*👉🏻 कोरोना का असर* *👉🏻 कुछ प्राइवेट अस्पतालों के स्टॉफ का मरीजों के प्रति रवैया हुआ खराब, ना ही दे रहे हैं दवाई और ना ही मरीजों को किया जा रहा है चेक* *👉🏻 इस खबर संबंधी पूरी जानकारी हासिल करने के लिए नीचे दिए गए हैडलाइन एक्सप्रेस के लिंक को क्लिक करें 👇🏻*
जालंधर, 01 अप्रैल 2020-(प्रदीप भल्ला)- वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के चलते पूरे देश में दहशत का माहौल बना हुआ है। दूसरी तरफ मौसम के बदलाव के कारण बुखार, खांसी और जुकाम के मरीजों की गिनती में भी इजाफा हो रहा है।
वही कोरोना वायरस की दहशत और वायरल फीवर के मरीजों के कारण जालंधर के कुछ प्राइवेट अस्पतालों के स्टॉफ का रवैया मरीजों के प्रति बेहद ही खराब हो गया है। नाम ना छापने की शर्त पर कुछ लोगों ने बताया कि वह जालंधर के अलग-अलग प्राइवेट अस्पतालों में अपनी या अपने रिश्तेदार की दवाई लेने के लिए गए थे तो उन्होंने देखा कि अस्पताल जो कि कोरोना वायरस से पहले पूरी तरह से मरीजों से भरे हुए थे अब बिल्कुल खाली हो चुके हैं या इक्का-दुक्का मरीज ही अस्पताल में दाखिल है। यह सब कोरोना वायरस की दहशत का नतीजा है। इसके बाद प्राइवेट अस्पताल में मौजूद व्यक्ति जोकि दवाई लेने आया था ने जब रिसेप्शन पर मौजूद महिला से दवाई लेने के लिए स्लिप दिखाई तो उसने बिना स्लिप देखें दवाई ना होने का कहकर वहां से जाने के लिए बोल दिया। लेकिन उक्त व्यक्ति के पीछे खड़े जब दूसरे व्यक्ति ने उसी अस्पताल के डॉक्टर की स्लिप दिखाई जिस पर वही दवाई लिखी हुई थी जो पहले वाला व्यक्ति मांग रहा था तो रिसेप्शन पर मौजूद महिला ने तुरंत ही उसे वह दवाई दे दी। जिसके बाद पहले वाले व्यक्ति ने रिसेप्शनिस्ट महिला से कहा कि जब मैंने यह दवाई आप से मांगी थी तो आपने इनकार कर दिया था और अब दूसरे व्यक्ति को आप वही दवाई दे रहे हैं। इतना सुनते ही रिसेप्शनिस्ट महिला भड़क गई और दवाई लेने आए व्यक्ति से बदतमीजी करने लगी। जब व्यक्ति ने महिला को तमीज से बात करने के लिए कहा तो अस्पताल में ही मौजूद स्टाफ के व्यक्ति ने उक्त व्यक्ति को बोलना शुरु कर दिया। हंगामा बढ़ता हुआ देख डॉक्टर भी अपने कमरे से बाहर आ गए और उक्त व्यक्ति को वहां से जाने के लिए कहने लगे। इस सारे घटनाक्रम में लाइन में लगे हुए तीसरे व्यक्ति ने जब डॉक्टर को कहा कि इसमें आपके स्टाफ और रिसेप्शनिस्ट महिला की गलती है तो डॉक्टर ने अपने स्टाफ को चुप रहने का कहकर लोगों को वहां से जाने के लिए बोल दिया। ऐसा ही एक वाक्य जालंधर के मेंबरों चौक के नजदीक स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में भी हुआ जहां बाहर से दवाई लेने आए एक व्यक्ति को अस्पताल स्टाफ ने बुरा भला कह कर वहां से चले जाने के लिए कहा।
यह सिर्फ एक या दो अस्पतालों की बात नहीं बल्कि शहर के कई प्राइवेट अस्पताल में जहां पर इलाज कराने के लिए आए मरीजों से बदतमीजी से बात की जा रही है और बिना इलाज के ही उन्हें सरकारी अस्पताल में जाने के लिए बोला जा रहा है। यह सब कोरोना वायरस की दहशत का असर है, क्योंकि निजी अस्पताल के डॉक्टरों को मरीजों को चेक करने से अब डर लगने लगा है।वायरल फीवर या खांसी जुकाम के मरीज अब अपना इलाज कराने के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। जब इस पूरे मामले में एक निजी अस्पताल के डॉक्टर से बात की गई तो उस ने कहा कि उनके पास मेडिकल किट नहीं है जिसे पहन कर वह मरीज को चेक करें, क्योंकि अगर मरीज कोरोना पोसिटिव निकला तो उन्हें भी कोरोना वायरस होने का खतरा है। जिला प्रशासन को चाहिए कि वह प्राइवेट अस्पतालों पर सख़्ती कर उन्हें आदेश दें कि आने वाले मरीजों का पहले की भांति ही चेकअप करें और अगर कोई बाहरी व्यक्ति दवाई लेने के लिए आता है तो उसे डॉक्टरी स्लिप देख कर दवाई दी जाए।

