*👉🏻 सेल्फ डिफेंस के नाम पर बन रहे असला लाइसेंस, मगर इस्तेमाल हो रहे आत्महत्या या अपनो का खून बहाने के लिए* *👉🏻 12 करोड़ की आबादी वाले बिहार की तुलना में 4 करोड़ की आबादी वाले पंजाब में कई गुना ज्यादा है लाइसेंसी हथियार* *👉🏻 पंजाब पुलिस से पांच गुणा ज्यादा हथियार है पंजाबियों के पास* *👉🏻 पढ़ें पूरी खबर सिर्फ हैडलाइन एक्सप्रेस पर 👇🏻*
जालंधर, 21 अप्रैल 2021-(राजीव शर्मा भूमिहार)-पंजाबियों द्वारा हथियार रखने का शौख सिर चढ़ कर बोल रहा है। यही कारण है कि पंजाब पुलिस से करीब 5 गुना अधिक लाइसेंसी हथियार होने के बावजूद भी असला लाइसेंस बनाने का काम बदस्तूर जारी है। लोगों को लगता है कि पुलिस प्रशासन उनकी हिफाजत करने में नाकामयाब है इसीलिये ही वो आर्म्स लाइसेंस बनवा रहे हैं। जानकारों के अनुसार आर्म्स लाइसेंस बनवाने के लिये कोई ठोस वजह होनी चाहिये, जैसे किसी आदमी को जान का खतरा है या किसी आपराधिक ग्रुप ने उसे धमकियां दी हो कि वो उसका जान माल का नुकसान कर देगा इसीलिये वह आर्म्स लाइसेंस ले रहा है। आर्म्स लाइसेंस फॉर्म में भी लाइसेंस लेने का कारण लिखना होता है। फॉर्म के उस कॉलम में असला लेने के चाहवान सभी लोग यही लिखते है कि उनकी जान माल को खतरा है। इसीलिये वह हथियार का लाइसेंस लेना चाहते है पर किसी ने आज तक यह नहीं लिखा है कि उसकी जान को किससे खतरा है। इसके बावजूद हथियारों के लाइसेंस पंजाब में धड़ल्ले से बनाये जा रहे है। सेल्फ डिफेंस कहकर जो आर्म्स लाइसेंस बनाया जा रहा है और उस लाइसेंस पर हथियार खरीदा जा रहा है, वह लाइसेंस 1 प्रतिशत भी आत्मरक्षा के लिये इस्तेमाल नही किया जा रहा। पंजाब में लाइसेंसी हथियार रखना अब स्टेटस सिंबल हो गया है किसी भी कीमत पर अधिकांश युवा अब हथियार रखना चाहते है। भले ही उनको इसकी जरूरत नहीं है। 
-पंजाब में कहाँ इस्तेमाल हो रहा है लाइसेंसी हथियारों का-
पंजाब में लाइसेंसी हाथियारों का इस्तेमाल सेल्फ डिफेंस में न के बराबर हो रहा है बल्कि ज्यादातर लाइसेंसी हथियार आत्महत्या करने के लिये इस्तेमाल किये जा रहे है या रिस्तेदारों की हत्या करने के लिये या पड़ोसियों पर छोटी छोटी बातों पर गोलिया चलाने के लिये इनका उपयोग अधिक हो रहा है। लाइसेंसी हथियारों से यहां बेगुनाहों ही हत्या अधिक हो रही है। शादी की पार्टी हो या जन्मदिन का जश्न अब हर जगह गोलियों की तड़तड़ाहट सुनाई देती है। इन लाइसेंसी हथियारों से हर साल दर्जनों की संख्या में अपने ही अपनों का खून बहा रहे है। कुछ दिन पहले ही फगवाड़ा में एक व्यक्ति ने अपने दो रिस्तेदारों को गोलियों से भून डाला था। जिसमें एक लड़की की मौत हो गई जबकि उसका पिता जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। 20 अप्रैल को थाना 7 के इलाके के एक व्यक्ति ने अपनी लाइसेंसी हथियार से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। ऐसी खबरें हर रोज पंजाब के विभिन्न जिलों कस्बों से आती रहती है कि लाइसेंसी हथियारों से पड़ोसी आपस मे छोटी छोटी बातों पर एक दूसरे को गोलियां मार रहे है ।
–दूध बेचने वाले हो या सब्जियां बेचने वाले, हर किसी को चाहिये आर्म्स लाइसेंस–
जी हां यह हम नहीं कह रहे है बल्कि पंजाब में आर्म्स लाइसेंस अप्लाई करने वालों के रिकार्ड बोलते है। दूध और सब्जियां बेचने वालों को भी अब आर्म्स लाइसेंस की जरूरत पड़ने लगी है। यही कारण है कि हर रोज सैकड़ो लोग पंजाब में आर्म्स लाइसेंस के लिये अप्लाई कर रहे है। जिस तरह लोग यहाँ आर्म्स लाइसेंस के लिये अप्लाई कर रहे है उससे तो यही लगता है कि लोगों को अब यह लग रहा है कि पुलिस प्रशासन उनकी हिफाजत नही कर सकती। इसीलिये वह अब अपनी हिफाजत के लिये लाइसेंसी हथियार खरीदने को तैयार हो रहे है। क्या कारण है कि 12 करोड़ की आबादी वाले बिहार से 4 करोड़ की आबादी वाले पंजाब में लाइसेंसी हथियारों की संख्या अधिक है और यह संख्या दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। पंजाब सरकार और आर्म्स लाइसेंस जारी करने वाली अथॉरिटी को चाहिये कि वह इस तरफ ध्यान दे और युवायों का कम से कम आर्म्स लाइसेंस बनाये। वहीं दूसरी तरफ पुलिस प्रशासन को चाहिये कि कानून का पालन इतनी सख्ती से करे कि आम लोगों को आर्म्स लाइसेंस बनवाने की जरूरत ही न पड़े।
