*👉🏻 मामला थाना प्रभारी भगवंत भुल्लर व उनके सुरक्षाकर्मियों पर हुए हमले का* *👉🏻 तीन सप्ताह बीत जाने पर भी फरार आरोपियों को पकड़ने में पुलिस नाकाम, अपने ही हमलावरों को पकड़ नहीं पा रही पुलिस तो आम जनता की सुरक्षा कैसे कर पायेगी* *👉🏻 पढ़ें पूरी खबर सिर्फ हैडलाइन एक्सप्रेस पर 👇🏻*
जालंधर, 01 मई 2021-(राजीव शर्मा/प्रदीप भल्ला)-10 और 11 अप्रैल की देर रात को जब मॉडल हाउस के माता रानी चौक में खड़े चार युवकों को थाना भार्गव कैम्प के प्रभारी भगवंत भुल्लर ने नाईट कर्फ्यू की उलंघना करने का पाठ पढ़ाना चाहा तो उक्त चारों युवकों ने थाना प्रभारी भगवंत भुल्लर से मारपीट करते हुए उनके सुरक्षाकर्मियों पर हमला बोल दिया था। जिस कारण थाना प्रभारी की पगड़ी करीब 5 फुट दूर जाकर गिरी थी। जिसके बाद पुलिस ने दो आरोपियों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया था जबकि दो हमलावर मौके से फरार हो गए थे। पुलिस पहले दिन ही राजनीतिक दवाव में आ गई थी पर फिर भी पुलिस ने सभी हमलावरों पर सख्त धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया था। मगर तीन सप्ताह बीत जाने के बाद भी पुलिस फरार दो हमलावरों को पकड़ नहीं पाई। जिसके कारण पुलिस की जगह जगह किरकिरी हो रही है। अब तो लोग भी कहना शुरू हो गए हैं कि अगर पुलिस खुद अपने हमलावरों को पकड़ नहीं पा रही तो आम जनता को इंसाफ कैसे दिला पाएगी। छोटी छोटी बातों में बड़ी बड़ी धारा लगा कर लोगों को परेशान करने वाली पुलिस आज अपने आपको ही इंसाफ नही दिला पा रही है। 
–क्या अंदरखाते हो रहा है राजीनामा,क्या खादी ने दबाव बना लिया है पुलिस प्रशासन पर–
हमलावरों को तीन सप्ताह बीत जाने पर भी ना पकड़ पाने के कारण पुलिस की किरकिरी हो रही है। चर्चा है कि खादी ने खाकी पर दबाव बना लिया है और शायद राजीनामा भी हो गया हो। यहीं कारण है कि पुलिस फरार आरोपियों को पकड़ने में कोई दिलचस्पी नही दिखा रही है। अगर ऐसे ही राजनीति खाकी पर हावी होती रही तो पुलिस की छवि ऐसे ही धूमिल होती रहेगी और लोगों का विश्वास पुलिस पर से उठता जाएगा। इन्हीं कारणों से ही आम लोगों के दिलो दिमाग पर आज के समय पुलिस की छवि ठीक नही है । 
–हमलावरों के साथ वरिष्ठ कांग्रेसी नेता की नजदीकी ही शायद पुलिस पर भारी पड़ रही है–
हमलावरों के साथ वरिष्ठ कांग्रेसी नेता की नजदीकी के कारण ही पुलिस प्रशासन इस मामले में ढीला पड़ चुका है। जिस कारण दो हमलावर अभी तक पुलिस की पहुंच से दूर है। लोगों में चर्चा है कि अब तो उस दिन का इंतज़ार है जब खबर मिलेगी कि फरार आरोपियों की अदालत से जमानत हो चुकी है और एक बार फिर से खाकी पर खादी भारी पड़ी है। अब देखना यह है कि खाकी ने अपनी जमीर खादी को गिरवी रख दी है या अभी भी खाकी का हौंसला कायम है।
