*👉🏻 सबसे ज्यादा मेडिकल सुविधाएं और अस्पताल मौजूद होने के बावजूद जालंधर में नहीं है कोरोना टेस्टिंग की सुविधा* *👉🏻 पढ़ें पूरी खबर सिर्फ हैडलाइन एक्सप्रेस पर 👇🏻*
जालंधर, 28 अप्रैल 2020-(प्रदीप भल्ला)- जालंधर को मेडिकल हब के नाम से भी जाना जाता है लेकिन फिर भी जालंधर में कोरोना टेस्टिंग की सुविधा मौजूद ही नहीं है। जिस कारण ज्यादा टेस्टिंग होने के बावजूद उसकी रिपोर्ट दो से 3 दिनों के बाद मिलने के कारण कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की गिनती बढ़ रही है। जिला प्रशासन और सेहत विभाग ज्यादा से ज्यादा लोगों के सैंपल ले रहा है लेकिन उसको टेस्ट करने की सुविधा जालंधर में ना होने के कारण सैंपल टेस्टिंग के लिए पहले उन्हें अमृतसर उसके बाद फरीदकोट और अब पटियाला में भेज रहा है। सैंपल लेने के बाद लोगों को वापस उनके घर भेज दिया जाता है। जब सैंपल की रिपोर्ट आती है और उसमें से कुछ लोग पॉजिटिव पाए जाते हैं तो तब तक वह दूसरे लोगों के संपर्क में आ चुके होते हैं। जिस कारण मरीजों की संख्या में वृद्धि हो रही है। इसे जिला प्रशासन की एक बड़ी गलती ही कहा जा सकता है जिसके कारण जालंधर 78 मरीजों के कारण राज्य में पहले स्थान पर आ चुका है और जालंधर को रेड जोन घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद राज्य सरकार की यह स्थिति है कि वह सैंपल टेस्ट करवाने के लिए 1 सप्ताह में तीसरी जगह बदल चुका है अमृतसर फरीदकोट के बाद अब सैंपल टेस्टिंग के लिए पटियाला में भेजने की बात हो रही है। शहर में 350 से ज्यादा अस्पताल होने के बावजूद प्रशासन कोई खास तैयारी नहीं कर रहा और ना ही यह कोशिश की जा रही है कि कोरोना सैंपल के टेस्टिंग के लिए कोई ऐसा कदम उठाया जाए कि जिस कारण सैंपल की रिपोर्ट एक ही दिन में मिल सके ताकि पॉजिटिव मरीजों का इलाज उसी दिन शुरू हो सके और वह किसी दूसरे के संपर्क में न आ सकें। जिस कारण मरीजों की गिनती में वृद्धि ना हो पाए। मुख्यमंत्री पंजाब कैप्टन अमरिंदर सिंह को इस तरफ ध्यान देकर सेहत विभाग और जिला प्रशासन के उच्च अधिकारियों को कड़े आदेश देने होंगे और साथ ही करोना टेस्टिंग की रिपोर्ट भी जल्द मिल सके इस पर भी कोई कड़ा कदम उठाएं ताकि जल्द से जल्द जालंधर रेड जोन से बाहर आ सके।

