अगर आपका बैंक खाता आईसीआईसीआई बैंक में है और उस बैंक खाते में सत्यापन के लिए एयरटेल का नंबर जुड़ा है तो सतर्क हो जाएं। हैकर इस तरह के बैंक खातों में लगातार सेंध लगा रहे हैं। इसके लिए वह एयरटेल की सिम स्वैपिंग सेवा का इस्तेमाल कर रहे हैं। नोएडा साइबर सेल को इस तरह की हाल ही में छह शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इन सभी शिकायतों में पीड़ित का बैंक खाता आईसीआईसीआई बैंक में था और उस खाते से एयरटेल का मोबाइल नंबर जुड़ा था। इनमें से कुछ लोगों ने एयरटेल की वेबसाइट पर सिम अपग्रेड करने के लिए ऑनलाइन आवेदन भी किया था। सभी मामलों में हैकर ने खाताधारक को फोन कर एयरटेल के सिम को 4जी में अपग्रेड करने का झांसा दिया। हैकर ने खाता धारक को बताया कि इससे उनकी मोबाइल कनेक्टिविटी भी बेहतर हो जाएगी।
ऐसे देते हैं झांसा
झांसे में लेने के लिए हैकर खाताधारक के मोबाइल पर एक एसएमएस भेजते हैं। ये सिम स्वैप करने के अनुरोध का एसएमएस होता है। इसके बाद हैकर इस मैसेज को खाता धारक द्वारा उनके मोबाइल से एयरटेल के कस्टमर केयर नंबर 121 पर भेजने को बोलते हैं। हैकर खाता धारक को बताते हैं कि सिम अपग्रेड होने में तीन-चार घंटे का वक्त लगेगा। इस दौरान उनका मोबाइल नेटवर्क कुछ समय के लिए बंद रहेगा। इस बीच हैकर सिम स्वैप करा, अपने पास पहले से मौजूद उसी नंबर की डुप्लिकेट सिम को चालू करा लेते हैं। इसके बाद हैकर आईसीआईसीआई बैंक की वेबसाइट पर जाकर खाता धारक का पासवर्ड रीसेट करते हैं। इसके लिए खाता धारक के मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी भेजा जाता है। वह नंबर हैकर के पास होने की वजह से ओटीपी उसे आसानी से मिल जाता है। इसकी मदद से वह खाता धारक की ऑनलाइन बैकिंग का पासवर्ड रीसेट कर आसानी से ट्रांजेक्शन कर लेता है।
जिस वक्त हैकर खाता धारक का सिम स्वैप कर उसके खाते में सेंध लगा रहा होता है। पीड़ित को लगता है कि उसका सिम अपग्रेड हो रहा है। जब कई घंटों बाद पीड़ित का सिम चालू नहीं होता है तो वह एयरटेल कस्टमर केयर पर संपर्क करता है। वहां से उसे पता चलता है कि उसका सिम ब्लॉक करा, दूसरी जगह चालू भी करा लिया गया है। इससे पीड़ित को धोखाधड़ी की आशंका होती है। कई मामलों में पीड़ित बैंक खाते में सेंध लगने की आशंका तक पहुंच ही नहीं पाता है और उसे नेट बैंकिंग लॉगइन करने या पासबुक अपडेट कराने पर खाते से रुपये निकलने का पता चलता है।
केस-1 : शताब्दी रेल विहार सेक्टर-62 में रहने वाली रुचि शर्मा ने 3 मई को अपना एयरटेल का सिम अपग्रेड करने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। 7 मई को उनके पास एक फोन आया। फोन करने वाले खुद को एयरटेल कंपनी का बताकर रुचि शर्मा का सिम स्वैप करा लिया। इसके बाद उनके खाते से एक लाख रुपये निकाल लिए गए। 8 मई को रुचि शर्मा को आईसीआईसीआई बैंक से प्राप्त ईमेल के जरिये ट्रांजेक्शन का पता चला। बैंक से मालूम करने पर पता चला कि ये रकम कॉरपोरेशन बैंक के खाते में ट्रांसफर की गई है। इसके बाद उन्होंने साइबर सेल को शिकायत दी है।
केस-2 : मोरना में रहने वाले शिव शंकर साहू के आईसीआईसीआई बैंक खाते में भी एयरटेल का नंबर जुड़ा है। 10 मई को हैकर ने उनका भी सिम स्वैप कर खाते से 47,500 रुपये निकाल लिए।
