बिजली की रिकार्ड मांग के बीच थर्मल प्लांटों में कोयले का संकट गहराया

पटियाला। पंजाब में बिजली की रिकार्ड मांग के बीच थर्मल प्लांटों में कोयले का संकट भी बन गया है। हालात यह हैं कि सबसे बड़े 1980 मेगावाट की क्षमता वाले तलवंडी साबो थर्मल में इस समय मात्र 3 दिनों का कोयला शेष है और रोपड़ प्लांट में 13 दिनों का ही कोयला है। जबकि तय मानकों के मुताबिक थर्मल प्लांट में 27 से 28 दिनों तक का कोयला होना जरूरी है। उधर, जून में ही बिजली की मांग 16000 मेगावाट का आंकड़ा छूने के नजदीक है। मंगलवार को बिजली की मांग 15963 मेगावाट पहुंच गई, जो इस सीजन में अब तक सबसे अधिक रही।
तलवंडी साबो थर्मल प्लांट में 3 दिन का कोयला शेष
झारखंड में पंजाब की पछवारा खान चालू होने के बाद से दावे किए जा रहे थे कि भविष्य में थर्मल प्लांटों में कोयले के संकट से बिजली उत्पादन प्रभावित नहीं होगा, लेकिन इसके विपरीत रोपड़ प्लांट में केवल 13 दिनों के लिए कोयले का स्टाॅक है। यह प्लांट कुल 840 मेगावाट की क्षमता का है और इसके चार यूनिट हैं। साथ ही प्राइवेट सेक्टर के तलवंडी साबो थर्मल प्लांट में मात्र 3 दिन का कोयला शेष है। उधर, गोइंदवाल में 21 दिन, लहरा मोहब्बत में 22 और राजपुरा में 23 दिन का स्टॉक है, जबकि इस समय पंजाब में भीषण गर्मी व धान सीजन के चलते बिजली की मांग लगातार रिकाॅर्ड तोड़ रही है।
जून में बिजली की खपत में पिछले साल के मुकाबले 43 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। मंगलवार को बिजली की अधिकतम मांग 15963 मेगावाट पहुंच गई। वहीं साल 2022 में आज के दिन अधिकतम मांग 11430 मेगावाट और 2023 में 11929 मेगावाट दर्ज की गई थी। ऐसे में थर्मलों में कोयले के स्टाॅक में कमी से आने वाले दिनों में बिजली उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। खास तौर से पंजाब तीन यूनिटों वाले तलवंडी साबो थर्मल पर काफी हद तक निर्भर है। पावरकाॅम अधिकारियों के मुताबिक धान सीजन शुरू होने से पहले ही प्राइवेट सेक्टर के थर्मलों को जरूरी मरम्मत कार्य व कोयले का स्टाॅक पूरा करने को कहा गया था। साथ ही कहा कि रोपड़ में कोयले के स्टाॅक को जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
रणजीत सागर डैम के दोनों यूनिट शुरू
उधर, मंगलवार को रणजीत सागर डैम के बंद पड़े दोनों यूनिट दोबारा चालू हो गए। पानी कम मिलने के चलते इन्हें बंद किया गया था। अब केवल लहरा का 210 मेगावाट का एक यूनिट ही बंद है। पावरकाॅम को 1850 मेगावाट, प्राइवेट थर्मलों से 2830 मेगावाट, हाइडल प्रोजेक्टों से 960 मेगावाट की बिजली प्रमुख तौर पर मिली। पावरकाॅम के पास कुल 5846 मेगावाट बिजली की उपलब्धता रही। बाकी की बिजली बाहर से लेकर मांग को पूरा किया गया।