*👉🏻 अवैध असला तो घर में भी बन जाता है लेकिन गोलियां कहाँ से मिलती हैं अपराधियों को* *👉🏻 क्या गन हाउस वाले अवैध रूप से बेचते हैं गोलियां* *👉🏻 पढ़ें पूरी खबर सिर्फ हैडलाइन एक्सप्रेस पर 👇🏻*


जालंधर, 16 नवंबर 2020-(एच ई)-जालंधर कमिश्नरेट पुलिस और देहात पुलिस द्वारा समय समय पर अपराधियों की धरपकड़ की जाती है। अपराधियों के पास से पुलिस को अवैध असला और कारतूस भी बरामद होते रहते है। आज भी कमिश्नरेट पुलिस द्वारा एक अपराधी के पास से 7 अवैध पिस्तौलें और 117 जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं। इसी तरह पिछले दिनों भी पुलिस ने कुछ अवैध पिस्तौलें व कारतूस बरामद किए थे।
जब पुलिस अपराधियों को पकड़ती है और अवैध असला बारे पूछताछ करती है तो अपराधी बताते है कि वह अवैध हथियार यूपी-बिहार से लाते है या मंगवाते है। उत्तर प्रदेश और बिहार अवैध हथियारों के लिये बदनाम है, तो हो सकता है अपराधियों को हथियारों की सप्लाई उत्तर प्रदेश या बिहार से होती होगी और वहां से यह हथियार आसानी से अपराधियों को मिल जाते है, क्योंकि वहां पर तो कई घरों में अवैध रूप से असला तैयार किये जाने की खबरें भी आती रहती है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यहाँ यह है कि कारतूस अपराधियों को कौन सप्लाई करता है, यह सोचने वाली बात है।
क्योंकि भारत में ऑर्डिनेश फैक्ट्री की देख रेख में महाराष्ट्र के खड़की से ही पूरे देश के सिविलियन को लाइसेंस पर गोलियां एक लिमिट के हिसाब से दी जाती है। वह भी आर्म्स लाइसेंस डीलर द्वारा ही सिविलियन के लाइसेंस पर साल में मुशिकल से 25 से 50 गोलियां ही बेची जाती है। उसके बाद भी गोलियां कहाँ चलाई गई है इसका भी पूरा हिसाब किताब बताने या चली हुई गोली के खोल जमा कराने के बाद ही नई गोलियां असला धारक को दी जाती हैं। कुछ कारतूस (जैसे 12 बोर गन का) कुछ प्राईवेट कंपनी भी बनाती है वह भी केंद्र सरकार की देख रेख में। कारतूस को अवैध हथियारों की तरह घरों में तैयार नहीं किया जा सकता। इसी तरह कई तरह के अवैध हथियार भी पुलिस पकड़ चुकी है जिसकी गोलियां तो भारत सरकार की ऑर्डिनेश फैक्ट्री न तो बनाती है और न ही देश मे बनाने का किसी को लाइसेंस ही दिया गया है। जैसे 30 बोर के पिस्टल की गोलियां देश में तैयार नहीं की जाती। यह गोलियां विदेश से ही मँगवाई जाती है। इन गोलियों को या तो शूटरों द्वारा लाया जाता है या फिर आर्म्स लाइसेंस डीलर ही इसे मँगवा सकते है। दूसरी तरफ़ 1983/84 से विदेशों से विदेशी हथियार और गोलियों के आयात पर बैन लगा हुआ है। इसके बाबजूद अपराधियों के पास से समय-समय पर अवैध देसी हथियारों के साथ इंडियन ऑर्डिनेश फैक्ट्री की गोलियां या विदेशी गोलियां बरामद हो चुकी हैं। ऐसे ही कई तरह के सवाल खड़े होते है कि क्या अपराधियों को गोलियां लाइसेंसी गन हाउस डीलर तो नही सप्लाई करते ? क्योंकि 315 बोर, 12 बोर और .32 बोर पिस्टल की गोलियां गन हाउस डीलर को ही लाइसेंस पर बेचने का अधिकार सरकार और प्रशासन द्वारा प्राप्त है। इसलिए यह बात सोचने वाली है कि अपराधियों को गोलियां कहां से मिलती है। क्योंकि फैक्ट्रियों से जो गोलियां निकलती है उनका पूरा हिसाब-किताब रखा जाता है। फैक्ट्रियों से गोलियां गन हाउस डीलरों को ही सप्लाई की जाती है। क्या गोलियां गन हाउस डीलरों द्वारा अवैध रूप से बेची जा रही हैं ? इसीलिए तो अपराधियों को गोलियां आसानी से मिल जाती है। अब यही सवाल उठता है कि अपराधियों को गोलियां अवैध रूप से कौन सप्लाई करता है। क्या गन हाउस वाले अवैध रूप से गोलियों को महंगे दाम पर अपराधियों को बेच रहे हैं। पुलिस प्रशासन को चाहिए कि वह इस बात पर ध्यान देते हुए गहराई से इसकी जांच करे और पता करें कि अपराधियों तक गोलियां कैसे पहुंचती हैं।
