*👉🏻 अंधेरा होते ही पुलिस कमिश्नर दफ्तर हो जाता है राम भरोसे* *👉🏻 मुख्य द्वार पर भी नहीं होता कोई सुरक्षाकर्मी, लोगों के दस्तावेजों और शिकायतों की प्रतियों की सुरक्षा की जिम्मेवारी किस के भरोसे* *👉🏻 इस खबर संबंधी पूरी जानकारी हासिल करने के लिए नीचे दिए गए हैडलाइन एक्सप्रेस.इन के लिंक को क्लिक करें 👇🏻*
जालंधर,7 अगस्त 2019-(हैडलाइन एक्सप्रेस)- शहर में छुट भैया नेताओं से लेकर राजनीतिक पार्टियों के नेताओं को सुरक्षा प्रदान करने वाले पुलिस कमिश्नर के दफ्तर की सुरक्षा अंधेरा होते ही राम भरोसे हो जाती है।
शाम के समय पुलिस कमिश्नर दफ्तर के मुख्य द्वार पर भी कोई सुरक्षाकर्मी नहीं होता। जिस कारण कोई भी संदिग्ध व अपराधिक छवि का व्यक्ति पुलिस कमिश्नर दफ्तर में घुसकर किसी भी असामाजिक गतिविधि को अंजाम दे सकता है। अंधेरा होते ही पुलिस कमिश्नर दफ्तर में सन्नाटा छा जाता है।
पुलिस कमिश्नर के पास रोजाना ही सैकड़ों केसों की शिकायतें आती हैं जिस कारण उक्त दफ्तर में लोगों के दस्तावेज और शिकायतों की प्रतियों के इलावा सरकारी रिकॉर्ड भी पड़ा होता है। इन सब की जिम्मेवारी किस पर है यह एक सवाल बन गया है। शहर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने वाले पुलिस कमिश्नर के आला अधिकारी अंधेरा होते ही अपने दफ्तरों को राम भरोसे छोड़ कर चले जाते हैं। क्या पुलिस कमिश्नर इस तरफ ध्यान देंगे।