अब नहीं होगी बिना नक्शे के जमीन की रजिस्ट्री, ये है नया नियम
छत्तीसगढ़ राजस्व विभाग ने अवैध प्लाटिंग और जमीन के फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के उद्देश्य से मिश्रित (शामिल) खसरे की रजिस्ट्री पर रोक लगा दी है, जिसके बाद रजिस्ट्री दफ्तर में हडक़ंप मचा हुआ है। वहीं, राजधानी में 500 से 700 करोड़ का सौदा फंस चुका है। इसके साथ ही विभाग ने आबादी और नजूल की जमीन पर भी खसरा नंबर की अनिवार्यता का आदेश जारी करते हुए अधिकारियों को इसकी रजिस्ट्री नहीं करने का फरमान जारी किया है।
कम्प्यूटरीकृत रजिस्ट्री होने के बाद पकड़ में आ रही गलती
विभाग का कहना है कि कम्प्यूटरीकृत रजिस्ट्री होने के बाद यह गलती पकड़ में आ रही है, जिसमें एक से अधिक खसरा होने पर सुपर इंपोज नक्शे की गैरमौजूदगी की वजह से सही जमीन पर पता नहीं चल पा रहा है।
नहीं लगाई रजिस्ट्री पर रोक
ग्राम एवं नगर निवेश से अनुमोदित और सुपर इंपोज नक्शे की जमीन की रजिस्ट्री पर रोक नहीं लगाई गई है। एक से अधिक खसरे नंबर की रजिस्ट्री के मामले में सरकारी विभाग जैसे हाउसिंग बोर्ड और आरडीए भी पीछे नहीं है। आदेश के बाद यहां भी खलबली मची हुई है।
ऐसे हो रहा फर्जीवाड़ा
विभाग के मुताबिक एक से अधिक खसरा नंबर में एक ही जमीन कई व्यक्तियों को बेचे जाने का खेल चल रहा है। इसमें अवैध प्लाटिंग करने वालों की तादाद अधिक है। उदाहरण के तौर पर खसरा नंबर 23,24,25 के भाग की रजिस्ट्री अब नहीं होगी, बल्कि बिल्डर या किसी अन्य व्यक्ति को जमीन बेचते समय किसी एक खसरा नंबर का उल्लेख करना होगा। ‘शामिल’ या ‘के भाग’ जैसे शब्द का उल्लेख जमीन रजिस्ट्री मामले में मान्य नहीं होगा।
आम लोगों पर आफत
शामिल खसरे की ऐसे रजिस्ट्रियां जो पहले राजस्व विभाग की गलती की वजह से हो गई है, विषम परिस्थिति में यदि उस जमीन को आम आदमी किसी जरूरी कार्य के लिए अन्य व्यक्ति को बेचना चाहे तो यह नहीं होगा। हालांकि यह नियम बिल्डरों पर भी लागू होगा, लेकिन रिकॉर्ड दुरुस्त करवाने में विभाग की तत्परता नहीं होने की वजह से आम आदमी परेशान हो
रहा है।
विभाग की बैठक जल्द
इस मामले में राजस्व विभाग की बैठक आयोजित होने वाली है, जिसमें पहले शामिल खसरे की रजिस्ट्रियों के संबंध में रिकार्ड दुरुस्त करवाने को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
क्या है सुपर इंपोज नक्शा ?
सुपर इंपोज नक्शा आर्किटेक्ट और पटवारी द्वारा तैयार किया गया प्लाटिंग क्षेत्र का ऐसा नक्शा है, जिसमें आर्किटेक्ट और पटवारी उस क्षेत्र का अलग-अलग नक्शा तैयार करते हैं, जिसे एक के ऊपर रखने पर इस नक्शे में बराबर मिलान होता है। इस खसरे में अलग-अलग खसरे के मुताबिक जमीन का पता चलता है। फर्जीवाड़े की आशंका नहीं रहती है।
विभाग में यह भी
1. रायपुर एवं दुर्ग नगर निगम में सीजी कॉस्ट के माध्यम से नगरीय क्षेत्र का सर्वे पूर्ण कर लिया गया है। इसे शीघ्र ही कलक्टरों को भौतिक सत्यापन के लिए प्रदाय कर दिया जाएगा।
2. ई-रजिस्ट्री व इ-नामांतरण के विषय पर अधिकारियों द्वारा रैंडम जांच किया जाकर रिपोर्ट जमा करनी होगी।
3. संभाग स्तरीय गठित जांच टीमों द्वारा प्रतिमाह रोस्टर बनाकर अनुविभागीय कार्यालय, तहसील कार्यालय, पटवारी हल्के की जांच की जाएगी।
4. आगामी तीन माह में विभाग द्वारा सभी लंबित प्रकरणों की कार्यवाही पूर्ण करने के निर्देश दिए।
5. डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा कुल 85 प्रतिशत खातों का एवं 89 प्रतिशत खसरों का सत्यापन पूरा।
6. नक्शों को अपडेट करने और आधार प्रविष्टि को पूर्ण रूप से निराकृत करने के निर्देश दिए।
यहां एक से अधिक खसरे का खेल
रावतपुरा नगर (मठपुरैना), भाठागांव, न्यू चंगोराभाठा, गुढिय़ारी, रायपुरा, अमलेश्वर, सेजबहार, अमलीडीह, दतरेंगा, नया रायपुर के गांव, अभनपुर, मंदिरहसौद, विधानसभा रोड आदि।
मंत्री भी लगा चुके हैं फटकार
राजस्व मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय ने बीते दिनों समीक्षा बैठक में इस मामले में विभागीय अधिकारियों को फटकार लगा चुके हैं। उन्होंने डायवर्टेड भूमि के रिकार्ड संधारण एवं कालोनाईजर्स के द्वारा शासन के पक्ष में भूमि त्यजन की अभिलेखों में प्रविष्टि किए जाने में हो रहे विलम्ब पर नाराजगी जाहिर की।
रायपुर मुख्य पंजीयक, बीएस नायक ने बताया के राजस्व विभाग के दिशा-निर्देशों के मद्देनजर शामिल खसरे या के भाग की रजिस्ट्री पर रोक लगाई गई है। इससे जमीन के फर्जीवाड़े की आशंका रहती है, वहीं सही जमीन पर पता नहीं चल पाता। सुपर इंपोज नक्शा होने पर रजिस्ट्री में दिक्कत नहीं है। अन्य दिशा-निर्देशों का पालन किया जा रहा है।