केस-3 : सेक्टर-126 की एक कंपनी में काम करने वाले शिव कुमार कश्यप के आईसीआईसीआई बैंक खाते में एयरटेल का नंबर जुड़ा हुआ है। 16 मई को हैकर ने उनका भी सिम स्वैप कर खाते से 25,000 रुपये निकाल लिए।
केस-4 : हरौला में रहने वाले शमशाद खान के आईसीआईसीआई बैंक खाते से भी हैकरों ने 12 मई को 47,000 रुपये निकाल लिए। उनके भी खाते में एयरटेल का नंबर जुड़़ा था।
चार राज्यों में ट्रांसफर होती है रकम
साइबर क्राइम सेल को अब तक की जांच में पता चला है कि आईसीआईसीआई और एयरटेल वाले बैंक खातों में सेंध लगाकर रकम चार राज्यों कर्नाटक, झारखंड, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में ट्रांसफर की जा रही है। साइबर सेल के अनुसार इस तरह की धोखाधड़ी करने वालों की संख्या सैकड़ों या हजारों में हो सकती है। इनका गिरोह काफी बड़ा है, जो देश के कई राज्यों में फैला हुआ है। कई बार ये लोग रकम ट्रांसफर करने के लिए दूसरे के बैंक खाते का प्रयोग करते हैं, ताकि उनकी पहचान उजागर न हो।
दोबारा बिहार में शुरू होता है सिम
साइबर सेल को जांच में ये भी पता चला है कि खाता धारक का सिम बंद होने के बाद दोबारा वह सिम बिहार में शुरू होता है। साइबर सेल के अनुसार पूर्व में पकड़े गए इस तरह के हैकरों से भी पूछताछ में पता चला था कि बिहार के कुछ गांव के युवा इस तरह की हैकिंग में सक्रिय हैं। इन्होंने काफी संख्या में गांव के युवाओं को प्रशिक्षित कर अपने साथ जोड़ लिया है।
यूपीआई के जरिये भी हो रहा फर्जीवाड़ा
पुलिस के अनुसार हैकर इस तरह के फर्जीवाड़े के लिए हैकर बैंक के यूपीआई एप (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) का भी प्रयोग कर रहे हैं। यूपीआई एप कई बैंकों के बीच में रुपये ट्रांसफर करने के लिए कॉमन प्लेटफॉर्म का काम करता है। यूपीआई एप के जरिये फर्जीवाड़े के मामलों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है।पिछले करीब तीन माह में ही साइबर सेल को यूपीआई एप से फर्जीवाड़े की 25 शिकायतें प्राप्त हो चुकी हैं। जनवरी-2018 से मई-2018 तक डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, यूपीआई एप और ऑनलाइन बैकिंग हैक कर खाते में सेंध लगाने की कुल 327 शिकायतें साइबर सेल को प्राप्त हुई हैं।
हैकरों द्वारा सिम स्वैप कराने के बहाने
आधार लिंक कराने के नाम, सिम अपग्रेड करने के नाम पर, सस्ता सामान बेचने के नाम पर, लॉटरी जीतने के नाम पर, चेहरा पहचानो जैसी प्रतियोगिताओं में विजेता बनाने के बहाने, मोबाइल नेटवर्क सही करने के बहाने व खाता बंद या एटीएम कार्ड बंद होने के बहाने हैकर सिम स्वैप कराते हैं।
सिम स्वैपिंग से अलर्ट कर रहा एयरटेल
इस तरह के फर्जीवाड़े लगातार सामने आने के बाद एयरटेल मैसेज भेजकर अपने ग्राहकों को सिम स्वैपिंग के प्रति अलर्ट कर रहा है। एयरटेल द्वारा भेजे जा रहे अलर्ट मैसेज में कहा जा रहा है कि ऐसे कॉल से सावधान रहें, जिनमें आधार वेरिफिकेशन के नाम पर आपसे सिम स्वैप करने को कहा जाए। जब तक आपके पास फिजिकल सिम नहीं हो, कृपया कोई ओटीपी शेयर नहीं करें। न ही 121 पर सिम <नया सिम नंबर> भेजें। इससे आपको हानि या आपके मोबाइल नंबर का गलत इस्तेमाल हो सकता है।