*👉🏻 आपराधिक घटनाओं को रुकवाओ कमिश्नर साहब* *👉🏻 अवैध तरीके से असला देने के कारण हुई दो हत्याओं के केस में नामजद भारत गन हाउस का मालिक जमानत पर आकर फिर से बेच रहा अवैध तरीके से गोलियां* *👉🏻 किसने दी गन हाउस खोलने की परमिशन..सस्पेंस बरकरार ???* *👉🏻 पढ़ें पूरी खबर सिर्फ हैडलाइन एक्सप्रेस पर 👇🏻*
जालंधर, 15 दिसंबर 2020-(हैडलाइन एक्सप्रेस)-अपराधियों द्वारा बेगुनाह लोगों की हत्या और आपराधिक वारदातों को अंजाम देने के लिये अवैध रूप से मिल रही गोलियों और कुछ गन हाउस वालों की अपराधियों से सांठ-गांठ की पोल खोलने के मकसद से हैडलाइन एक्सप्रेस द्वारा कितनी ही खबरें प्रकाशित की जा रही हैं। इन खबरों के माध्यम से यह भी पता चलता है कि शहर में पुलिस कमिश्नरेट में आम नागरिकों के लिए अलग और पहुंच वाले लोगों के लिए अलग कानून चल रहे हैं। ऐसा ही एक और मामला हैडलाइन एक्सप्रेस के ध्यान में आया है जिसे पाठकों और पंजाब के डीजीपी के ध्यान में लाने के लिए प्रकाशित किया जा रहा है।
इस मामले से साफ पता चलता है कि पुलिस किस प्रकार पहुंच वाले लोगों पर मेहरबान होती है। शहर के लोगों को साल 2019 का मई महीना याद ही होगा जिसमें नकोदर चौक में स्थित लवली ऑटो की दूसरी मंजिल पर कैंटीन में एक मनप्रीत सिंह नामक युवक ने सीमा तिवाड़ी नामक लड़की को गोलियां मारकर कत्ल करने के बाद खुद भी गोली मारकर अपनी जान दे दी थी। पुलिस ने थाना डिवीजन नंबर चार में मामला दर्ज कर जब जांच की थी तो पता चला था कि मृतक मनप्रीत सिंह ने जिस .32 बोर की रिवाल्वर से युवती की जान लेने के बाद अपनी जान दे दी थी वह उसने कपूरथला में स्थित चाचा गन हाउस से अवैध तरीके से ली थी।
पुलिस द्वारा छानबीन करने पर पता चला था कि चाचा गन हाउस का डीलर संदीप सिंह साल 2016 से विदेश में है और उसने गन हाउस की जिम्मेदारी जालंधर इसलामगंज के रहने वाले पिता-पुत्र विक्रमजीत सिंह और स्वर्णजीत सिंह को सौंपी थी। मृतक मनप्रीत को चाचा गन हाउस चला रहे पिता-पुत्र ने साल 2019 में चुनाव आचार संहिता लगे होने के बावजूद अवैध तरीके से .32 बोर की रिवाल्वर और गोलियां दी थी। जिससे मृतक आरोपी मनप्रीत ने घटना को अंजाम दिया था।
जिसके बाद थाना डिवीजन नंबर चार की पुलिस ने आरोपी पिता-पुत्र विक्रमजीत सिंह और स्वर्णजीत सिंह को केस में आरोपी के तौर पर नामजद कर गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। आरोपी पिता स्वर्णजीत सिंह का जालंधर के नाज सिनेमा के पास गली में भारत गन हाउस है। स्वर्णजीत सिंह को कोरोना काल में माननीय अदालत ने ज़मानत दे दी थी।
यह तो हुई उस साल की घटना की असली कहानी और अब कहानी का दूसरा पहलू यह है कि आरोपी स्वर्णजीत सिंह के नाम पर जालंधर में नाज सिनेमा के पास भारत गन हाउस चल रहा है और आरोपी खुद इस गन हाउस में बैठकर असला/गोलियों की सेल परचेज करता है। अगर किसी आम नागरिक पर इनकम टैक्स का पर्चा हो जाता है या 2 बोतल शराब पकड़े जाने के बाद एक्साइज एक्ट का पर्चा दर्ज किया जाता है तो उसका असला लाइसेंस तुरंत ही पुलिस कमिश्नर द्वारा सस्पेंड करने के आदेश जारी किए जाते हैं और असला धारक को अपना वेपन संबंधित थाने या सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त गन हाउस में जमा करवाने के लिए कहा जाता है, लेकिन इस कहानी में आरोपी पर पुलिस की मेहरबानी इतनी है कि मुकदमा दर्ज होने और जमानत पर आने के बाद स्वर्णजीत सिंह अपनी भारत गन हाउस नामक दुकान खोलता है और वहाँ बैठकर हथियारों और इंडियन ऑर्डिनेंस फैक्ट्री की गोलियों के साथ-साथ विदेशी कंपनी की गोलियों की खरीद/बिक्री करता है। जिसकी वीडियो हैडलाइन एक्सप्रेस के पास मौजूद है। सबसे हैरानी वाली बात यह है कि स्वर्णजीत सिंह की दुकान भारत गन हाउस पर सिर्फ लाइसेंस देखकर ग्राहक को बिना लाइसेंस पर एन्ट्री किये इंडियन ऑर्डिनेंस फैक्ट्री के साथ-साथ विदेशी कंपनी की गोलियां भी बेची जा रही है। इससे साफ पता चलता है कि गन हाउस वाले ही जब बिना एन्ट्री लाइसेंस पर इंडियन ऑर्डिनेंस फैक्टरी के साथ-साथ विदेशी कम्पनी की गोलियां बेचते हैं तो वे ही गंगेस्टरों को भी गोलियां बेचते होंगे ? ये सब कुछ जानते होने के बावजूद जालंधर कमिश्नरेट पुलिस अपराधियों द्वारा किसी आपराधिक घटना को अंजाम देने या किसी मासूम के कत्ल किये जाने का इंतज़ार कर रही है। इससे यह साफ पता चलता है कि शहर में आम नागरिकों के लिए अलग और पहुंच वाले लोगों के लिए अलग कानून पुलिस द्वारा चलाए जाते हैं।
— कानून क्या कहता है–
जब इस पूरे मामले के बारे में पुलिस के एक उच्च अधिकारी से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि कानून तो यह कहता है कि पर्चा दर्ज होने के बाद पुलिस तुरंत ही आरोपी के नाम पर चल रहे गन हाउस को सील कर उस में पड़े हुए सभी हथियार और गोलियों को ज़ब्त करें या अपने असला भंडार में उन्हें सुरक्षित रखें। जब तक पूरा मामला अदालत से निपट नहीं जाता तो आरोपी को गन हाउस खोलने की अनुमति नहीं होती। अगर आरोपी केस के दौरान ही गन हाउस चला रहा है तो यह पुलिस की मिलीभगत की तरफ इशारा करती है।
–मानवाधिकार संस्था इस मामले को लेकर जाएगी हाईकोर्ट में–
शहर की एक मशहूर मानवाधिकार संस्था के प्रधान से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वह इस मामले की शिकायत पंजाब के डीजीपी को करेंगे। अगर फिर भी कोई कार्रवाई नहीं होती तो वह इस मामले को माननीय उच्च न्यायालय में लेकर जाएंगे और इस मामले में संलिप्त पुलिस की काली भेड़ों और आरोपी गन हाउस मालिक को सख्त सजा दिलवाएंगे।
