहीं है सिविल अस्पताल प्रशासन, बीती रात की गई दो बड़ी गलतियां* *👉🏻 इस खबर सम्बंधी पूरी जानकारी हासिल करने के लिए नीचे दिए गए हैडलाइन एक्सप्रेस के लिंक को क्लिक करें 👇🏻*
जालंधर, 03 मई 2020-(हैडलाइन एक्सप्रेस)-सिविल सर्जन दफ्तर के अधिकारी,कर्मचारी कोरोना के इस समय में भी गलतियां करने से पीछे नहीं हट रहे है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक बीती रात भी सिविल सर्जन दफ्तर के अधिकारियों,कर्मचारियों द्वारा दो बड़ी गलतियां की गई। जिनमें से एक यह थी कि एक 65 वर्षीय पॉजिटिव महिला को सिविल अस्पताल में लाने की बजाय सिविल सर्जन दफ्तर के अधिकारियों ने उसी नाम की दूसरी महिला जो कि अर्बन एस्टेट में रहती है को उठाकर सिविल अस्पताल में ले आए, जो की नेगेटिव थी। संक्रमित महिला किसी निजी अस्पताल में अन्य बीमारी के कारण उपचाराधीन थी। जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। जिसे सिविल अस्पताल में लेकर आना था, लेकिन अधिकारियों से इतनी बड़ी गलती हो गई कि वह संक्रमित महिला को सिविल अस्पताल में शिफ्ट करने की बजाय उसी नाम की दूसरी महिला जोकि नेगिटिव थी और अर्बन एस्टेट में रह रही थी जिसकी उम्र भी 45 साल थी को सिविल अस्पताल में ले आए। अस्पताल पहुचने के बाद जब इस बारे में उच्च अधिकारियों को अपनी गलती का अहसास हुआ तो उन्होंने तुरंत ही नेगीटिव महिला को वापिस उसके घर पहुंचा दिया। बात यहीं खत्म नहीं होती उसके बाद मामला दूसरा सामने आया। जिसमें संक्रमित महिला के भाई को सिविल सर्जन दफ्तर के अधिकारियों ने कपूरथला रोड पर स्थित गांव से उठाया और उसका टेस्ट लेने के लिए उसे सिविल अस्पताल में लाने के लिए निकल पड़े। उक्त व्यक्ति को एंबुलेंस में पहुंचे कर्मचारियों ने कहा कि आपकी बहन को कोरोना है इसलिए आप के सैंपल लेने हैं। सैंपल लेने के बाद आपको इसी एंबुलेंस में वापिस घर पहुंचा दिया जाएगा। कर्मचारियों की बात मान कर उक्त व्यक्ति सिविल अस्पताल उनके साथ आ गया। सैंपल लेने के बाद कर्मचारियों ने उक्त व्यक्ति को कहा कि वे उसे छोड़ने नहीं जा सकते इसलिए वह जिस प्रकार भी हो अपने घर पहुंच जाएं। अब आधी रात के समय उक्त व्यक्ति ने अपने किसी जानकर को गाड़ी लेकर आने का कहा जिसके बाद वह घर पहुंच सका। अब उक्त व्यक्ति का कहना है कि अगर भगवान न करे उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो जो व्यक्ति आधी रात के समय उसे घर छोड़ कर आया है वह भी संक्रमित हो सकता है। यह सब सिविल प्रशासन की लापरवाही का ही नतीजा होगा। सिविल सर्जन दफ्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों की यह लापरवाही किसी दिन कोई बड़ा संकट उत्पन्न कर देगी। सिविल प्रशासन अब इन दोनों मामलों को दबाने में लगा हुआ है।