*👉🏻 लगातार बढ़ रही है ओस्टियोप्रोसिस बीमारी से पीड़ित मरीजों की संख्या* *👉🏻 डॉ. पंकज त्रिवेदी ने बताये बीमारी के लक्षण*
जालंधर,4 जनवरी 2019-(हैडलाइन एक्सप्रेस)-ओस्टियोप्रोसिस की बीमारी लगातार लोगों में बढ़ती जा रही है।इसका मतलब शरीर में हड्डियों का कमज़ोर होना है। हड्डियां कमज़ोर होने से हल्का सा
गिर जाने पर भी रीढ़,चूल्हे,कलाई आदि की हड्डी टूट जाती है और व्यक्ति को इससे काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस बीमारी के कारण टूटी हड्डी को जुड़ने में भी काफी समय लग जाता है। इस बारे में ब्रेन और स्पाईन सर्जन डॉ. पंकज त्रिवेदी का कहना है कि यह बीमारी तीन में से एक महिला और 12 में से एक व्यक्ति को होती है। यह बीमारी प्राईमरी व सैकेंडरी होती है। इस प्राईमरी व सैकेंडरी से महिलाएं व व्यक्ति विभिन्न बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। यह बीमारी ज्यादातर उन लोगों में देखने को मिलती है, जो शराब व सिगरेट का काफी सेवन करते हैं।
इसके अलावा विटामिन डी की कमी होना, व्यायाम न करना भी इसके कारण है। शूगर और थाईराईड भी इस बीमारी के कारण हैं।
इस बीमारी से जो भी व्यक्ति पीड़ित होता है उसका शरीर हल्का सा भी ज़मीन पर गिरना, धक्का लगना या झटका लगना हड्डियों के टूट जाने का शिकार हो जाते हैं। शुरू में इसके लक्ष्य पैरों में दर्द होना या पैरों की कमज़ोरी होना भी हो सकता है। इस बीमारी के कारण कई बार रीढ़ की हड्डी भी टूट सकती है। इस बीमारी से कभी-कभार इतना दर्द भी हो सकता है कि आदमी करवट भी नहीं ले सकता और उसका कूबड़ निकल आता है। एक्सरे या डैक्सा मशीन के द्वारा बोन मिनरल डैस्टी माप कर इस बीमारी का पता लगाया जा सकता है यदि बोन
मिनरल डैस्टी 2.5 हो तो कम है और व्यक्ति को ओसिटियोप्रोसिस की बीमारी हो सकती है।लेकिन मरीजों को इससे परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। इसका इलाज हो सकता है।
– डॉ. पंकज त्रिवेदी
(सीनियर ब्रेन और स्पाईन सर्जन)
मो : 98143-01317
