*👉🏻 पराली जला कर लोगों की जान के दुश्मन बन रहे किसान* *👉🏻 प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी में पहुंचने के कारण दिल्ली के सभी स्कूल 5 नवंबर तक बंद रखने के आदेश* *👉🏻 इस खबर सम्बंधी पूरी जानकारी हासिल करने के लिए नीचे दिए गए हैडलाइन एक्सप्रेस के लिंक को क्लिक करें 👇🏻*
दिल्ली/जालंधर,1 नवंबर 2019-(हैडलाइन एक्सप्रेस/प्रदीप भल्ला)- पराली को आग लगाने के कारण वायु प्रदूषण दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। जिस कारण लोगों को सांस लेने में तकलीफ होने लगी है और साथ ही आंखों में जलन का सामना भी करना पड़ रहा है। सरकार द्वारा नाड़ को जलाए जाने पर सख्त कार्रवाई के आदेशों के बावजूद किसान नाड़ को आग लगाने से बाज नहीं आ रहे। पराली जला कर किसान खुद और लोगों की जान के दुश्मन बन रहे हैं। किसानों ने दिवाली वाली रात पटाखों की आड़ में अपने खेतों में पराली को जला दिया ताकि किसी को पता ना चल सके, लेकिन वातावरण में प्रदूषण फैलने के कारण लोगों को सांस की दिक्कत और आंखों में जलन की शिकायत होने लगी। जिससे पता चलता है कि किसानों ने पटाखों की आड़ में पराली को जलाया है। सरकार के आदेश भी सिर्फ किताबों तक ही सीमित रह गए है। क्योंकि ना तो किसी प्रशासनिक अधिकारी ने पराली जलाने वाले किसानों पर जुर्माना लगाया और ना ही उन पर कोई सख्त कार्रवाई की गई।
अगर सरकार ने पराली जलाने वाले किसानों पर कोई सख्त कार्रवाई ना की तो आगे वातावरण में और भी प्रदूषण फैल जाएगा और लोगों को बीमारियों का सामना करना पड़ेगा। दिल्ली में भी प्रदूषण गंभीर श्रेणी में प्रवेश कर गया है। इसी कारण दिल्ली-एनसीआर में सरकार ने सभी स्कूलों को 5 नवंबर तक बंद रखने के आदेश जारी किए हैं। दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता गुरुवार रात और खराब हो गई और अब गंभीर स्तर पर है। वातावरण प्रदूषण प्राधिकरण के चेयर पर्सन भूरेलाल ने उत्तर प्रदेश हरियाणा और दिल्ली के मुख्य सचिवों को इस बारे में खत भी लिखा है। विशेषज्ञों के अनुसार जिस प्रकार से वातावरण प्रदूषित हो रहा है उससे इंसान की उम्र 7 साल कम होती बताई जा रही है। पराली का धुआं सिगरेट के धुए से भी ज्यादा खतरनाक है जिस कारण लोगों में बीमारियां बढ़ रही है। अगर समय रहते सरकार ने कोई सख्त नीति नहीं अपनाई तो छोटी उम्र में ही इंसानों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ेगा। पराली के धुंए से पीड़ित होकर बीमार हुए लोग अन्नदाता कहे जाने वाले किसानों को अब जान का दुश्मन बता रहे हैं। अगर समय रहते किसान भी जागरूक ना हुए तो वह भी पराली के जहरीले धुंए से पीड़ित होकर बीमारियों से ग्रस्त हो जाएंगे।