*👉🏻 गैंगस्टरों पर बन रही फिल्में युवा वर्ग को आकर्षित कर रही हैं अपराध की दुनिया में कदम रखने के लिए* *👉🏻 अपराधियों पर बनी फिल्मों पर रोक लगाने के लिए सरकार को उठाना चाहिए कदम* *👉🏻 इस लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक को क्लिक करें 👇🏻*
जालंधर,28 जनवरी 2020-(प्रदीप भल्ला)-मोटी कमाई करने के चक्कर में फिल्म निर्माता गैंगस्टरों पर फिल्में बना रहे हैं। निर्माता-निर्देशकों को पता है कि युवा वर्ग ऐसी फिल्मों की तरफ ज्यादा आकर्षित होता है। वहीं दूसरी तरफ युवा वर्ग गैंगस्टरों पर बनी फिल्मों को देख अपराध की दुनिया में कदम रखने के लिए भी आकर्षित हो रहा है।
सरकार को चाहिए कि ऐसी फिल्मों पर बैन लगाया जाए ताकि देश के भविष्य को बचाया जा सके। पिछले कुछ सालों में निर्माता-निर्देशकों ने पंजाब के मशहूर गैंगस्टर रुपिंदर गांधी पर दो फिल्में बनाई। इन फिल्मों में रुपिंदर गांधी के जीवन के बारे में दिखाया गया। उन फिल्मों को देखकर कितने ही नौजवान अपराध की दुनिया में कदम रखने के लिए उतारू हो गए। अब फिर से पंजाब के जालंधर शहर में रहने वाले मशहूर गैंगस्टर सुक्खा काहलवां के जीवन पर भी एक फिल्म तैयार कर दी गई है जो कि फरवरी माह में रिलीज की जाएगी। इस फिल्म में गैंगस्टर सुक्खा काहलवां के जीवन के बारे में दिखाया गया है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे सुक्खा काहलवां अपराध की दुनिया का बेताज बादशाह बन जाता है।
मगर अंत में उसके अपने साथी ही उसकी जान के दुश्मन बन जाते हैं और उसका कत्ल कर देते हैं। इस फिल्म के आने के बारे में पता चलते ही युवा वर्ग सोशल साइट्स पर इस फिल्म के ट्रेलर को देख ही उत्साहित हो रहे हैं और बेसब्री से फिल्म का इंतजार कर रहे हैं। दूसरी तरफ निर्माता-निर्देशक सिर्फ अपनी कमाई के चक्कर में युवा वर्ग को एक गलत दिशा प्रदान कर रहा है। अगर जालंधर की बात की जाए तो जालंधर के गांव काहलवां में रहने वाले सुक्खा काहलवां से पहले भी जालंधर में ऐसे कई गैंगस्टर पैदा हुए जिनका अंत भी बहुत भयानक ही हुआ, लेकिन यह सब जानते हुए भी युवा वर्ग अपराध की दुनिया में जाने से नहीं हिचकिचाते।
कई साल पहले जालंधर के भार्गव कैंप में रहने वाले टोनी पंडित की गैंगस्टर बनने की चाहत थी। इसी चाहत के कारण टोनी पंडित के कहर ने कई परिवारों को रुलाया, लेकिन टोनी पंडित का काम तमाम कर दुल्ला नामक अपराधी ने खुद को अपराध की दुनिया का बेताज बादशाह बना लिया। दुल्ला ने भी अपने समय में काफी दहशत फैलाई। मगर ज्यादा देर तक दुल्ला की बादशाहत कायम नहीं रही क्योंकि गोगी ने दुल्ला का कत्ल कर दिया। गोगी ने अपराध की दुनिया का रास्ता पकड़ते ही हफ्ता वसूली और नशे का खेल शुरू किया। मगर गोगी को घोकी ने अपना शिकार बना लिया। गोगी की हत्या के केस में घोकी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और जेल के अंदर ही घोकी की मौत हो गई। उसके बाद काला नामक अपराधी ने अपनी बादशाहत कायम करने की सोची, लेकिन उसका भी काम तमाम कर दिया गया। फिर एक और गैंगस्टर उभरा जिसका नाम था शिशु, शिशु ने भी अपनी पूरी दहशत जालंधर शहर में फैलाई थी लेकिन उसे विजय नाम के अपराधी ने खत्म कर दिया। अगर नए दौर की बात करें तो सुक्खा काहलवां अपराध की दुनिया में एक चमकता हुआ सितारा बन गया था, लेकिन दोस्त से दुश्मन बने उसके ही साथी विक्की गौंडर ने बेरहमी से गोलियां चलाकर सुक्खा काहलवां का कत्ल कर दिया। जिसके कुछ समय बाद पुलिस ने विक्की गौंडर का भी एनकाउंटर कर दिया। अगर बात की जाए तो यही सच सामने आता है कि अपराध की दुनिया में कदम रखने वाले युवाओं की उम्र बहुत कम होती है, लेकिन यह सब कुछ जानते हुए भी युवा वर्ग अपराध की दुनिया की तरफ आकर्षित होता है। जिसका एक कारण है अपराधियों पर बन रही फिल्में। अगर सरकार देश के भविष्य को बचाना चाहती है तो ऐसी फिल्मों पर रोक लगानी होगी। नहीं तो किसी ना किसी परिवार का नौजवान बेटा ऐसे ही अपराध की दुनिया में कदम रख कर अपने साथ-साथ कई परिवारों को नरक में धकेल देगा।
