चीन ने कुदरत से की फिर छेड़छाड़, ,बदला फलो का डीएनए

चीन तकनीक और एक्सपेरिमेंट के मामले में दुनिया को बार-बार हैरान करता रहता है. अब इस देश के वैज्ञानिकों ने फलों और पौधों के DNA के साथ ऐसा खेल किया है कि पूरी दुनिया दंग रह गई है. उन्होंने पारंपरिक फलों को नए रूप में बदलकर कृषि क्रांति की ओर एक बड़ा कदम बढ़ाया है.सबसे चर्चित प्रयोग है आलू और सेब का हाइब्रिड. वैज्ञानिकों ने आलू के DNA को सेब के कुछ जीन के साथ मिलाकर एक नया फल विकसित किया है. यह फल बाहर से आलू जैसा दिखता है, लेकिन काटते ही स्वाद सेब जैसा मीठा और रसदार मिलता है. इसे कच्चा खाया जा सकता है और यह पौष्टिक तत्वों से भरपूर है.दूसरा बड़ा आविष्कार है बांस और गन्ने का हाइब्रिड. बांस के DNA को गन्ने में मिलाकर वैज्ञानिकों ने ऐसी नई प्रजाति तैयार की है जो दिखने में मोटे बांस जैसी है, लेकिन अंदर से मुलायम, रस से भरी और ज्यादा मीठी है. सामान्य गन्ने की तुलना में यह ज्यादा रस देती है और छीलना भी आसान है. चीन के कई इलाकों में इसकी खेती शुरू हो चुकी है.इसके अलावा वैज्ञानिकों ने हरे और लाल अंगूर के DNA को मिलाकर एक नई प्रजाति विकसित की है. ये अंगूर गुलाबी रंग के होते हैं. पहली बाइट में खट्टास मिलती है, लेकिन उसके बाद मीठास इतनी बढ़ जाती है कि खाते ही मन ललचा जाता है. ये अंगूर ना सिर्फ स्वादिष्ट हैं बल्कि पोषण मूल्य भी ज्यादा रखते हैं.चीन में ये प्रयोग सिर्फ फलों तक सीमित नहीं हैं. देश पहले से ही हाइब्रिड आलू, तेजी से बढ़ने वाली फसलों और जलवायु अनुकूलित पौधों पर काम कर रहा है. आबादी ज्यादा और खेती योग्य जमीन कम होने के कारण चीन DNA टेक्नोलॉजी, जीन एडिटिंग और हाइब्रिडाइजेशन पर भारी निवेश कर रहा है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इन नई प्रजातियों से ज्यादा उत्पादन होगा. साथ ही कम पानी और जमीन की जरूरत पड़ेगी. फलों का पोषण मूल्य बढ़ेगा और कीटों और बीमारियों से बेहतर सुरक्षा होगी.वैज्ञानिकों का मानना है कि DNA एडिटिंग (CRISPR जैसी तकनीक) से हम फलों और सब्जियों को हमारे हिसाब से बदल सकते हैं. स्वाद, रंग, आकार, पोषण– सब कुछ कंट्रोल में आ जाएगा. चीन इस दिशा में आगे चल रहा है. फिर भी विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी नए फल को खाने से पहले उसकी सुरक्षा जांच जरूर करनी चाहिए.चीन के इन नवाचारों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि तकनीक से प्रकृति को भी बदला जा सकता है.