*👉🏻 शहर में गैंगस्टरों और बदमाशों के पास अवैध वेपन बने पुलिस के लिए सिरदर्द* *👉🏻 चुनावी कोड लगने से पहले ही लाइसेंसी असला जमा करवाने के आदेश जारी किए पुलिस कमिश्नर ने,लेकिन अवैध असले पर रोक लगाने में हुए फेल*
जालंधर,10 मार्च 2019-(प्रदीप भल्ला)- शहर में एक बार फिर से हुए गोली कांड ने एक व्यक्ति की जान ले ली। साथ ही इस गोली कांड ने पुलिस प्रशासन के शहर में पुख्ता सुरक्षा प्रबंधों की पोल खोलकर रख दी। इस गोली
कांड ने शहर में गैंगस्टरों और बदमाशों के पास अवैध असला मौजूद होने के सबूत दे दिए। महानगर में यह कोई पहली घटना नहीं है जिसमें गोली चली हो। अगर पिछले कुछ महीनों में हुई वारदातों पर नजर दौड़ाई जाए तो पता चलता है कि उन वारदातों में भी अवैध असला ही प्रयोग किया गया था। साल 2018 के नवंबर महीने में मोता सिंह नगर में शशि शर्मा और उसके बेटे पर कातिलाना हमला करने वाले हमलावरों के पास भी अवैध पिस्टल थी। जिसमें से एक अवैध पिस्टल को पुलिस आज तक नहीं बरामद कर पाई। उसके बाद नेहरू गार्डन रोड पर स्थित सेहरा फील्ड में सेहरा बंधुओं पर जानलेवा हमला करने वाले हमलावरों के पास भी अवैध पिस्टलें थी। जिसके बाद बीती रात
संगत सिंह नगर में हुए गोलीकांड में जसप्रीत सिंह जस्सा पर गोलियां चलाने वाले के पास भी पिस्टल ही थी। अब सोचने वाली बात यह है कि इतने अवैध हथियार शहर में कहां से आ रहे हैं। वैसे तो पुलिस प्रशासन चुनावी कोड लगने से पहले ही लाइसेंस धारकों से अपने वेपन जमा करवाने के लिए जोर डाल रही है। लेकिन इसके विपरीत शहर के गैंगस्टरों और बदमाशों के पास सैकड़ों की तादाद में अवैध असला मौजूद है। जिन पर नकेल कसने में कमिश्नरेट पुलिस पूरी तरह से फेल साबित हुई है।
शहर में अवैध असले की मौजूदगी पुलिस के लिए भी एक बड़ी चुनौती है। क्योंकि एक महीने बाद लोकसभा के चुनाव होने वाले हैं और इसी दौरान इन अवैध हथियारों का शहर में होना पुलिस की चिंता को बढ़ाएगा। शहर में छोटे-मोटे लड़ाई झगड़ों पर गोली चल जाना एक गंभीर मामला बनता जा रहा है। इसीलिए शहर में चर्चा हो रही है कि क्या कमिश्नरेट पुलिस इन अवैध हथियारों पर अंकुश लगाने में सफल हो पाएगी या इसी तरह छोटे-मोटे लड़ाई झगड़ों में यह अवैध हथियार लोगों की जान के दुश्मन बनते रहेंगे।