कमिश्नरेट पुलिस की ढीली कारगुजारी –3 साल पहले दी गई शिकायत अब पहुंची सीआईए स्टाफ–


जालंधर,29 मई-(हरदीप सिंह बब्बू)- कमिश्नरेट पुलिस की ढीली कारगुजारी की मिसाल उस समय मिली। जब एक समाज सेवी संस्था द्वारा दी गई शिकायत करीब 3 साल बाद सीआईए स्टाफ पहुंची। ह्यूमन राइट प्रोटेक्शन फ्रंट (रजि.) के राष्ट्रीय प्रधान राजीव शर्मा ने बताया कि उन्होंने करीब 3 साल पहले उस समय के एडीसीपी-1 जे.एलन चेजियन को चाइना डोर के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए शिकायत दी थी। लेकिन पुलिस की ढीली कारगुजारी के कारण उस शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। अब तीन साल बाद सीआईए स्टाफ से उन्हें उस शिकायत के संबंध में बयान दर्ज करवाने के लिए फोन आया। राजीव शर्मा ने बताया कि वह तो उक्त शिकायत के बारे में एक तरह से भूल ही चुके थे। लेकिन जब एसीपी क्राइम के रीडर का उन्हें फोन आया तब उन्हें पता चला कि वह शिकायत हो अभी कार्रवाई न होने के कारण पेंडिंग पड़ी हुई है। इस बात से साफ जाहिर होता है कि पुलिस की ढीली कारगुजारी के कारण लोगों को इंसाफ मिलने में देरी क्यों होती है और क्यों पुलिस प्रशासन से इंसाफ ना मिलने के कारण लोग माननीय अदालत की तरफ रुख करते हैं। राजीव शर्मा ने बताया कि वह करीब 3 साल पहले अपनी संस्था की तरफ से पुलिस कमिश्नर को शिकायत पत्र देने गए थे लेकिन पुलिस कमिश्नर के दफ्तर में मौजूद ना होने के कारण उन्होंने वह शिकायत पत्र उस समय के एडीसीपी-1 को दे दी थी और एडीसीपी-1 ने आश्वासन दिया था कि उनकी शिकायत पर जल्द से जल्द कार्रवाई कर चाइना डोर बेचने वालों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। मगर इस शिकायत पत्र के आधार पर आज तक कार्रवाई हुई ही नहीं।
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—-क्या थी शिकायत—-
राजीव शर्मा ने चाइना डोर बेचने वालों के खिलाफ शिकायत में लिखा था कि इस ड्रैगन डोर के कारण पशु-पक्षियों की जिंदगी तो खतरे में पड़ती है, और इंसान भी अपनी जान गंवा चुके हैं। इस डोर के कारण कुछ लोग अंगहीन हो चुके हैं। चाइना डोर बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग और चाइना डोर पर पूर्ण रुप से प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर राजीव शर्मा ने शिकायत दी गई थी।
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—इंसाफ के लिए कहां जाए आम नागरिक–
पुलिस प्रशासन की ढीली कारगुजारी और इंसाफ ना मिलने के कारण लोग माननीय अदालत की शरण में जाने लगे हैं। लेकिन यह बात भी सोचने वाली है कि जिन लोगों के पास वकीलों का खर्च उठाने की हिम्मत है वह तो कोर्ट का रास्ता अपना लेंगे, मगर जो लोग इस के योग्य नहीं है वह पुलिस प्रशासन से ही इंसाफ की उम्मीद रखते हैं। लेकिन अगर इसी तरह एक-एक केस में सालों का वक्त लगेगा तो आम इंसान इंसाफ की उम्मीद किससे रखेगा।


