*👉🏻 मामला थाना भार्गव कैम्प के प्रभारी पर हमले का* *👉🏻 मामला घुमाने की कोशिश में हमलावर* *👉🏻 क्या खोया सम्मान बचा पाएगी खाकी या हावी हो जाएगी खादी* *👉🏻 पढ़ें पूरी खबर सिर्फ हैडलाइन एक्सप्रेस पर 👇🏻*
जालंधर, 13 अप्रैल 2021-(एच.ई)-खाकी v/s खादी की लड़ाई में क्या खाकी अपना सम्मान बचा पाएगी। हम बात कर रहे हैं बीते दिनों मॉडल हाउस में हुए थाना भार्गव कैम्प के प्रभारी व सुरक्षाकर्मियों पर हमले का। हमलावर कहानी को घुमाने की फिराक में है ताकि पुलिस पर दबाव बनाया जा सके। इसलिए हमलावरों के रिश्तेदार व समर्थक रोज कुछ नया सोच कर उसे मीडिया में पेश कर रहे हैं। 
–हमलावरों द्वारा सामने लाई गई सीसीटीवी फुटेज हमले के बाद की,पूरी फुटेज क्यों नहीं पेश की–
पकड़े गए और नामजद हमलावरों के रिश्तेदारों ने कल मीडिया में सीसीटीवी फुटेज दिखाई जिसमें पुलिसकर्मी हमलावरों को पीट रहे थे, जबकि उससे पहले की सीसीटीवी फुटेज नहीं दिखाई। जिसमें थाना प्रभारी भगवंत भुल्लर पर हमला हुआ था और उनकी पगड़ी दूर जा गिरी थी। उसके बाद हमलावरों ने थाना प्रभारी को लात-घूंसे मारने शुरू कर दिए थे।
जो फुटेज हमलावरों के रिश्तेदारों ने दिखाई है उसमें पीसीआर की गाड़ी भी दिखाई दे रही है जिसमें पुलिस हमलावरों को ले जाने वाली थी। सोचने वाली बात है अगर भगवंत भुल्लर के साथ पीसीआर भी थी तो हमलावर पुलिस पर हावी कैसे हो गए। इससे साफ पता चलता है कि जो सीसीटीवी फुटेज मीडिया में जारी की वह उस वक़्त की थी जब हमलावर पुलिस पर हमला कर चुके थे और हमलावरों को पुलिस पकड़ कर ले जा रही थी। ये सब पुलिस पर दबाव बनाने की साजिश है।
–क्या अपना सम्मान बचा पाएगी पुलिस या मामला ठंडे बस्ते में चला जायेगा–
पुलिस ने अब तक दो आरोपियों मनप्रीत और कमलदीप को काबू किया है जबकि दो आरोपी फरार चल रहे हैं। अब देखना यह है कि पुलिस अपना सम्मान बचा पाती है या मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। बीते कई मामलों को देखने से पता चलता है कि अगर आरोपियों को पकड़ने में देर होने लगे तो समझों की पुलिस पर खादी का दबाव बनना शुरू हो गया है। इस मामले में भी ऐसा ही होना शुरू हो गया है। पुलिस पर आरोप लगने,मामले को घुमाने की कोशिश करना,वरिष्ठ नेताओं का सामने आना,साफ बताता है कि पुलिस पर दबाव बनाना शुरू हो चुका है। गौरतलब है कि जालंधर में खाकी पर खादी वर्षों से ही हावी होता रहा है, चाहे गोपाल नगर गोली कांड हो या रिंकू सेठी द्वारा पुलिस सब इंस्पेक्टर से बदसलूकी। हर मामले में उच्च अधिकारियों ने खादी को बचाने के चक्कर में खाकी को शर्मसार ही किया है। हमेशा से ही छोटे मुलाजिमों को खादी के आगे घुटने टेकने पड़े है। यहाँ देखना यह है कि भगवंत भुल्लर को अपने ही विभाग से मदद मिलती है या फिर यह मामला भी और मामलों की तरह उच्च अधिकारियों का खादी के साथ सांठ गांठ की बलि चढ़ जाता है। अब ये तो समय ही बताएगा कि पुलिस अपना खोया सम्मान बचा पाती है या नहीं या फिर कुछ समय के अंतराल पर मामला ठंडे बस्ते में चला जायेगा।

