कितने राज खोलता है DNA!

डीएनए यानी डीऑक्सीराइबो न्यूक्लिक एसिड से पता चल जाता है कि किसी व्यक्ति की शारीरिक संरचना कैसी है और वह संरचना जिससे मैच करेगी, वे आपस में रक्त संबंधी होंगे. जी हां, डीएनए जीव विज्ञान की दुनिया की एक ऐसी खोज है, जिससे पता चल जाता है कि जीव अपना वंश कैसे बढ़ाते हैं. पूर्वज और वंशज के डीएनए एक जैसे होते हैं. इसीलिए किसी की पहचान के लिए डीएनए टेस्ट कराया जाता है.
कितने राज खोलता है DNA, जिसकी पहेली का जवाब खोजकर वैज्ञानिकों ने इतिहास रच दिया था?
वैज्ञानिक जेम्स डी वॉटसन और फ्रांसिस क्रिक ने बताया था कि कैसे DNA आनुवांशिक जानकारियां ट्रांसफर करता है. जब किसी शव की पहचान नहीं हो पाती तो उसके डीएनए टेस्ट का फैसला लिया जाता है. डीएनए यानी डीऑक्सीराइबो न्यूक्लिक एसिड से पता चल जाता है कि किसी व्यक्ति की शारीरिक संरचना कैसी है और वह संरचना जिससे मैच करेगी, वे आपस में रक्त संबंधी होंगे. जी हां, डीएनए जीव विज्ञान की दुनिया की एक ऐसी खोज है, जिससे पता चल जाता है कि जीव अपना वंश कैसे बढ़ाते हैं. पूर्वज और वंशज के डीएनए एक जैसे होते हैं. इसीलिए किसी की पहचान के लिए डीएनए टेस्ट कराया जाता है.
25 अप्रैल 1953 को जब दो वैज्ञानिकों ने इसकी संरचना की व्याख्या की थी तो दुनिया हैरान रह गई थी. आइए जानने की कोशिश करते हैं कि डीएनए कैसे-कैसे राज खोल सकता है.
इन्होंने सबसे पहले डीएनए की पहचान की
यह साल 1869 की बात है. स्विस बायोलॉजिस्ट जोहांस फ्रेडरिक मिशर व्हाइट ब्लड सेल्स (सफेद रक्त कोशिका) पर शोध कर रहे थे. उसी दौरान उन्होंने पहली बार डीएनए की पहचान की थी. इसके लंबे समय बाद साल 1953 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के दो वैज्ञानिकों जेम्स डी वॉटसन और फ्रांसिस क्रिक ने डीएनए की संरचना की व्याख्या की. इन्होंने डीएनए मॉल्यूक्यूल के डबल हेलिक्स स्ट्रक्चर की खोज की. इसके बाद यह पता चला कि सभी जीवों में अनुवांशिक सूचनाओं के लिए डीएनए जिम्मेदार होता है. दोनों वैज्ञानिकों को इस खोज के लिए साल 1962 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.
वायरस में भी होता है डीएनए
यही बात वायरस पर भी लागू होती है, क्योंकि उनमें भी अनुवांशिक मैटेरियल के रूप में ज्यादातर आरएनए या डीएनए ही पाया जाता है. कुछ वायरस में जेनेटिक मैटेरियल के रूप में आरएनए तो कुछ में डीएनए पाया जाता है. ह्यूमन इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस यानी आरएनए में आरएनए पाया जाता है जो होस्ट सेल के साथ अटैच होकर डीएनए में बदल जाता है. कोरोना वायरस की पहचान भी इसी के जरिए करने में आसानी हुई थी.
इतनी होती है शरीर में मौजूद डीएनए की लंबाई
सीधी-सीधी भाषा में कहें तो हमारे शरीर में कई करोड़ सेल्स (कोशिकाएं) होती हैं. रेड ब्लड सेल्स यानी श्वेत रक्त कोशिकाओं को छोड़कर बाकी सभी कोशिकाओं में एक जेनेटिक कोडिंग होती है, जिनसे शरीर बनता है. यही डीएनए होता है. मानव शरीर में मौजूद सीढ़ी की तरह आपस में घूमे हुए डीएनए को अगर सीधा किया जाए तो इनकी लंबाई इतनी हो जाएगी कि सूर्य तक पहुंचने के बाद 300 बार वापस धरती पर लौट सकते हैं.इसी डीएनए टेस्ट से हमारे जींस या पूर्वजों या हमारे वंश के बारे में सटीक जानकारी मिलती है.



