ट्रक हेल्पर से लेकर मजदूरी करने वाले जिसने ने हराया 5 बार के cm को

2024 लोकसभा चुनावों के साथ ओडिशा में विधानसभा चुनाव भी हुए. लेकिन इसके नतीजे लगभग ढाई दशकों से यहां की राजनीति में छायी रहने वाली बीजू जनता दल (BJD) के लिए विध्वंसकारी साबित हुए. बीजेडी ने ना केवल राज्य की सत्ता गंवा दी, बल्कि चुनावी राजनीति में अजेय नजर आने वाले ओडिशा के निवर्तमान मुख्यमंत्री नवीन पटनायक अपनी सीट भी हार गए. नवीन पटनायक पिछले 24 साल से ओडिशा के मुख्यमंत्री थे. उनके नाम इस तटीय राज्य का सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड दर्ज है. नवीन पटनायक, 1998 में अस्का संसदीय क्षेत्र से उपचुनाव में 11वीं लोकसभा के सदस्य के रूप में चुने जाने के बाद से कभी चुनाव नहीं हारे थे.
कांताबांजी से आया चौंकाने वाला रिजल्ट
ओडिशा विधानसभा चुनाव के नतीजों को सांसें थाम कर देखा जा रहा था. खासकर ओडिशा के कांताबांजी के चुनावी मैदान में. मतगणना 28 राउंड से अधिक समय तक चली और 4 जून की देर शाम को वहां से एक चौंकाने वाला परिणाम मिला. अजेय प्रतीत होने वाले नवीन पटनायक, जिन्होंने अपने शानदार राजनीतिक करियर में कभी हार का सामना नहीं किया था, को पहली हार का सामना करना पड़ा. उनको भारतीय जनता पार्टी के लक्ष्मण बाग ने करारी शिकस्त दी. लक्ष्मण बाग 15 साल पहले तक दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम कर रहे थे.
बाग की जीत महज भाग्य का खेल नहीं
लक्ष्मण बाग को 90,878 वोट मिले, जबकि पटनायक को कांताबांजी विधानसभा क्षेत्र में 74,532 वोट मिले. यानी लक्ष्मण बाग की जीत का अंतर 16,344 वोट का रहा. पटनायक के प्रभाव को देखते हुए, यह हार और इसका अंतर अकल्पनीय है. ‘द हिंदू’ की एक रिपोर्ट के अनुसार लक्ष्मण बाग की जीत महज संयोग या भाग्य का खेल नहीं है. लक्ष्मण बाग ने कांताबांजी निर्वाचन क्षेत्र में लगातार जरूरतमंद लोगों की मदद की और उनके अच्छे कामों ने उनकी शानदार जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. लक्ष्मण बाग का जन्म एक गरीब किसान परिवार में हुआ था, जो गुजारा करने के लिए संघर्ष कर रहा था.
ट्रक हेल्पर से लेकर मजदूरी तक की
वे छह भाई-बहन थे. घर चलाने के लिए उन्होंने अपने परिवार के खेत पर काम किया. मामूली तनख्वाह पर एक ट्रक ड्राइवर के लिए खलासी यानी हेल्पर का काम किया. पैसा कमाने के लिए लक्ष्मण बाग दिहाड़ी मजदूर तक बन गए. हालांकि उनके बारे में ऐसी अफवाह थी कि वह दूसरे राज्यों में लेबर भेजने के एजेंटों के लिए काम करते थे. लेकिन यह बात कभी साबित नही हो सकी. बाद में उन्होंने ट्रक खरीदा और अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने में सफल रहे. पिछले साल दाखिल किए गए इन्कम टैक्स रिटर्न में उन्होंने अपनी आय 4.89 लाख रुपये दिखाई है.




