क्या है स्पेस टूरिज्म और इसमें कितना खर्चा आता है?

तकनीक की बढ़ती दुनिया ने बाजार के नए-नए आयाम खोले हैं. इनमें से एक स्पेस टूरिज्म भी है. वैसे तो साल 2001 में ही डेनिस टीटो पहले स्पेस टूरिस्ट बन गए थे जब उन्होंने पैसे देकर रूस के सोयुज अंतरिक्ष यान पर यात्रा की थी. तब इस अमेरिकी स्पेस टूरिस्ट ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर सात दिन से अधिक समय बिताया था.
टीटो के बाद अब तक करीब 50 लोग स्पेस में टूरिस्ट बन कर जा चुके हैं. इनमें से ज्यादातर लोगों ने पिछले तीन सालों में ये यात्राएं की हैं. अब इसी कड़ी में छह लोगों का एक नया दल शामिल हुआ है, जिन्होंने 19 मई को स्पेस के लिए उड़ान भरी. इनमें से एक गोपी थोटाकुरा भी हैं जिन्होंने भारत की ओर से एक रिकॉर्ड अपने नाम किया है.
थोटाकुरा एक टूरिस्ट के तौर पर स्पेस में जाने वाले पहले भारतीय बन गए हैं. आंध्र प्रदेश में जन्मे 30 साल के उद्यमी और पायलट गोपी ने रविवार को स्पेस कंपनी ब्लू ओरिजिन के NS-25 मिशन के तहत पांच अन्य लोगों के साथ स्पेस में यात्रा की. ये ब्लू ओरिजिन की सातवीं उड़ान थी, जिसे अमेरिका के टेक्सास में लॉन्च साइट वन से रवाना किया गया. ब्लू ओरिजिन उन चंद कंपनियों में से एक है जो इंसानों को स्पेस में ले जाती है. इसकी स्थापना अमेजन के फाउंडर जेफ बेजोस ने की थी.
थोटाकुरा के अलावा इस स्पेस फ्लाइट में मेसन एंजेल, स्लेवेन शिरॉन, केनेथ एल हेस, कैरल स्कालर और एयरफोर्स के पूर्व कैप्टन एड ड्वाइट थे. 90 साल के ड्वाइट को 1961 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी ने देश के पहले अश्वेत अंतरिक्षयात्री के कैंडिडेट के तौर पर चुना था. लेकिन उन्हें कभी अंतरिक्ष में जाने का अवसर नहीं मिल पाया था. वहीं थोटाकुरा से पहले राकेश शर्मा, कल्पना चावला, सुनीता विलियम्स, राजा चारी और शिरिषा बांदला स्पेस में जा चुके हैं. लेकिन भारतीय सेना में विंग कमांडर रहे राकेश शर्मा को छोड़कर बाकी सभी भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक थे.
बहरहाल, थोटाकुरा और अन्य पांच लोगों की ये यात्रा उड़ान भरने से लेकर लैंडिंग तक महज दस मिनट तक चली. इस बीच स्पेसक्राफ्ट ने धरती से करीब 105 किलोमीटर ऊपर तक की ऊंचाई हासिल की. जिस दौरान उस पर सवार लोगों को कुछ मिनटों के लिए भारहीनता का एक रोमांचक अनुभव हासिल हुआ. इसके अलावा उन्हें उस ऊंचाई से धरती को भी निहारने का मौका मिला. बोलचाल की भाषा में इस संक्षिप्त लेकिन मजेदार यात्रा को ‘जॉय राइड’ कहा जाता है.
दरअसल, धरती से करीब 100 किमी ऊपर जाने पर वहां से स्पेस यात्रा की शुरुआत मानी जाती है. जिस तरह ग्लोब पर कर्क, मकर जैसी आभासी रेखाएं खींचकर इलाकों को उनकी विशेषताओं के आधार पर वर्गीकृत किया गया है. ठीक उसी तरह, स्पेस में करीब 100 किमी की ऊंचाई पर एक आभासी रेखा खींची गई है जिसे कार्मन लाइन कहा जाता हैं. व्यापक तौर पर यही लाइन धरती के वायुमंडल और बाहरी अंतरिक्ष के बीच सीमा रेखा मानी जाती है.
जो भी यान कार्मन लाइन के नीचे से गुजरता है उसे एयरक्राफ्ट कहा जाता है. जबकि इसके ऊपर से उड़ने वाले यानों को स्पेसक्राफ्ट की संज्ञा दी जाती है. थोटाकुरा ने जो यात्रा की, विज्ञान की भाषा में उसे सब-ऑर्बिटल यात्रा कहा जाता है. इसके तहत स्पेसक्राफ्ट धरती की कक्षा में प्रवेश नहीं करता, बल्कि यह कार्मन लाइन को पार करता है, वहां कुछ समय तक रुकता है और फिर वापस धरती पर आ जाता है. जितनी भी कंपनियां स्पेस टूरिज्म का प्रस्ताव ऑफर कर रही हैं, वे ज्यादातर इसी प्रकृति की हैं.





