नकल के बहाने से कोर्ट से फाइल निकाली, फिर नष्ट कर दिए एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर, पढ़िए पूरा मामला

अलवर। जिले के तिजारा में हाल ही में हैरान कर देने वाला एक ऐसा वाक्या सामने आया, जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता। जी हां, लैंड डील के एक मामले में प्रॉपर्टी डीलर की ओर से पहले तो एग्रीमेंट को फर्जी बताकर अदालत से दस्तखतों की FSL जांच कराए जाने की मांग की गई। फिर नकल की अर्जी लगाकर फोटो कॉपी के बहाने फाइल को रिकॉर्ड रूम से बाहर ले जाया गया। इसके बाद उसी एग्रीमेंट पर किए दस्तखतों को नष्ट-भ्रष्ट कर दिया गया। रसीद टिकट उखाड़ दी गई और दस्तखतों को किसी नुकीली चीज से खुरच कर सेलो टेप लगा दी गई। ताकि एग्रीमेंट की एफएसएल जांच ही ना हो सके। अब इस मामले में एडीजे कोर्ट की ओर से एफआईआर दर्ज कराई गई है।
रोचक तथ्य यह है कि अगली तारीख पेशी पर यह प्रकरण संबंधित कोर्ट के ध्यान में आ गया। कोर्ट ने संबंधित संबंधित क्लर्कों को कारण बताओ नोटिस जारी किए। लेकिन, इस मामले कई दिन तक एफआईआर ही दर्ज नहीं हुई। इस बीच प्रार्थिया विमला कुमारी रमा की ओर से 11 मार्च, 2024 को हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को शिकायत की गई। उसके बाद 16 मार्च, 2024 को तिजारा थाने में एफआईआर दर्ज की गई।
प्रार्थिया विमला कुमारी रमा का तिजारा की एडीजे कोर्ट में चल रहा यह दीवानी मुकदमा एक लैंड डील से संबंधित है। दरअसल, उन्होंने साल 2013 में अपनी बेटी के जरिए दिल्ली के प्रॉपर्टी डीलर शरणजीत शर्मा से 60 लाख रुपए में एक बीघा कृषि भूमि खरीदी थी। इसके पेटे उन्होंने शरणजीत शर्मा को 52 लाख 50 हजार रुपए देकर रसीद लेने के साथ ही एग्रीमेंट कर लिया। इस एग्रीमेंट और पेमेंट रसीदों पर प्रॉपर्टी डीलर शरणजीत शर्मा ने अपनी पत्नी रेणु शर्मा के दस्तखत कराए थे। लेकिन, बाद में डीलर ने वह भिवाड़ी स्थित नवजीवन हॉस्पिटल के मालिक डॉ. अजय गोयल को बेच दी। शुरू में तो बिल्डर प्रार्थिया को उसके पैसे ब्याज सहित लौटाए जाने के झांसे देता रहा। लेकिन, बाद में मुकर गया। इसीलिए प्रार्थिया विमला कुमारी रमा को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
ऐसे तो लोगों का न्यायालयों से भरोसा ही उठ जाएगाः
इस प्रकरण के बाद अदालत के प्रशासनिक कार्यालयों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। किसी प्रकरण में नकल की कॉपी देने के लिए संबंधित बाबू द्वारा खुद ही फाइल ले जाकर फोटो कॉ़पी कराई जाती है। जिस बाबू के पजेशन में फाइल होती है, उसे पूरी तरह सुरक्षित रखना उसकी जिम्मेदारी है। ऐसे में कोर्ट को तत्काल प्रतिलिपि शाखा के क्लर्कों के खिलाफ एक्शन लेना चाहिए था। वे बताते कि फाइल में लगे दस्तावेजों में छेड़छाड़ किसने की। लेकिन, यह कहकर इस मामले की एफआईआर दर्ज कराई गई है कि नकल के लिए फाइल कोर्ट परिसर से बाहर ले जाकर उसमें छेड़छाड़ की गई है। अगर ऐसे गंभीर मामले में भी लीपापोती की गई तो लोगों को न्यायपालिका और न्याय से भरोसा ही उठ जाएगा।
निष्पक्ष जांच के बजाय पीड़ित को ही धमका रही पुलिसः
रोचक तथ्य यह है कि इस मामले में तिजारा की एसपी तक ने हाथ खड़े कर दिए हैं। अनुसंधान अधिकारी भी पीड़ित पक्ष को ही धमका रहा है। उन पर अपना केस वापस लेने का दवाब डाला जा रहा है। अनुसंधान अधिकारी द्वारा जातीय और समाज का दबाव बताकर इस मामले में एफआर लगाए जाने की बात कही जा रही है। इस संबंध पीड़ित विमला कुमारी रमा और उनकी बेटी अल्पना ने डीजीपी उत्कल रंजन साहू से मिलकर अपनी पीड़ा व्यक्त की है।




