धडल्ले से बिक रही हैं कॉल डिटेल्स,पैसे दो और पता करो कौन किससे, कितनी देर क्या बात करता है
आप किससे बात कर रहे हैं, कितनी देर बात कर रहे हैं, इसकी जानकारी दूसरों को आसानी से हासिल हो सकती है।
पुलिस, जासूसी एजेंसियों और प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियों के इम्प्लॉइज की मिलीभगत से कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) निकलवाने का गोरखधंधा देशभर में तेजी से फैल रहा है।
टेलीकॉम कंपनियां ऑथराइज्ड सरकारी एजेंसियों को सीडीआर देने के लिए मजबूर हैं। इसलिए वो पुलिस कर्मचारियों को कॉल डिटेल आसानी से मुहैया करा देती हैं। टेलिकॉम कंपनियों के छोटे-छोटे कर्मचारी भी ऐसे मामलों में कॉल डिटेल देते पकड़े गए हैं।
सीडीआर लीक होने के अधिकतर मामलों में पुलिस भी शामिल पाई गई है। हाल ही में जब देश की पहली महिला जासूस रजनी पंडित अरेस्ट हुईं तो एक बार फिर कॉल डिटेल लीक होने का मामला चर्चा में आ गया है। ऐसे कई मामले पकड़े गए हैं जहां मात्र 8-10 हजार रुपए में कॉल डिटेल बेची जा रही है।
टेलीकॉम डिस्प्यूट सेटलमेंट एंड अपीलेट ट्रिब्यूनल (टीडीसैट) के पूर्व सदस्य कुलदीप सिंह कहते हैं, “प्राइवेट कंपनियों को मिलने वाले लाइसेंस में सीडीआर देने का प्रावधान है। पुलिस वाले प्रूफ के लिए सीडीआर निकलवाते हैं।
सरकारी टेलीकॉम कंपनी में तो पुलिस वालों से इस काम के लिए लिखित मांग लिया जाता है, लेकिन प्राइवेट कंपनियां ऐसा नहीं कर पाती हैं। क्राइम का हवाला देने पर पुलिस को प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियां सीडीआर दे देती हैं।” आईटी से जुड़े मामलों के एक्सपर्ट और वकील पवन दुग्गल कहते हैं, “कॉल डिटेल का गलत इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ सख्त प्रावधान नहीं होने से धड़ल्ले से यह धंधा चल रहा है।”
दुग्गल ये भी कहते हैं कि आईटी एक्ट के तहत सीडीआर का गलत इस्तेमाल करने वालों को जुर्म साबित होने पर तीन साल की सजा का प्रावधान है और 5 लाख तक का जुर्माना हो सकता है, लेकिन यह जमानती जुर्म के अंतर्गत आता है। गिरफ्तार आरोपियों को आसानी से जमानत मिल जाती है और वह इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को खत्म कर देता है। अब तक सीडीआर के गलत इस्तेमाल के मामले में किसी को सजा नहीं हुई है।
“हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने निजता के अधिकार (राइट टू प्राइवेसी) को मौलिक अधिकार माना है जिसका हनन होने पर आप पिटीशन दायर कर सकते हैं, लेकिन भारत में अभी निजता का कानून नहीं है। डाटा प्रोटेक्शन संबंधी कानून भी नहीं है।”
वकील विराग गुप्ता कहते हैं, किसी जिले के एसपी के कहने पर भी सीडीआर आसानी से निकल सकते हैं। प्राइवेट कंपनियां मना नहीं कर सकती। उन्होंने बताया कि यह पता नहीं चल पाता है कि कौन सी सरकारी एजेंसी ने गैरकानूनी तरीके से सीडीआर निकलवाया है। उन्होंने बताया कि कोई प्राइवेट डिटेक्टर किसी ऑथराइज्ड एजेंसी के इम्प्लॉई को सीडीआर निकलवाने के लिए कहता है, वह इम्प्लॉई उस व्यक्ति के लिए गलत तरीके से उसका सीडीआर निकलवा सकता है।
एयरटेल, वोडाफोन जैसी प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों से जुड़ी सेलुलर आॅपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीअोएआई) के डायरेक्टर जनरल राजन मैथ्यूज कहते हैं, कोई पोस्टपेड कनेक्शन रखने वाला आदमी चाहे तो वह सर्विस प्रोवाइडर कंपनी से अपना सीडीआर ले सकता है, लेकिन कोई दूसरा ऐसा करता है तो अपराध है। कानून से जुड़ी एजेंसियां सीडीआर हासिल करती हैं।
उन्होंने बताया कि दो लोगों में जो बातें होती है तो उसकी डिटेलिंग रनिंग रूप में होती है। जो मशीन करती है। एक दिन में एक कंपनी की मशीन में 15-15 करोड़ बातचीत की रनिंग होती है। कंज्यूमर द्वारा अपना सीडीआर मांगने पर उस रनिंग को हार्ड कॉपी में कनवर्ट करना पड़ता है। इस लिहाज से यह आसान नहीं है। अगस्त, 2016 में गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने प्रश्नकाल के दौरान संसद में कहा था कि कुछ पुलिस अधिकारी सीडीआर के गलत इस्तेमाल करते पाए गए हैं। अपराध की जांच के लिए पुलिस के साथ आईबी, सीआईडी, क्राइम ब्रांच जैसी कई सरकारी एजेंसियां सीडीआर हासिल कर सकती है।
2013 में अरुण जेटली का कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) निकालने के आरोप में दिल्ली पुलिस ने 10 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें दिल्ली पुलिस के तीन कर्मी शामिल थे। एक प्राइवेट जासूस भी था। नवंबर, 2013 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने सीडीआर निकलवाने के आरोप में तीन पुलिस वालों को गिरफ्तार किया गया। इनके साथ दो निजी जासूस भी पकड़े गए थे।
ये लोग कुछ मशहूर लोगों के सीडीआर निकलवाने की कोशिश कर रहे थे। गिरफ्तार पुलिस वालों में एएसआई, हेड कॉन्स्टेबल और कॉन्स्टेबल शामिल थे। जुलाई, 2016 में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दिल्ली की एक निजी कंपनी से 4000 सीडी की बरामदगी की। क्राइम ब्रांच के अधिकारी ने बताया कि यूपी पुलिस की मदद से ये सीडीआर निकलवाई गई थी। जुलाई, 2016 में राजस्थान पुलिस के एसआई मुकेश कुमार मीणा को 4 लोगों के साथ सीडीआर निकलवाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। सीडीआर निकलवाने के आरोप में मुंबई में गिरफ्तार रजनी पंडित मामले में पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने कुछ पुलिस वालों पर संदेह जताया है।

