*👉🏻 दुनिया को वानाक्राई साइबर हमले से बचाने वाला खुद गिरफ्तार*
दुनिया को वानाक्राई जैसे साइबर हमले से बचाने वाले ब्रिटेन के साइबर सुरक्षा शोधकर्ता मार्कस हचिंस को अमेरिका के लास वेगास हवाई अड्डे से गिरफ्तार कर लिया गया। उसे बैंकों पर साइबर हमले से संबंधित सॉफ्टवेयर बनाने के आरोप में पकड़ा गया है।
खतरनाक साइबर हमले से बचाने के कारण उसे पूरी दुनिया एक इंटरनेट हीरो के रूप में मान्यता देती है, क्योंकि वह 150 देशों के लाखों कंप्यूटरों को फिरौती वसूलने वाले हैकिंग गिरोह से बचा चुका है।वानाक्राई जैसे खतरनाक मालवेयर को निष्क्रिय करके पूरी दुनिया के करोड़ों कंप्यूटरों को सुरक्षित करने वाले हचिंस पर एक ऐसा मालवेयर बनाने का आरोप है, जिससे पूरे बैंकिंग सिस्टम को हैक किया जा सकता है।
अमेरिका की एक संघीय अदालत में दायर अभियोग के मुताबिक 23 वर्षीय हचिंस और उसके एक अज्ञात साथी पर बैंक खातों के पासवर्ड हासिल कर ऑनलाइन बैंकिंग साइटों से वित्तीय डाटा चुराने के मकसद से ‘क्रोनोस बैंकिंग ट्रोजन’ मालवेयर बनाने व बेचने की साजिश रचने का आरोप है। यह शोधकर्ता मालवेयरटेक उपनाम से ब्लॉगिंग भी करता है।
अभियोग के मुताबिक हचिंस और उसका साथी ‘क्रोनोस बैंकिंग ट्रोजन’ नामक प्रोग्राम बनाकर उसे इंटरनेट पर 3000 डॉलर में बेचने की कोशिश कर रहे थे। उसका अज्ञात साथी जून-2015 में क्रोनोस मालवेयर का एक वर्जन 2000 डॉलर में बेच भी चुका है।
हालांकि अभियोग पत्र में यह नहीं बताया गया है कि इस मालवेयर का कहां-कहां उपयोग किया गया। इस बात की जानकारी भी नहीं मिल पाई है कि हचिंस पर इसके अलावा और किन मामलों में शामिल होने के आरोप हैं।
खतरनाक है क्रोनोस मालवेयर
बीती मई में वानाक्राई नामक रैनसमवेयर ने करीब 150 देशों के लाखों कंप्यूटरों को हैक करके बिटकॉइन में फिरौती की रकम मांगी थी। इसके चलते ब्रिटेन की स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो गईं, ऑस्ट्रेलिया में हवाई सेवाएं चरमरा गईं और कई कंपनियों का कामकाज प्रभावित हुआ था।
हचिंस को जिस क्रोनोस मालवेयर को विकसित करने के मामले में गिरफ्तार किया गया है, उससे बैंकिंग कंप्यूटरों के यूजर नेम और पासवर्ड हासिल कर उन्हें ट्रांसफर किया जा सकता है। यही नहीं, बैंकों के एटीएम पिन, निजी सूचनाएं और सिक्योरिटी सवाल-जवाब भी इस मालवेयर से चुराए जा सकते हैं।
अमेरिकी न्याय विभाग ने बताया कि क्रोनोस मालवेयर को कनाडा, जर्मनी, पोलैंड, फ्रांस और ब्रिटेन समेत कई देशों के बैंकिंग सिस्टम को हैक करने के लिए बनाया गया है। इससे पूरी दुनिया की बैंकिंग व्यवस्था चौपट हो जाती।
खुद ही बना सुरक्षा विशेषज्ञ
मार्कस हचिंस ने सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट का कहीं से परंपरागत प्रशिक्षण नहीं लिया है। उसने खुद ही कंप्यूटर सुरक्षा के गुर सीखे हैं। यह भी पता चला है कि उसका रुझान बचपन से ही कंप्यूटर से जुड़े गेम्स और अन्य मामलों में था।
यहां तक कि किशोर उम्र में वह कंप्यूटर इंजीनियरों को भी उनके काम में फेल कर देता था, जबकि उसने इसकी व्यावसायिक शिक्षा तक हासिल नहीं की। इसी प्रतिभा के कारण सान फ्रांसिस्को की एक कानूनी संस्था उसकी मदद करना चाहती है।





