*👉🏻 कोरोना महामारी की इस दूसरी लहर में बीमारी से तो जूझ ही रहे हैं लोग और अब हो रहे बिजली कटों से परेशान, रोजाना चार से पांच कट लगा रहा हैं बिजली विभाग* *👉🏻 कोरोना मरीजों के प्रति सेहत विभाग भी हो चुका है सुस्त, घरों में इलाज करा रहे कोरोना संक्रमित मरीजों को सेहत विभाग की तरफ से कोई पूछने तक भी नहीं आया, सरकारी रिकार्ड में बातें की जा रही है फतेह किट बांटने की, पढ़ें पूरी खबर सिर्फ हैडलाइन एक्सप्रेस पर 👇🏻*
जालंधर, 24 अप्रैल 2021-(प्रदीप भल्ला)-कोरोना महामारी के कारण जिले के हालात तो बिगड़ ही रहे हैं ऊपर से उन पर जख्मों पर नमक छिड़कने वाला काम बिजली विभाग कर रहा है। शहर में कितने ही लोग हैं जो कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं और वह अपने घरों पर ही आइसोलेट हुए हैं, उनमें से कई लोगों ने घर में ही इलेक्ट्रिक मशीनें लगाई है जो ऑक्सीजन की सप्लाई दे सकें, लेकिन बिजली विभाग द्वारा दिन में ही रोजाना 4-5 बार बिजली के कट लगाए जा रहे हैं।
जिस कारण ऑक्सीजन के सहारे चल रहे मरीजों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। वैसे तो सरकार कह रही है कि कोरोना के इस दौर में पीड़ित लोगों को सभी सुविधाएं दी जाएंगी। मगर हो इसके विपरीत रहा है। इस कठिन समय में जब बिजली आपूर्ति 24 घंटे होनी चाहिए तो बिजली विभाग बिजली के कट लगा कर लोगों को और परेशानी में डाल रहा है।
–स्वास्थ्य विभाग भी अपनी जिम्मेदारी सही ढंग से नहीं निभा रहा–
कोरोना की पहली लहर के समय जब किसी कॉलोनी या मोहल्ले में कोई पॉजिटिव मरीज पाया जाता था तो सेहत विभाग के कर्मचारी उस मरीज के परिजनों और उनके आस पड़ोस में रहने वालों के सैंपल कलेक्ट करता था ताकि पता चल सके कि पॉजिटिव मरीज के कारण किसी और को संक्रमण तो नहीं हुआ है। मगर दूसरी लहर जितनी ही भयानक हो रही है सेहत विभाग उतना ही लापरवाह हो चुका है।
अब जब शहर की अलग-अलग कॉलोनियों में कई पॉजिटिव मरीज अपने घरों में आइसोलेट हैं तो सेहत विभाग का कोई कर्मचारी भी उन्हें पूछने तक नहीं आया और ना ही सरकार द्वारा दी जाने वाली फतेह किट उन तक पहुंचाई जा रही है। संक्रमित मरीजों के बारे में जानकारी लेने की तो बात ही अलग है सेहत विभाग खानापूर्ति कर अपनी तरफ से ही रिकॉर्ड में फतेह किट मरीजों तक पहुंचाने की बातें कर रहा है, लेकिन असलियत यह है कि कोरोना पॉजिटिव मरीज घर पर खुद ही अपना इलाज करवा रहा है और सेहत विभाग की तरफ से कोई सुविधा उन तक नहीं पहुंच रही। इसके अलावा ना ही सेहत विभाग ने आस-पड़ोस के लोगों को पूछना चाहा कि कहीं उनमें से किसी व्यक्ति को कोई कोरोना का लक्षण तो नहीं हैं। सेहत विभाग और पंजाब सरकार की इस कार्यप्रणाली के कारण लोगों में रोष पैदा हो रहा है।