*👉🏻 मामला अपराधियों तक अवैध रूप से कारतूस पहुंचने का* *👉🏻 हैडलाइन एक्सप्रेस की खबर के बाद हरकत में आई पंजाब पुलिस, इस शहर में शुरू हुई गन हाउस वालों की जांच* *👉🏻 पढ़ें पूरी खबर सिर्फ हैडलाइन एक्सप्रेस पर 👇🏻*



जालंधर, 30 नवंबर 2020-(एच.ई)-पिछले दिनों में हैडलाइन एक्सप्रेस ने एक मुद्दे को बड़ी ही प्रमुखता से प्रकाशित किया था और वह मुद्दा यह था कि अपराधियों तक वेपन की गोलियां कहां से पहुंचती है क्योंकि अवैध वैपन तो यूपी-बिहार के कई क्षेत्रों से आसानी से मिल जाता है लेकिन गोलियां तो भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त फैक्ट्रियों में ही बनती है और वहां से गन हाउस वालों को दी जाती है। कुछ ऐसे मामले भी सामने आए थे जिनमें पुलिस ने कुछ क्रिमिनल्स को अवैध हथियारों और कारतूसों सहित गिरफ्तार किया था। जिनसे पूछताछ दौरान पता चला था कि उन्हें गोलियां गन हाउस वाले ही देते हैं।
इन खबरों को पुलिस के उच्च अधिकारियों तक भी पहुंचाया गया था। हैडलाइन एक्सप्रेस की इन खबरों को पढ़ने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए लुधियाना के पुलिस कमिश्नर राकेश अग्रवाल ने एक टीम गठित कर दी है, जो जिले के सभी गन हाउस वालों के रिकॉर्ड की चेकिंग करेंगे। जिससे यह पता चलेगा कि उन्होंने आज तक कितने वेपन और कितनी गोलियां खरीदी है या बेची है, क्योंकि लुधियाना के पुलिस कमिश्नर को भी जानकारी प्राप्त हुई थी एक कुछ गन हाउस वाले दो नंबर में महंगे दाम पर गोलियां बेच रहे हैं और यही गोलियां अपराधियों तक पहुंच रही है। बीते दिनों पंजाब के अलग-अलग शहरों में पकड़े गए क्रिमिनल्स के पास से अवैध असला और बड़ी गिनती में गोलियां बरामद हो चुकी है। अवैध रूप से गोलियां बरामद होना और इसी मामले को लेकर लगी हुई खबरों को पढ़ने के बाद पुलिस के उच्च अधिकारी भी इसे गंभीरता से ले रहे हैं। इसलिए अब धीरे-धीरे पंजाब के अन्य शहरों में भी गन हाउस वालों की जांच शुरू हो सकती है। बीते दिनों अमृतसर की काउंटर इंटेलिजेंस टीम ने साल 2017 के मोस्ट वांटेड अपराधी करमजीत सिंह निवासी न्यू मॉडल कॉलोनी छेहरटा को उसके साथी फेरूमन बाबा बकाला साहिब निवासी हरमनजीत सिंह सहित गिरफ्तार किया है जिनके पास से पुलिस को 4 विदेशी अवैध वेपन और विदेशी 155 ज़िंदा कारतूस बरामद हुए हैं। विदेशी वेपन तो बॉर्डर पार से किसी तरीके आ जाते होंगे ? लेकिन विदेशी कहाँ से आती है ये भी सोचने की बात है। अपराधियों से बड़ी गिनती में कारतूस मिलना बहुत ही गंभीर मामला है, क्योंकि कारतूस तो गन हाउस वालों को या लाइसेंसी वेपन धारक को ही मिल सकते हैं। लाइसेंसी वेपन धारक अपने कारतूस पूरे करके रखता है, क्योंकि जब कभी भी चुनाव होते हैं तो सभी लाइसेंसी वेपन धारकों को असला जमा करवाने के निर्देश जारी होते हैं और समय-समय पर उनकी जांच भी होती है। इसलिए उन पर तो शक की सुई जाती ही नहीं। रही बात गन हाउस वालों की तो उनमें से कुछ एक ऐसे हैं जो मोटी कमाई के चक्कर में महंगे दाम में गोलियां बेच देते हैं और यही गोलियां अपराधियों तक पहुंचती है। अब देखना यह है कि पुलिस प्रशासन कितनी संजीदगी से इस मामले की तह तक जाता है। पंजाब के कुछ शहरों में तो पुलिस ने गन हाउस वालों की जांच शुरू कर दी है और इस बात का भी पता लगाना शुरू कर दिया है कि क्या उनके संबंध अपराधियों से तो नहीं। बाकी समय ही बताएगा कि पुलिस जांच में क्या सामने आता है।
