*👉🏻 गैर सरकारी संगठनों ने बच्चों के साथ मनाया विश्व योग दिवस*

जालंधर, 21 जून-(प्रदीप भल्ला)- विश्व योग दिवस के दिन गैर सरकारी संगठनों ने विभिन्न स्कूली बच्चों व स्लम एरिया के बच्चों को योग की जानकारी दी। सर्व अधिकार रक्षा समिति के शंकर कुमार चौधरी ने बच्चों को बताया कि भारत में योग लगभग 5,000 हजार वर्ष पुरानी एक मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक प्रथा के रुप में देखा गया है। योग की उत्पत्ति प्राचीन समय में भारत में हुई थी। जब लोग अपने शरीर और दिमाग में बदलाव के लिये ध्यान किया करते थे। पूरे विश्वभर में योग अभ्यास की एक खास तारीख तय की गयी और योग दिवस के रुप में मनाने की शुरुआत भारतीय प्रधानमंत्री के द्वारा संयुक्त राष्ट्र आम सभा से हुई थी। उन्होंने बताया कि 2018 का विश्व योग दिवस “शांति के लिए योग” विषय पर आधारित है।
इस मौके पर निष्काम सेवा सोसायटी से किरण नागपाल ने बच्चों से कहा कि योगा कैलोरी को जलाने और हमारी मांसपेशियों को मज़बूत करने में मदद करता है। यह एक सर्वसमावेशक कसरत है। जो मन और शरीर दोनों पर केंद्रित है। योगा प्रशिक्षण के तहत सभी प्रकार के अभ्यास और कसरत की जाती है। जिसमें गहरी साँस लेना, विश्राम करना और ध्यान लगाना आदि शामिल है। योग चमत्कार करता है और इसे आप केवल तभी अनुभव कर सकते हैं जब आप बिना रुके नियमित तरीके से इसका अभ्यास करते रहे।
इस अवसर पर योग गुरु शुभांग गुप्ता व संदीप ने बच्चों को बताया कि योगा में हमें शरीर के कई आसनों के बारे में सीखने को मिलता है। जैसे अपने आप को फिट रखने की क्रियाएँ उदाहरण के रूप में बैठना, खड़े होना,आगे झुकना,पीछे की तरफ झुकाव, उल्टे मुंह खड़े होना आदि है। कई योगा मुद्राओं में लचीलेपन की आवश्यकता होती है। जैसे हल मुद्रा, कबूतर मुद्रा, ऊपरी धनुष मुद्रा, मछली मुद्रा आदि और बहुत से लोगों के पास अपने शरीर में पर्याप्त लचीलापन नहीं होता। इसलिए कई अन्य योगा क्रियाएँ हैं जिनमें शरीर के लचीले होने की आवश्यकता नहीं पड़ती। जिनमें पर्वत मुद्रा, कुर्सी मुद्रा, त्रिभुज मुद्रा आदि शामिल हैं। उन्होंने बताया कि योगा मुद्राएँ अनगिनत है इसलिए योगा करने के लाभ भी अनगिनत है। योगा का अभ्यास करना बहुत फायदेमंद है और इसके अभ्यास में कई बीमारियां जैसे श्वसन समस्याएँ, पेट की समस्याएँ, पाचन तंत्र से संबंधित बीमारियों का इलाज करने की क्षमता है। यह हमारे शरीर से नकारात्मकता और मानसिक रोगों को दूर करने में मदद करता है। यह तनाव स्तर को कम करने और जागरूकता बढ़ाने में मदद करता है। विशेष रूप से बच्चों के लिए यह एकाग्रता शक्ति और फोकस के निर्माण में मदद करता है।
इस अवसर पर विभिन्न स्कूलों व स्लम एरिया के बच्चों के अलावा एनजीओ निष्काम सेवा सोसायटी से अमिता अग्रवाल, टीना धुना, मोनिका शर्मा, ममता भगत, आस्था बाली, पारिता अरोड़ा व सर्व अधिकार रक्षा समिति से संदीप कुमार व बचपन बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ता मौजूद थे।





