सिविल अस्पताल में नशा छुड़ाने वाली गोलियों की हो रही ब्लैक –नशा छुड़ाने की गोलियों की ब्लैक करने वाला गैंग सक्रिय–

जालंधर,26 मई-(प्रदीप भल्ला)- सिविल अस्पताल में आजकल एक गैंग सक्रिय है। जो नशा छुड़ाने की गोलियां लेकर उसे ब्लैक में बेच रहा है। सिविल अस्पताल में बने नशा छुड़ाओ केंद्र से लोग नशा छुड़ाने की दवाई लेने आते हैं। जो कि बिल्कुल मुफ्त मिलती है। लेकिन कुछ युवकों ने इन गोलियों को ब्लैक में बेचना शुरू कर दिया है। सुबह नशा छुड़ाओ केंद्र के खुलते ही कुछ युवक खुद को नशे का आदी बताकर वहां से गोली लेकर जाते हैं और बाहर निकलते ही उसे महंगे दाम में बेच देते हैं। उक्त युवक जो कि नशेड़ी ना होने के बावजूद खुद को नशेड़ी बताकर दवाई लेते है और बाहर निकलते ही ढाई सौ रुपए में उसे बेच देते हैं। उक्त युवकों ने इस दवाई के जरिए अपना धंधा स्थापित किया हुआ है। जिसके बारे में नशा छुड़ाओ केंद्र के अधिकारियों को पता नहीं है।
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—कैसे चलता है दवाई की ब्लैक का धंधा–
नशा छुड़ाओ केंद्र में दवाई लेने वाले लोगों को डॉक्टर के सामने ही नशा छोड़ने की गोली खिलाई जाती है। लेकिन उक्त युवक डॉक्टर से गोली लेकर उसे खाने की बजाय जीभ के नीचे रख लेते हैं और बाहर निकलते ही उसको बाहर निकाल कर ढाई सौ रुपए में बेच देते हैं। इन लोगों से वही लोग गोली खरीदते हैं जो खुद ज्यादा नशा करने के आदि थे। क्योंकि एक गोली का असर कुछ समय बाद खत्म हो जाता है। जिस कारण उन्हें फिर से गोली खाने की जरूरत पड़ती है। लेकिन नशा छुड़ाओ केंद्र से एक व्यक्ति को एक गोली ही दी जाती है। इसीलिए नशे का आदी उक्त व्यक्ति इस गैंग से महंगे दाम में गोली खरीद लेता है।
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—कौन है यह गैंग चलाने वाले-–
नशा छुड़ाने की गोली को महंगे दाम में बेचने वाले यह युवक कोई और नहीं बल्कि सिविल अस्पताल के सामने ही बाजार में कारोबार करते हैं। उक्त युवकों ने इस गोली की ब्लैक में ज्यादा कमाई देख कर ही यह धंधा शुरू किया है। इस गैंग में 6 से 7 युवक संलिप्त है। सुबह होते ही यह युवक लाइन में लगकर नशा छुड़ाओ केंद्र से गोली लेते हैं और उसे खाने की बजाय जीभ के नीचे रख बाहर आकर उसे महंगे दाम में बेच देते हैं।
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—कुछ समय पहले डॉक्टर ने दवाई खिलाने की प्रक्रिया को बदला था-–
कुछ समय पहले नशा छुड़ाओ केंद्र के डॉक्टरों को दवाई की ब्लैक के बारे में पता चला था, तो उन्होंने रोगी को दवाई खिलाने की प्रक्रिया को बदल दिया था। जिस कारण इस गैंग का धंधा बंद हो गया था। जैसे ही डॉक्टरों को दवाई की ब्लैक के बारे में पता चला था तो उन्होंने नशे के आदी व्यक्ति को अपने सामने ही गोली पीसकर खिलानी शुरू कर दी थी। जिसके बाद गोली की ब्लैक का धंधा बंद हो गया था। लेकिन अब फिर से नशा छुड़ाओ केंद्र से गोली मिलने लगी तो उसकी ब्लैक भी शुरू हो गई।
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–क्या कहना है मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. बावा का–
जब इस बारे में सिविल अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. के.एस. बावा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वैसे तो गोली मरीज को खिलाकर ही भेजा जाता है। अगर फिर भी कोई बात सामने आती है तो इसकी जांच करवाई जाएगी।
