17 करोड़ रुपये का एक इंजेक्शन… आखिर इतनी महंगा क्यों है?

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं सांसद संजय सिंह ने स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) नाम की बीमारी से जूझ रहे एक बच्चे की जिंदगी बचाने के लिए लोगों से आर्थिक मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा कि बच्चे को दो साल की उम्र पूरी होने से पहले बीमारी को ठीक करने का इंजेक्शन नहीं लगा तो उसकी जान को खतरा हो सकता है। इस बीमारी में जो इंजेक्शन लगता है, उसकी कीमत 17 करोड़ है। इससे दुनिया की सबसे महंगी दवा Zolgensma इंजेक्शन एक बार फिर चर्चा में है। यह वन-टाइम जीन थेरेपी है। हालांकि यह भारत में अप्रूव्ड नहीं है लेकिन डॉक्टर की सलाह और सरकार की मंजूरी के बाद इसका आयात किया जा सकता है। भारत में इसकी एक डोज की कीमत 17 करोड़ रुपये बैठती है। एक अनुमान के मुताबिक हाल के वर्षों में करीब 90 बच्चों को यह इंजेक्शन दिया गया है।
Zolgensma को स्विस कंपनी नोवार्तिस ने विकसित किया है। यह दुर्लभ जेनेटिक बीमारी एसएसए के इलाज में काम आती है। एसएमए एक घातक, न्यूरोमस्कुलर और प्रोग्रेसिव आनुवंशिक बीमारी है। यह खासतौर से ब्रेन की नर्व सेल्स और रीढ़ की हड्डी को नुकसान पहुंचाती है। एक अनुमान के मुताबिक अमेरिका में 10,000 से 25,000 बच्चे और वयस्क इस बीमारी से जूझ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि बहुत कम मरीज दवा को खरीद पाते हैं। दुनिया में एसएमए के इलाज के लिए केवल तीन दवाओं को मंजूरी मिली है। इन्हें बनाने वाली कंपनियां बायोजेन, नोवार्तिस और रॉश है।
जानकारों का कहना है कि इस दवा का मार्केट बहुत छोटा है और यह दवा बहुत असरकारक है। यही वजह है कि कम ही कंपनियों यही कारण है कि इसकी कीमत बहुत अधिक है। इसकी भारी कीमत के बावजूद एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे एसएमए के इलाज और केयर में आने वाले खर्च को काफी हद तक ऑफसेट किया जा सकता है। नोवार्तिस की वेबसाइट के मुताबिक इस दवा को 45 देशों में मंजूरी मिली है और अब तक दुनियाभर में 2,500 मरीजों का इलाज किया जा चुका है। कंपनी का दावा किया है उसने 36 देशों में करीब 300 बच्चों को मुफ्त में जीन थेरेपी दी है।






